हरियाणा के इन किसानों के खातों में आएगा 1200 रुपये प्रति एकड़ अनुदान

हरियाणा में धान की कटाई के बाद पराली का प्रबंधन करने वाले किसानों को 1200 रुपये प्रति एकड़ अनुदान देने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। सत्यापन जारी है और जनवरी के दूसरे सप्ताह तक भुगतान की उम्मीद है।

  • धान कटाई के बाद पराली संभालने वाले किसानों को 1200 रूपये प्रति एकड़ मिलेगा
  • जनवरी के दूसरे हफ्ते से खाते में पहुंच सकता है अनुदान का पैसा
  • पराली जलाकर रेड एंट्री वालों पर सख्ती, 248 किसान सूची से बाहर

Haryana News: हरियाणा में धान की फसल कटने के बाद खेतों में उठने वाले धुएं को रोकने की कवायद अब कागजों से निकलकर बैंक खातों तक पहुंचने की तैयारी में है। पराली का वैज्ञानिक और वैकल्पिक तरीके से प्रबंधन करने वाले किसानों को मिलने वाले अनुदान की प्रक्रिया तेज कर दी गई है। विभागीय स्तर पर संकेत हैं कि जनवरी के दूसरे सप्ताह तक किसानों के खातों में पैसा पहुंच सकता है।

सूत्रों के अनुसार इस बार सरकार ने पराली को खेत में मिलाने, खेत के बाहर हटाने या पशु चारे के रूप में इस्तेमाल करने वाले सभी किसानों को समान रूप से 1200 रुपये प्रति एकड़ का अनुदान देने का फैसला किया है। इससे पहले अलग-अलग श्रेणियों को लेकर भ्रम की स्थिति बनी रहती थी जिसे इस बार खत्म करने की कोशिश प्रदेश सरकार के द्वारा की गई है।

धान का रकबा और पराली की असली तस्वीर

कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के आंकड़े बताते हैं कि इस सीजन में हरियाणा में करीब 41.37 लाख एकड़ में धान की रोपाई हुई। इसमें 22.62 लाख एकड़ क्षेत्र में बासमती और 18.74 लाख एकड़ में नॉन-बासमती धान उगाया गया। इतनी बड़ी खेती के बाद पराली की मात्रा भी कम नहीं रही।

अनुमान के मुताबिक लगभग 85.5 लाख मीट्रिक टन पराली निकली। विभाग ने इसका विस्तृत ब्योरा तैयार किया है। करीब 44.4 लाख मीट्रिक टन पराली खेत के भीतर ही प्रबंधित की गई, 19.10 लाख मीट्रिक टन खेतों से बाहर हटाई गई और लगभग 22 लाख मीट्रिक टन पराली को पशु चारे के रूप में इस्तेमाल किया गया।

सैटेलाइट निगरानी में कौन पास, कौन फेल

मिली जानकारी के अनुसार पराली जलाने के मामलों पर इस बार निगरानी पहले से कहीं ज्यादा सख्त रही है। किसानों की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए इसरो से सैटेलाइट डेटा लिया गया जिससे आग लगाने वाले खेतों की पहचान की गई। इसके साथ ही हरियाणा अंतरिक्ष उपयोग केंद्र ने गांवों को रेड, यलो और ग्रीन जोन में वर्गीकृत किया।

इसी निगरानी का नतीजा है कि 248 किसानों के नाम रेड एंट्री में दर्ज पाए गए। विभाग का कहना है कि इन किसानों को अनुदान नहीं मिलेगा। फिलहाल हरसेक से विस्तृत रिपोर्ट मांगी गई है और फील्ड स्तर पर सत्यापन का काम जारी है ताकि सही किसानों तक ही लाभ पहुंचे।

सरकार का दावा क्या है और ज़मीनी बदलाव पर अपडेट

कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्याम सिंह राणा का कहना है कि लगातार जागरूकता अभियानों और सख्त निगरानी का असर साफ दिख रहा है। उनके मुताबिक किसानों ने इस बार सहयोग किया, तभी पराली जलाने के मामले बेहद कम सामने आए हैं।

सरकारी तंत्र के भीतर यह भी माना जा रहा है कि यदि सत्यापन समय पर पूरा हो गया तो जनवरी में अनुदान वितरण के साथ यह संदेश जाएगा कि पराली न जलाने वाले किसानों को अब सिर्फ सलाह ही नहीं आर्थिक समर्थन भी मिलेगा।

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Saloni Yadav

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