Delhi Pollution Rules: गैर-BS-VI वाहनों पर सख्ती, कैसे पहचानें आपका वाहन BS-VI है या नहीं

दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण के बीच सरकार ने वाहन नियम सख्त कर दिए हैं। गैर-BS-VI निजी वाहनों की एंट्री पर रोक और PUCC के बिना पेट्रोल नहीं मिलेगा। नियम तोड़ने पर 20 हजार रुपये तक जुर्माना लगाया जा सकता है। आइये जानते है की आप कैसे ये जान सकते है की आपका वाहन BS-VI है या नहीं और BS-VI मानकों में क्या है बड़ा फर्क है?

Delhi Pollution Rules: दिल्ली में बिगड़ती हवा की गुणवत्ता ने सरकार को एक बार फिर सख्ती के मोड में ला दिया है। वाहन प्रदूषण पर नए नियम लागू होने के बाद राजधानी में प्रवेश करने वाले वाहनों और पेट्रोल पंपों पर ईंधन लेने को लेकर हालात बदल गए हैं। खासतौर पर भारत स्टेज (BS) उत्सर्जन मानकों को लेकर वाहन चालकों के बीच भ्रम की स्थिति भी सामने आ रही है।

दूसरी तरफ सरकार ने साफ कर दिया है कि दिल्ली के बाहर पंजीकृत गैर-BS-VI निजी वाहनों को अब राजधानी में प्रवेश की अनुमति नहीं होगी। इसके साथ ही दिल्ली के पेट्रोल पंपों पर भी वही वाहन ईंधन ले सकेंगे जिनके पास वैध प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र यानी PUCC मौजूद होगा। तो फिर कब तक चलेगा ये और आप कैसे इसकी पहचान करेंगे की आपका वाहन अब दिल्ली में चलने लायक है की नहीं।

नियमों को जान लो नहीं तो लगेगा भारी जुर्माना

आपको बता दें की नए निर्देशों के तहत नियमों का उल्लंघन करने वाले गैर-अनुपालक वाहनों को दिल्ली में घुसने से रोका जाएगा। ऐसे वाहनों पर 20 हजार रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। वहीं BS-VI मानकों वाले वाहन भी अगर बिना वैध PUCC के पकड़े जाते हैं तो उन्हें 10 हजार रुपये तक का दंड भुगतना पड़ सकता है। सरकार का कहना है कि इस सख्ती का मकसद पुराने और ज्यादा प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों से निकलने वाले उत्सर्जन को नियंत्रित करना है ताकि राजधानी की हवा को कुछ राहत मिल सके।

कैसे पहचानें आपका वाहन BS-VI है या नहीं
कैसे पहचानें आपका वाहन BS-VI है या नहीं

कैसे पहचानें आपका वाहन BS-VI है या नहीं

देखिये किसी भी वाहन की BS अनुपालना की जानकारी उसके रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट (RC) में दर्ज होती है। RC में स्पष्ट लिखा होता है कि वाहन किस उत्सर्जन मानक के तहत प्रमाणित है। आमतौर पर 1 अप्रैल 2020 या उसके बाद पंजीकृत सभी वाहन BS-VI मानकों के अनुरूप होते हैं क्योंकि इसी तारीख से यह नियम पूरे देश में अनिवार्य किया गया था। इसके अलावा वाहन निर्माता ओनर मैनुअल में भी BS-VI अनुपालना का उल्लेख करते हैं। कुछ वाहनों में इंजन या फ्यूल टैंक के पास स्टिकर लगाया जाता है। अधिकृत डीलरशिप और सर्विस सेंटर भी रजिस्ट्रेशन नंबर के आधार पर यह जानकारी उपलब्ध करा सकते हैं।

VAHAN पोर्टल से भी आपको मिल सकती है जानकारी

अगर आपके पास में अपना खुद का वाहन है और आप खुद ऑनलाइन जांच करना चाहते हैं तो सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के VAHAN पोर्टल पर जाकर नंबर प्लेट डालकर अपने वाहन का उत्सर्जन विवरण देख सकते हैं। इससे यह साफ हो जाता है कि वाहन BS-II, BS-III, BS-IV या BS-VI किस श्रेणी में आता है।

पुराने वाहनों का प्रदूषण ज्यादा क्यों होता है?

अप्रैल 2020 से पहले खरीदे गए वाहन आमतौर पर BS-IV मानकों के तहत आते हैं जबकि 2005 से 2010 के बीच खरीदे गए वाहन BS-III श्रेणी में गिने जाते हैं। 2001 से 2005 के बीच के वाहन BS-II मानकों के अनुरूप होते हैं। इनसे पहले के वाहन और भी पुराने उत्सर्जन नियमों पर चलते हैं, जो आज के लिहाज से कहीं ज्यादा प्रदूषण फैलाते हैं।

पुराने वाहनों का प्रदूषण ज्यादा क्यों होता है?
पुराने वाहनों का प्रदूषण ज्यादा क्यों होता है?

विशेषज्ञों के अनुसार पुराने इंजन आधुनिक तकनीक से लैस नहीं होते। खासकर डीजल वाहन नाइट्रोजन ऑक्साइड और बारीक कणों का ज्यादा उत्सर्जन करते हैं जिससे स्मॉग बढ़ता है और सांस व हृदय से जुड़ी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। डीजल से निकलने वाला ब्लैक कार्बन जलवायु परिवर्तन में भी योगदान देता है।

BS-VI मानकों में क्या है बड़ा फर्क

BS-VI मानकों के तहत उत्सर्जन सीमाएं BS-IV की तुलना में काफी सख्त कर दी गई हैं। पेट्रोल वाहनों में नाइट्रोजन ऑक्साइड की सीमा लगभग 25 फीसदी घटाई गई है जबकि डीजल वाहनों के लिए इसमें करीब 68 फीसदी तक की कटौती की गई है। पार्टिकुलेट मैटर के उत्सर्जन में भी लगभग 82 फीसदी तक कमी अनिवार्य की गई है।

BS-VI मानकों में क्या है बड़ा फर्क
BS-VI मानकों में क्या है बड़ा फर्क

इसके अलावा BS-VI वाहनों में कम सल्फर वाला स्वच्छ ईंधन इस्तेमाल होता है जिससे एडवांस्ड उत्सर्जन नियंत्रण तकनीक बेहतर तरीके से काम कर पाती है। परीक्षण प्रक्रिया को भी वास्तविक सड़क परिस्थितियों के ज्यादा करीब रखा गया है ताकि प्रदूषण नियंत्रण ज्यादा प्रभावी हो सके।

दिल्ली में पहले से सख्त रहे हैं नियम

दिल्ली में वायु प्रदूषण लंबे समय से गंभीर समस्या रहा है। इसी वजह से यहां BS-II मानक 2001 में, BS-III 2005 में और BS-IV 2010 में लागू किए गए थे जो देश के बाकी हिस्सों से कई साल पहले थे। BS-VI मानक भी दिल्ली-एनसीआर में अन्य राज्यों से पहले लागू किए गए। हालांकि, रोजाना बड़ी संख्या में दूसरे राज्यों से वाहन दिल्ली में प्रवेश करते हैं जिससे अलग-अलग BS मानकों वाले वाहन सड़कों पर दिखते हैं। नए नियमों के जरिए सरकार इसी अंतर को खत्म करने की कोशिश कर रही है। तो उम्मीद है की आपको अब पता चल गया होगा की दिल्ली में आपका वाहन चलेगा की नहीं और अब सरकार की तरफ से नियम कौन से लागु किये गए है।

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Saloni Yadav

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