सरसों की बुवाई: डिबलर या छिट्टूआ, कौन सा तरीका चुने किसान? जाने दोनों में अंतर

किसान भाइयों के लिए अच्छी खबर है क्योंकि सरसों की बुवाई का समय अब नजदीक आता जा रहा है! देश के कई हिस्सों में सरसों की खेती का सीजन शुरू हो चुका है. सितंबर के आखिरी हफ्ते से लेकर नवंबर तक बुआई का सही समय है. सरसों की फसल न सिर्फ तेल देती है बल्कि इसकी हरी पत्तियां और दाने भी बाजार में अच्छा मुनाफा दिलाते हैं. लेकिन अच्छी पैदावार के लिए खेत की सही तैयारी और बुआई का तरीका बहुत जरूरी है. आज हम बात करेंगे कि खेत को कैसे तैयार करें और डिबलर व छिट्टूआ विधि में से कौन सा तरीका आपके लिए बेहतर है.

सबसे पहले खेती की तैयारी जरूर है

सरसों की बुआई से पहले खेत की जुताई बहुत जरूरी है. दो से तीन बार जुताई करें ताकि मिट्टी भुरभुरी और खरपतवार मुक्त हो जाए. पहली जुताई गहरी करें जिससे मिट्टी ढीली हो और जड़ें आसानी से फैलें. इसके बाद कल्टीवेटर या डिस्क हैरो से दो जुताई और करें. अगर खेत में पहले की फसल के अवशेष हैं तो उन्हें हटाने के लिए तीसरी जुताई करें. जुताई के बाद हल्की सिंचाई करें इससे बीज जल्दी अंकुरित होते हैं और फसल अच्छी शुरूआत लेती है. खेती की तैयारी पर फसल की पैदावार निर्भर करती है इसलिए तैयारी पर अधिक से अधिक ध्यान किसान भाइयों को देना चाहिए.

डिबलर विधि आधुनिक है और फायदेमंद भी

डिबलर विधि बड़े खेतों के लिए बेहतरीन है. इसमें डिबलर मशीन से बीज सही गहराई और 20-25 सेंटीमीटर के फासले पर बोए जाते हैं. प्रति हेक्टेयर सिर्फ 4-5 किलो बीज की जरूरत पड़ती है. इस विधि में बीज की बर्बादी नहीं होती, और पानी-खाद का सही इस्तेमाल होता है. फसल 90-100 दिन में तैयार हो जाती है, और पैदावार 15-20% ज्यादा मिल सकती है. हालांकि डिबलर मशीन की शुरुआती लागत ज्यादा हो सकती है लेकिन लंबे समय में ये फायदेमंद साबित होती है.

छिट्टूआ विधि आसान है और सस्ता भी पड़ता है

छिट्टूआ विधि छोटे खेतों और कम बजट वाले किसानों के लिए अच्छी है. इसमें बीज को हाथ से खेत में छिटका जाता है, जिसके लिए किसी मशीन की जरूरत नहीं. लेकिन इसमें 6-8 किलो बीज प्रति हेक्टेयर लगते हैं और फसल असमान हो सकती है. बुआई के बाद हल्की जुताई या रोलर चलाना पड़ता है ताकि बीज मिट्टी में दब जाएं. इस विधि में खरपतवार और निराई-गुड़ाई की मेहनत ज्यादा होती है लेकिन लागत कम आती है. देश के कई हिस्सों में आज भी इस विधि का इस्तेमाल फसलों की बुवाई के लिए किया जाता है.

कौन सा तरीका है आपके लिए सबसे अच्छा?

डिबलर विधि ज्यादा पैदावार और संसाधनों की बचत करती है लेकिन मशीन का खर्च शुरू में ज्यादा हो सकता है. वहीं छिट्टूआ विधि सस्ती और तेज है पर पैदावार थोड़ी कम हो सकती है. अगर आपके पास बड़ा खेत और बजट है तो डिबलर चुनें. छोटे खेतों के लिए छिट्टूआ बेहतर है. दोनों ही तरीकों में सही समय पर बुआई और अच्छे बीज जरूरी हैं.

सरसों की खेती किसानों के लिए मुनाफे का सौदा है. सही जुताई, अच्छे बीज और अपने खेत के हिसाब से बुआई का तरीका चुनकर आप शानदार फसल उगा सकते हैं. अपने नजदीकी कृषि केंद्र से सलाह लें और इस रबी सीजन में सरसों की खेती से कमाई बढ़ाएं. दोनों विधि में से आप अपनी खेती की साइज और अपनी सहूलियत के आधार पर ये फैसला ले सकते है की आपके लिए इस सीजन में कौन सी बुवाई की तकनीक बेहतर रहने वाली है.

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Saloni Yadav

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