EPFO: सैलरी स्लिप में कटने वाले ‘पेंशन’ के हिस्से का पूरा सच, कहीं आप भी तो नहीं कर रहे ये 3 बड़ी गलतियां?

प्राइवेट सेक्टर कर्मचारियों के लिए ईपीएफओ की पेंशन योजना (EPS) किसी वरदान से कम नहीं है, लेकिन इसके पेचीदा नियम अक्सर लोगों को उलझन में डाल देते हैं। जानिए 10 साल की सर्विस और 58 साल की उम्र का वो गणित, जो तय करेगा कि आपको कितनी पेंशन मिलेगी।

  • पेंशन की पात्रता क्या होगी।
  • अर्ली पेंशन का नुकसान क्या है?
  • सर्विस ट्रांसफर का महत्व समझो
  • 10 साल से कम सर्विस है तो क्या होगा?

नई दिल्ली, न्यूज़ डेस्क: प्राइवेट सेक्टर में काम करने वाले करोड़ों युवाओं के लिए महीने की पहली तारीख को मोबाइल पर आने वाला ‘सैलरी क्रेडिट’ का मैसेज सुकून तो देता है, लेकिन सैलरी स्लिप में होने वाली पीएफ (PF) कटौती आज भी एक रहस्य बनी हुई है। अक्सर लोग अपनी पासबुक खोलकर ब्याज और मूलधन तो देख लेते हैं लेकिन ‘पेंशन’ (EPS) वाला कॉलम उन्हें हमेशा अधूरा या उलझा हुआ नजर आता है।

अगर आप भी इसे महज एक सरकारी कटौती समझकर नजरअंदाज कर रहे हैं तो सावधान हो जाइए। आपकी मेहनत की कमाई का यह हिस्सा आपके बुढ़ापे की लाठी बनेगा या नहीं यह आपकी आज की समझ पर निर्भर करता है।

10 साल की ‘तपस्या’ और पेंशन का अधिकार

ईपीएफओ (EPFO) के नियमों के गलियारे में सबसे महत्वपूर्ण मोड़ 10 साल की सेवा है। यदि आप प्राइवेट नौकरी में हैं तो पेंशन पाने की पहली शर्त यही है। लेकिन यहाँ एक पेंच है जिसे समझना जरूरी है। न्यूज़ रूम रिसर्च के मुताबिक कई कर्मचारी नौकरी बदलते समय पीएफ का पूरा पैसा निकाल लेते हैं।

ध्यान देने वाली बात ये है कि अगर आपने नौकरी बदली और पुराने पीएफ का पैसा विड्रॉ (Withdraw) कर लिया, तो आपकी ‘पेंशन सेवा’ की गिनती फिर से शून्य से शुरू होगी। पेंशन का हकदार बने रहने के लिए आपको पीएफ का पैसा निकालने के बजाय उसे ‘ट्रांसफर’ करना चाहिए, ताकि आपकी कुल सर्विस जुड़ती रहे।

उम्र का गणित: 50, 58 या 60?

पेंशन पाने की दूसरी सबसे बड़ी शर्त उम्र की है। ईपीएफओ के मानक के अनुसार 58 साल की उम्र पूर्ण पेंशन के लिए तय की गई है। हालांकि मार्केट में एक धारणा है कि 50 की उम्र के बाद भी पेंशन ली जा सकती है। यह सच है लेकिन इसकी कीमत आपको ताउम्र चुकानी पड़ती है।

अगर आप 58 साल से पहले अर्ली पेंशन का विकल्प चुनते हैं, तो हर साल के लिए आपकी पेंशन राशि में एक निश्चित प्रतिशत की कटौती की जाती है। यह कटौती स्थायी होती है जिसका मतलब है कि रिटायरमेंट के बाद जब आपको पैसों की सबसे ज्यादा जरूरत होगी तब आपके हाथ में कम रकम आएगी। वहीं अगर आप इसे 60 साल तक टालते है तो ईपीएफओ आपको बोनस के रूप में बढ़ी हुई पेंशन का लाभ भी देता है।

आपकी सैलरी से पेंशन फंड तक का सफर

क्या आपको पता है कि आपकी कंपनी जो हिस्सा पीएफ में डालती है उसका पूरा पैसा आपके खाते में नहीं जाता? नियोक्ता (Employer) के योगदान का 8.33% हिस्सा सीधे कर्मचारी पेंशन योजना (EPS) के पूल में चला जाता है।

वर्तमान में सरकार ने इसके लिए ₹15,000 की वैधानिक वेतन सीमा (Wage Ceiling) तय की हुई है। इसका मतलब यह है कि आपकी सैलरी चाहे लाखों में हो पेंशन फंड में योगदान इसी सीमा के आधार पर तय होता है। यही कारण है कि हाई-सैलरी प्रोफेशनल की पेंशन भी एक खास दायरे में सिमट जाती है।

क्या होगा अगर 10 साल से पहले नौकरी छूट जाए?

मध्यम वर्गीय परिवारों में सबसे बड़ा डर यही होता है कि अगर सर्विस के 10 साल पूरे नहीं हुए तो क्या पैसा डूब जाएगा? घबराइए मत ईपीएफओ का सिस्टम पारदर्शी है। अगर आपकी कुल सेवा 10 साल से कम है तो आप ‘फुल एंड फाइनल’ सेटलमेंट के समय अपनी पेंशन की राशि एकमुश्त (Lump-sum) निकाल सकते हैं। इसके लिए ईपीएफओ की एक खास सर्विस टेबल होती है जो आपके काम के वर्षों के आधार पर एक फैक्टर तय करती है और आपको आपका पैसा ब्याज सहित लौटा दिया जाता है।

आपकी चेकलिस्ट ये रहने वाली है जिसको जरूर करें ओर बिना चेक किए आपको नहीं रहना है।

  • अपनी ईपीएफओ पासबुक में ‘Pension Contribution’ का कॉलम चेक करें।
  • नौकरी बदलने पर ‘UAN’ को मर्ज करना न भूलें।
  • रिटायरमेंट प्लानिंग के लिए ईपीएस कैलकुलेटर का उपयोग करें।

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