छिंदवाड़ा में ज़हरीली कफ सिरप से 11 बच्चों की मौत, डॉक्टर गिरफ्तार — Tamil Nadu की दवा कंपनी पर गिरी गाज

मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा में ज़हरीली cough syrup से 11 बच्चों की मौत। Tamil Nadu की Shrisun Pharmaceuticals और डॉक्टर गिरफ्तार। सरकार ने सिरप पर statewide ban लगाया और मुआवजे का ऐलान किया।

मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा में एक दुखद घटना ने सबको झकझोर दिया है। कथित तौर पर ज़हरीली (poisonous) कफ सिरप पीने से 11 बच्चों की मौत हो गई। इस मामले में पुलिस ने एक स्थानीय डॉक्टर को गिरफ्तार किया है, जो बच्चों को यह सिरप दे रहा था। साथ ही, तमिलनाडु की एक दवा कंपनी के खिलाफ भी कार्रवाई शुरू हो गई है।

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क्या है पूरा मामला?

छिंदवाड़ा के परासिया में पिछले एक महीने में 5 साल से कम उम्र के 11 बच्चों की जान चली गई। जांच में पता चला कि ये बच्चे कोल्ड्रिफ कफ सिरप (Coldrif syrup) पी रहे थे, जिसमें डायथिलीन ग्लाइकॉल (DEG) नाम का ज़हरीला रसायन (toxic chemical) था। यह रसायन एंटी-फ्रीज़ और ब्रेक फ्लूइड में इस्तेमाल होता है और इसे निगलने से किडनी फेल (kidney failure) हो सकती है।

पुलिस ने रविवार तड़के 2:05 बजे परासिया थाने में तमिलनाडु की दवा कंपनी श्रीसन फार्मास्युटिकल्स (Shrisun Pharmaceuticals) और स्थानीय बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रवीण सोनी के खिलाफ एफआईआर दर्ज की। यह शिकायत सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) के खंड चिकित्सा अधिकारी डॉ. अंकित साहलम ने दर्ज कराई।

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प्रयोगशाला ने खोली सिरप की सच्चाई

तमिलनाडु के औषधि नियंत्रण विभाग और भोपाल की सरकारी प्रयोगशाला की रिपोर्ट में पुष्टि हुई कि कोल्ड्रिफ सिरप (batch SR-13) में 46-48% डायथिलीन ग्लाइकॉल था। दोनों ने इसे “मिलावटी और खतरनाक” (adulterated and harmful) घोषित किया। इसके बाद मध्य प्रदेश सरकार ने इस सिरप और कंपनी की सभी दवाओं पर प्रतिबंध (ban) लगा दिया।

बच्चों की हालत कैसे बिगड़ी?

डॉ. प्रवीण सोनी ने सर्दी-खांसी (cold and cough) के इलाज के लिए बच्चों को यह सिरप देने की सलाह दी थी। सिरप पीने के कुछ दिनों बाद बच्चों में मूत्र उत्पादन कम होने और किडनी से जुड़ी समस्याएं शुरू हुईं। दस बच्चों की मौत नागपुर के सरकारी मेडिकल कॉलेज में इलाज के दौरान हुई, जबकि छह अन्य बच्चे अभी भी अस्पताल में जिंदगी की जंग लड़ रहे हैं।

सरकार का एक्शन और मुआवजा

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने इस घटना पर दुख जताया और प्रत्येक मृतक बच्चे के परिवार को 4 लाख रुपये का मुआवजा (compensation) देने की घोषणा की। साथ ही, अस्पताल में भर्ती बच्चों के इलाज का खर्च भी सरकार उठाएगी। खाद्य एवं औषधि प्रशासन ने सभी स्टॉक जब्त करने और बिक्री रोकने के आदेश दिए हैं।

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देशभर में हड़कंप

यह मामला सिर्फ मध्य प्रदेश तक सीमित नहीं रहा। केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) ने छह राज्यों में दवा कंपनियों की जांच शुरू कर दी है। खासकर कफ सिरप, ज्वरनाशक (fever medicine), और एंटीबायोटिक्स (antibiotics) बनाने वाली कंपनियों पर नजर है। कई राज्यों ने भी अपनी जांच शुरू कर दी है ताकि ऐसी घटनाएं दोबारा न हों।

यह घटना दवा उद्योग में गुणवत्ता नियंत्रण (quality control) की कमी को उजागर करती है। सरकार और नियामक अब सख्त कदम उठा रहे हैं ताकि भविष्य में ऐसी लापरवाही न हो। छिंदवाड़ा के लोगों में गुस्सा और डर है, और वे इस मामले में कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।

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FAQs

Q1. छिंदवाड़ा में कितने बच्चों की मौत हुई है?
अब तक 11 बच्चों की मौत हुई है, जबकि 6 बच्चे अभी अस्पताल में भर्ती हैं।

Q2. ज़हरीली कफ सिरप में क्या मिला?
जांच में diethylene glycol (DEG) नाम का खतरनाक रसायन मिला जो किडनी फेल कर सकता है।

Q3. सरकार ने क्या कार्रवाई की है?
Tamil Nadu की दवा कंपनी और डॉक्टर पर FIR दर्ज की गई है। सिरप पर ban, मुआवजा और राज्यव्यापी जांच शुरू की गई है।

Q4. क्या अन्य राज्यों में भी जांच चल रही है?
हाँ, CDSCO ने छह राज्यों में दवा निर्माण कंपनियों की जांच शुरू की है।

News End

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Saloni Yadav

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