हरियाणा में किसानों की डिजिटल पहचान शुरू: OTP से बनेंगी Farm ID, जानिए कैसे बदल जाएगी व्यवस्था

हरियाणा सरकार ने AgriStack के तहत किसानों का डिजिटल पंजीकरण शुरू किया है। आधार OTP से वेरिफिकेशन के बाद किसानों को यूनिक Farm ID दी जाएगी। 1.38 करोड़ किसानों को जोड़ने का लक्ष्य है। फरवरी 2026 तक प्रक्रिया पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं।

  • हरियाणा में AgriStack योजना लागू
  • किसानों का OTP आधारित पंजीकरण शुरू
  • हर किसान को मिलेगी यूनिक Farm ID
  • फरवरी 2026 तक Farmer Registry
  • Digital Crop Survey पूरा करने के निर्देश

Haryana News: हरियाणा सरकार ने कृषि क्षेत्र को तकनीक से जोड़ने की दिशा में एक बड़ा फैसला लिया है। राज्य में अब किसानों की डिजिटल पहचान तैयार की जाएगी जिसके लिए AgriStack (Farmer Registry) के तहत एकीकृत रजिस्ट्रेशन ड्राइव की शुरुआत हो रही है। यह पहल न सिर्फ रिकॉर्ड सुधारने वाली है बल्कि आने वाले समय में योजनाओं का लाभ सही व्यक्ति तक पहुँचाने का आधार भी बनेगी।

लक्ष्य: 1.38 करोड़ किसान, आधार OTP से ऑथेंटिकेशन

सरकार का लक्ष्य है कि करीब 1.38 करोड़ किसानों को इस सिस्टम से जोड़ा जाए। पंजीकरण के दौरान आधार कार्ड आधारित OTP प्रमाणीकरण होगा जिसके बाद हर किसान को एक यूनिक Farm ID दी जाएगी। यह Farm ID भविष्य में किसानों की डिजिटल पहचान मानी जाएगी और कृषि योजनाओं से जुड़ने में अहम भूमिका निभाएगी।

जमीनी स्तर पर बड़े पैमाने पर कैंप, पंचकूला-फरीदाबाद से शुरुआत

राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग की वित्त आयुक्त सुमिता मिश्रा ने सभी जिलों को निर्देश दिए हैं कि रजिस्ट्रेशन को समयबद्ध तरीके से पूरा किया जाए। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ एक सरकारी प्रक्रिया नहीं बल्कि किसानों के लिए परिवर्तनकारी कदम है। इसी के साथ उन्होंने ग्रामीण स्तर पर आउटरीच बढ़ाने और कैंप लगाने पर जोर दिया।

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रजिस्ट्रेशन की शुरुआत बुधवार से पंचकूला और फरीदाबाद में होगी, जिसके बाद इसे चरणबद्ध तरीके से पूरे राज्य में बढ़ाया जाएगा।

सटीक डेटा बेहतर योजनाओं की गारंटी – सुमिता मिश्रा

वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए हुई समीक्षा बैठक में सभी उपायुक्तों, जिला राजस्व अधिकारियों और तहसीलदारों को फरवरी 2026 की डेडलाइन दी गई है। मिश्रा ने कहा कि आधार आधारित प्रक्रिया से फर्जीवाड़े पर रोक लगेगी और सही किसान तक लाभ पहुँचने का रास्ता साफ होगा। साथ ही डिजिटल भूमि और फसल रिकॉर्ड मजबूत होंगे जिससे योजनाओं का लक्ष्यीकरण पहले से कहीं बेहतर हो सकेगा।

गांवों में इस पहल की चर्चा शुरू हो चुकी है। कई किसान इसे योजनाओं तक आसान पहुंच का जरिया मान रहे हैं जबकि कुछ लोग डेटा शेयरिंग को लेकर सवाल भी कर रहे हैं। हालांकि विभागीय अधिकारी मानते हैं कि कैंपों में जागरूकता और समझ बढ़ने के बाद भागीदारी स्वतः बढ़ेगी।

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