Bihar Police में बड़ा प्रशासनिक बदलाव: 6 IPS ट्रेनिंग पर, कई जिलों में नए SP-DIG तैनात

बिहार पुलिस के प्रशासनिक ढांचे में इन दिनों एक साथ दो बड़ी गतिविधियां चल रही हैं—एक तरफ वरिष्ठ IPS अधिकारियों का राष्ट्रीय पुलिस अकादमी में मिड-करियर प्रशिक्षण, दूसरी तरफ राज्य में कानून-व्यवस्था की निरंतरता बनाए रखने की चुनौती। इसी संतुलन को साधने के लिए गृह विभाग ने अहम जिलों और विभागों में अस्थायी प्रभारों की नई व्यवस्था लागू कर दी है।

राज्य कैडर के छह IPS अधिकारी हैदराबाद स्थित राष्ट्रीय पुलिस अकादमी में मिड-करियर ट्रेनिंग प्रोग्राम (MCTP) के फेज-3 में शामिल हुए हैं। यह प्रशिक्षण 26 दिसंबर तक चलेगा।

इन अधिकारियों के प्रशिक्षण पर जाने से पहले ही गृह विभाग ने स्पष्ट कर दिया था कि किसी भी जिले या रेंज में पुलिसिंग की रफ्तार धीमी नहीं पड़नी चाहिए। इसी के तहत अनुभवी और रणनीतिक रूप से उपयुक्त अधिकारियों को अतिरिक्त जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं।

तिरहुत रेंज में बदलाव सबसे पहले असर में दिखा। प्रशिक्षण पर गए DIG चंदन कुमार कुशवाहा की जगह अब CID में तैनात DIG जयंतकांत रेंज की निगरानी संभालेंगे।

गया जैसे संवेदनशील जिले में भी नेतृत्व का अंतराल न रहे, इसके लिए SSP आनंद कुमार की अनुपस्थिति में CID के SP कांतेश कुमार मिश्रा को जिले की कमान दी गई है।

सिवान जिले में भी पुलिस नेतृत्व बदला गया है। यहां SP मनोज कुमार तिवारी के प्रशिक्षण पर जाने के बाद पुलिस मुख्यालय में पोस्टिंग की प्रतीक्षा कर रहे विक्रम सिहाग को जिले का नया पुलिस अधीक्षक नियुक्त किया गया है।

बगहा में जिम्मेदारी का दायरा और बढ़ा है—यहां SP सुशांत कुमार सरोज के स्थान पर बिहार स्वाभिमान विशेष सशस्त्र बल की समादेष्टा निर्मला कुमारी को SP बगहा का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है।

रेलवे सुरक्षा व्यवस्था में भी अस्थायी बदलाव किया गया है। रेल SP इनामुलहक मेंग्नू के प्रशिक्षण पर जाने के बाद SCRB के SP राजीव को रेलवे पुलिस की कमान दी गई है। वहीं नागरिक सुरक्षा के IG पंकज कुमार राज की अनुपस्थिति में विभाग का कामकाज आंतरिक प्रशासनिक व्यवस्था के जरिए संचालित किया जाएगा।

पुलिस मुख्यालय से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि यह फेरबदल केवल प्रशासनिक औपचारिकता नहीं, बल्कि जमीनी जरूरत के हिसाब से किया गया कदम है।

MCTP फेज-3 में अधिकारी आधुनिक अपराध प्रवृत्तियों, तकनीक-आधारित पुलिसिंग और नेतृत्व कौशल पर गहन प्रशिक्षण लेते हैं। इसका सीधा असर भविष्य की पुलिस रणनीति और फील्ड निर्णयों पर पड़ता है।

गृह विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि सभी अस्थायी प्रभार प्रशिक्षण अवधि तक सीमित रहेंगे। 26 दिसंबर को ट्रेनिंग पूरी होते ही मूल अधिकारी अपने-अपने पदों पर लौटेंगे और तब तक नियुक्त किए गए प्रभारी अधिकारी राज्य की कानून-व्यवस्था को उसी गंभीरता से संभालेंगे, जैसी अपेक्षा नियमित तैनाती से होती है।

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