नई दिल्ली/कोलंबो: पश्चिम एशिया (मिडल ईस्ट) में गहराते तनाव और युद्ध के बादलों ने न केवल अरब देशों को बल्कि दक्षिण एशिया की अर्थव्यवस्थाओं को भी चिंता में डाल दिया है। इसी गंभीर विषय पर मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने श्रीलंका के राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके से फोन पर विस्तृत चर्चा की।
दोनों नेताओं की यह बातचीत ऐसे समय में हुई है जब लाल सागर और स्वेज नहर जैसे महत्वपूर्ण व्यापारिक मार्गों पर असुरक्षा के चलते ग्लोबल सप्लाई चेन और तेल की कीमतों पर संकट मंडरा रहा है।
प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति दिसानायके ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि पश्चिम एशिया में जारी अस्थिरता सीधे तौर पर वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा (Energy Security) को प्रभावित कर रही है।
श्रीलंका जैसे देश जो अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए पूरी तरह आयात पर निर्भर हैं उनके लिए समुद्री रास्तों का सुरक्षित होना अनिवार्य है।
बातचीत के दौरान दोनों दिग्गजों ने रेखांकित किया कि अगर शिपिंग लाइन्स बाधित होती हैं तो इसका असर केवल व्यापार पर नहीं, बल्कि आम जनता की जेब पर भी पड़ेगा।
पीएम मोदी ने इस संवाद में भारत की सुदृढ़ विदेश नीति, नेबरहुड फर्स्ट और MAHASAGAR विजन (क्षेत्र में सभी के लिए सुरक्षा और विकास) को दोहराया।
उन्होंने स्पष्ट किया कि हिंद महासागर क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखने के लिए भारत और श्रीलंका का आपसी समन्वय एक ढाल की तरह काम करेगा। यह केवल दो देशों का द्विपक्षीय मामला नहीं है बल्कि पूरे दक्षिण एशिया की आर्थिक रीढ़ को बचाने की कवायद है।
सिर्फ संकट ही नहीं बल्कि दोनों नेताओं ने भारत-श्रीलंका के बीच चल रही ऊर्जा परियोजनाओं की प्रगति की भी समीक्षा की। इसमें ग्रिड कनेक्टिविटी और नवीकरणीय ऊर्जा (Renewable Energy) जैसे क्षेत्र शामिल हैं जो भविष्य में श्रीलंका को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने में मदद करेंगे।
अंत में दोनों नेताओं ने वैश्विक और क्षेत्रीय चुनौतियों से निपटने के लिए निरंतर संपर्क में रहने और परामर्श जारी रखने पर सहमति जताई।
