हरियाणा में लिंगानुपात सुधरा, 916 तक पहुंचा आंकड़ा! साल के अंत तक 920 का लक्ष्य

हरियाणा में लिंगानुपात में लगातार सुधार दर्ज किया जा रहा है। एक साल में आंकड़ा 907 से बढ़कर 916 पहुंचा है। स्वास्थ्य विभाग ने 31 दिसंबर तक लिंगानुपात 920 तक ले जाने का लक्ष्य तय किया है।

  • हरियाणा में बेटियों की संख्या बढ़ने के संकेत
  • एक साल में लिंगानुपात में 9 अंकों का उछाल
  • शहरी और स्लम इलाकों पर सरकार का खास फोकस
  • 31 दिसंबर तक 920 का लक्ष्य तय

Haryana Sex Ratio: हरियाणा में लिंगानुपात को लेकर लंबे समय से जो चिंता बनी हुई थी उसमें अब धीरे-धीरे सुधार के संकेत दिखाई देने लगे हैं। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक राज्य का लिंगानुपात बीते एक साल में 907 से बढ़कर 916 तक पहुंच गया है।

यह बदलाव ऐसे समय में सामने आया है जब राज्य सरकार इस मुद्दे को लेकर लगातार निगरानी और सख्ती की नीति पर काम कर रही है।

यह सुधार सिर्फ आंकड़ों तक सीमित नहीं है बल्कि इसके पीछे प्रशासनिक स्तर पर की जा रही लगातार कोशिशें भी जुड़ी हुई हैं।

अधिकारियों का कहना है कि यह रुझान अगर इसी तरह बना रहा तो आने वाले महीनों में स्थिति और बेहतर हो सकती है।

साल के अंत तक 920 का लक्ष्य

स्वास्थ्य विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव सुधीर राजपाल ने अधिकारियों को साफ निर्देश दिए हैं कि 31 दिसंबर तक लिंगानुपात को 920 तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा जाए। इसके लिए जिला स्तर से लेकर फील्ड स्टाफ तक जिम्मेदारी तय की जा रही है।

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मंगलवार को स्टेट टास्क फोर्स की साप्ताहिक समीक्षा बैठक में स्वास्थ्य सचिव ने कहा कि सुधार की इस रफ्तार को बनाए रखना जरूरी है, ताकि यह सिर्फ अस्थायी आंकड़ा न बनकर स्थायी बदलाव का रूप ले सके।

माइग्रेटेड आबादी वाले इलाकों पर खास नजर

बैठक में यह भी सामने आया कि शहरों और कस्बों के उन इलाकों में विशेष ध्यान देने की जरूरत है, जहां माइग्रेटेड आबादी बड़ी संख्या में रहती है। ऐसे क्षेत्रों में कई बार नवजात बच्चों का जन्म पंजीकरण समय पर नहीं हो पाता, जिससे सरकारी रिकॉर्ड में वास्तविक स्थिति सामने नहीं आ पाती।

स्वास्थ्य विभाग ने निर्देश दिए हैं कि इन इलाकों में जन्म लेने वाले हर बच्चे का पंजीकरण अनिवार्य रूप से सुनिश्चित किया जाए, ताकि किसी भी स्तर पर डेटा की कमी न रह जाए।

स्लम इलाकों में कैंप और जागरूकता अभियान

स्लम क्षेत्रों में जन्म पंजीकरण की स्थिति को लेकर भी चिंता जताई गई। जहां पंजीकरण कम पाया गया है, वहां विशेष कैंप लगाने और लोगों को जागरूक करने के निर्देश दिए गए हैं। अधिकारियों को कहा गया है कि मौके पर जाकर परिवारों को समझाया जाए कि जन्म पंजीकरण क्यों जरूरी है।

सरकार का मानना है कि समय पर पंजीकरण होने से न सिर्फ आंकड़े मजबूत होंगे, बल्कि पात्र परिवारों तक सरकारी योजनाओं और सुविधाओं की पहुंच भी आसान होगी। यही कारण है कि अब इस प्रक्रिया को प्रशासनिक प्राथमिकता में शामिल किया गया है।

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