नई दिल्ली/तेहरान: मिडिल ईस्ट की धरती एक बार फिर भीषण धमाकों से दहल उठी है। बुधवार को इजरायल और ईरान के बीच हुए ताजा हवाई हमलों ने युद्ध की विभीषिका को एक नए और खतरनाक स्तर पर पहुंचा दिया है। एक तरफ जहां आसमान से आग बरस रही है वहीं दूसरी तरफ कूटनीतिक गलियारों में मची हलचल ने पूरी दुनिया की सांसें अटका दी हैं।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान के साथ बातचीत के दावे को ईरान के सैन्य नेतृत्व ने सिरे से खारिज करते हुए इसे खुद से की जा रही बातचीत करार दिया है।

वार्ता की मेज पर सन्नाटा, युद्ध के मैदान में शोर

ईरान के सशस्त्र बलों के संयुक्त कमान के प्रवक्ता इब्राहिम जोलफाकरी ने ईरानी सरकारी टीवी पर कड़े शब्दों में कहा,

“क्या आपके आंतरिक संघर्ष का स्तर इस स्तर पर पहुंच गया है कि आप (ट्रंप) खुद से ही बातचीत कर रहे हैं? हमारे जैसे लोग आप जैसे लोगों के साथ कभी समझौता नहीं कर सकते।”

यह बयान उन खबरों के ठीक बाद आया है जिनमें दावा किया गया था कि अमेरिका ने युद्ध समाप्त करने के लिए तेहरान को 15 सूत्रीय योजना भेजी है। ईरान का यह रुख साफ करता है कि फिलहाल कूटनीति की जगह बारूद ही बोलेगा।

तेहरान की रिहायशी बस्तियों से कुवैत के एयरपोर्ट तक हमले

युद्ध के चौथे हफ्ते में प्रवेश करते ही इजरायली रक्षा बलों (IDF) ने तेहरान के भीतर बुनियादी ढांचे को निशाना बनाकर हमलों की एक नई लहर शुरू की है। ईरानी समाचार एजेंसी SNN के अनुसार इन हमलों की जद में रिहायशी इलाके भी आए हैं जहां मलबे में जिंदगियां तलाशने का काम जारी है।

जवाब में, ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने न केवल इजरायल के तेल अवीव और किर्यात श्मोना को निशाना बनाया बल्कि कुवैत, जॉर्डन और बहरीन में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर भी मिसाइलें दागीं।

कुवैत अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर एक ईंधन टैंक को निशाना बनाया गया जिससे भीषण आग लग गई। हालांकि सऊदी अरब और कुवैत ने दावा किया है कि उन्होंने कई ड्रोन हमलों को नाकाम कर दिया है।

ऊर्जा संकट: दुनिया की दहलीज पर खड़ा 1970 जैसा दौर

इस युद्ध ने वैश्विक अर्थव्यवस्था की कमर तोड़ दी है। ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को प्रभावी ढंग से बंद करने के फैसले ने दुनिया को अब तक के सबसे बड़े ऊर्जा झटके में धकेल दिया है।

  • 80% तेल की सप्लाई प्रभावित: एशिया के देश इस संकट की अग्रिम पंक्ति में हैं, क्योंकि वे होर्मुज से गुजरने वाले कच्चे तेल के सबसे बड़े खरीदार हैं।

  • इमरजेंसी उपाय: कई देशों ने ईंधन की कमी को देखते हुए ‘वर्क फ्रॉम होम’ और स्कूलों की छुट्टियां घोषित कर दी हैं, जो कोविड काल की याद दिलाती हैं।

  • तेल का भंडार खुला: अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) ने रणनीतिक भंडार से 40 करोड़ बैरल तेल छोड़ने का फैसला किया है, जो अपने आप में एक रिकॉर्ड है।

क्या है अमेरिका का 15-सूत्रीय ‘शांति प्लान’?

सूत्रों के अनुसार अमेरिका की इस योजना में ईरान के परमाणु कार्यक्रम को पूरी तरह खत्म करने, हिजबुल्ला जैसे समूहों को समर्थन बंद करने और होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने की शर्तें शामिल हैं। बदले में अमेरिका एक महीने के युद्धविराम और प्रतिबंधों में ढील देने का प्रस्ताव दे रहा है। हालांकि ईरान ने पिछले दो वर्षों में हुए हमलों का हवाला देते हुए अमेरिका पर भरोसे की कमी जताई है।

पाकिस्तान की मध्यस्थता और सेना का जमावड़ा

इस बीच, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने अमेरिका और ईरान के बीच वार्ता की मेजबानी करने की पेशकश की है। लेकिन जमीन पर हालात शांति के विपरीत दिख रहे हैं। पेंटागन मिडिल ईस्ट में अपनी 82वीं एयरबोर्न डिवीजन के हजारों सैनिकों को भेजने की तैयारी कर रहा है, जिससे क्षेत्र में अमेरिकी सैनिकों की संख्या 50,000 के पार पहुंच जाएगी।

यह महायुद्ध अब केवल दो देशों की लड़ाई नहीं रह गया है बल्कि एक वैश्विक आर्थिक सुनामी बन चुका है जिसका असर हर आम आदमी की जेब और किचन तक पहुंच रहा है।

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