बांग्लादेश हिंसा के बीच ये ताकतवर देश आया सामने, भारत से सुलह करने की दी चेतावनी

बांग्लादेश में बढ़ती हिंसा, अल्पसंख्यकों पर हमले और भारत विरोधी घटनाओं के बीच इस ताकतवर देश ने चुनाव से पहले तनाव घटाने की अपील की है। हालात का असर भारत-बांग्लादेश रिश्तों पर भी दिखने लगा है। इस देश के साफ कहा है की चुनाव से पहले बांग्लादेश भारत के साथ अपने रिश्तों को सुधारे - जानिए पूरी खबर

  • भारत-बांग्लादेश रिश्तों पर ये देश आया सामने – कहा भारत से रिश्ते सुधारे
  • ढाका की सड़कों पर उबाल, अल्पसंख्यकों पर हिंसा से नई दिल्ली की बढ़ी बेचैनी
  • इस देश के राजदूत की अपील—चुनाव से पहले तनाव घटाना बांग्लादेश के हित में
  • कट्टरपंथी संगठनों की सक्रियता से राजनीतिक माहौल और अस्थिर

नई दिल्ली और ढाका के रिश्तों में इस वक्त असहजता साफ दिखाई दे रही है। बांग्लादेश में लगातार सामने आ रही हिंसक घटनाएं, भारतीय दूतावास के खिलाफ नारेबाज़ी और अल्पसंख्यकों पर हमलों की खबरों ने भारत की चिंता बढ़ा दी है। कूटनीतिक हलकों में माना जा रहा है कि हालात सिर्फ आंतरिक राजनीति तक सीमित नहीं रहे बल्कि इसका सीधा असर द्विपक्षीय रिश्तों पर पड़ने लगा है।

इसी पृष्ठभूमि में बांग्लादेश में तैनात रूस के राजदूत Alexander Grigorievich Khotsin का बयान सामने आया है जिसे इलाके की मौजूदा स्थिति के लिहाज से काफी अहम माना जा रहा है। उन्होंने सार्वजनिक रूप से अपील की है कि राष्ट्रीय चुनाव से पहले बांग्लादेश को तनाव कम करने की दिशा में कदम उठाने चाहिए खासतौर पर भारत के साथ रिश्तों को लेकर।

चुनाव से पहले माहौल सुधारने की सलाह

रूसी राजदूत ने कहा कि फरवरी 2026 में प्रस्तावित राष्ट्रीय चुनावों से पहले अगर माहौल शांत होता है तो यह सभी पक्षों के लिए बेहतर होगा। उनका कहना था कि रूस किसी भी तरह से भारत-बांग्लादेश के द्विपक्षीय संबंधों में दखल नहीं दे रहा लेकिन मौजूदा हालात को देखते हुए तनाव को और बढ़ने से रोकना समझदारी होगी। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि रिश्तों की बुनियाद आपसी भरोसे और विश्वास पर ही टिकती है।

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चुनाव प्रक्रिया को लेकर भी उन्होंने उम्मीद जताई कि मतदान तय समय पर होगा। चुनाव पर्यवेक्षकों के सवाल पर उन्होंने कहा कि रूसी पक्ष चुनाव आयोग के संपर्क में है और आधिकारिक न्योते का इंतज़ार किया जा रहा है।

ज़मीन पर हालात क्यों बिगड़ रहे हैं

बांग्लादेश के पूर्व मंत्री Mohibul Hasan Chowdhury के मुताबिक हालात खासकर राजधानी ढाका और चटगांव जैसे बड़े शहरों में बेहद तनावपूर्ण हैं। उनका आरोप है कि कुछ कट्टरपंथी संगठनों को राजनीतिक संरक्षण मिल रहा है जिसकी वजह से रोज़ाना अराजकता फैलाने की कोशिशें हो रही हैं।

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उनका कहना है कि चुनाव नज़दीक आते ही कुछ ताकतें माहौल बिगाड़कर या तो चुनाव टालना चाहती हैं या फिर सत्ता पर पकड़ बनाए रखना चाहती हैं। सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स के ज़रिये भी हिंसा भड़काने की कोशिशें हो रही हैं। इसके साथ ही हिज्ब उत-तहरीर और जमात-ए-इस्लामी की छात्र इकाई शिबिर जैसे संगठनों की सक्रियता ने हालात को और जटिल बना दिया है।

भारत की चिंता और आगे की तस्वीर

नई दिल्ली में इन घटनाओं को सिर्फ पड़ोसी देश की आंतरिक राजनीति के तौर पर नहीं देखा जा रहा। अल्पसंख्यकों पर हो रही हिंसा और भारतीय हितों से जुड़े संस्थानों को निशाना बनाए जाने से कूटनीतिक स्तर पर सतर्कता बढ़ा दी गई है। जानकारों का मानना है कि आने वाले महीनों में बांग्लादेश के भीतर का राजनीतिक तापमान और भारत-बांग्लादेश संबंध, दोनों एक-दूसरे को प्रभावित करते नज़र आएंगे।

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