Breaking News: नया बिजली कनेक्शन लेना हुआ सस्ता, स्मार्ट मीटर पर मिलेगी ₹900 की छूट

  • उत्तर प्रदेश में अब नया बिजली कनेक्शन लेना हुआ काफी सस्ता, उपभोक्ताओं की जेब पर बोझ होगा कम।
  • केंद्र सरकार की RDSS योजना के तहत स्मार्ट और थ्री-फेज मीटर पर मिलेगी 900 रुपये की सीधी सब्सिडी।
  • उपभोक्ता परिषद की सक्रियता के बाद योजना की समय सीमा को भी मार्च 2028 तक के लिए बढ़ाया गया।
  • बिजली अधिनियम के तहत ग्राहकों को मिलेगा सीधा वित्तीय लाभ, मीटर की कीमतों में बड़ी गिरावट।

UP News: उत्तर प्रदेश के उन तमाम परिवारों के लिए एक बेहद सुकून देने वाली खबर आई है जो नए साल में अपने घर या दुकान के लिए नया बिजली कनेक्शन लेने की योजना बना रहे हैं। अब आपको बिजली दफ्तर के चक्कर काटने और भारी-भरकम फीस जमा करने की चिंता से थोड़ी राहत मिलने वाली है। केंद्र सरकार की एक खास योजना ने यूपी के बिजली उपभोक्ताओं की जेब का बोझ हल्का करने का रास्ता साफ कर दिया है।

दरअसल काफी समय से यह मांग उठ रही थी कि जब सरकार मीटरों पर सब्सिडी दे रही है तो इसका सीधा फायदा आम आदमी को क्यों नहीं मिल रहा? अब राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के कड़े रुख और केंद्र की हरी झंडी के बाद यह तय हो गया है कि नए कनेक्शन के लिए लगने वाले स्मार्ट मीटर और थ्री-फेज मीटर अब पहले के मुकाबले काफी सस्ते मिलेंगे।

जेब को मिलेगी राहत, 900 रुपये की सीधी बचत

अगर हम गणित को समझें तो यह कटौती छोटी-मोटी नहीं है। अब तक जो स्मार्ट मीटर आपको लगभग 2800 रुपये में पड़ता था वह अब करीब 1900 रुपये के आसपास मिलेगा। यानी सीधे-सीधे 900 रुपये की बचत। इसी तरह दुकानदारों या बड़े घरों के लिए लगने वाले थ्री-फेज मीटर की कीमत भी 4100 रुपये से घटकर 3200 रुपये के करीब आ जाएगी। यह फैसला उन लोगों के लिए बड़ी सौगात है जो मध्यमवर्गीय परिवार से आते हैं और पाई-पाई जोड़कर अपना आशियाना बनाते हैं।

यह पूरी कवायद केंद्र सरकार की रिवैंप डिस्ट्रीब्यूशन सेक्टर स्कीम यानी RDSS के तहत हो रही है। सरकार का लक्ष्य है कि आने वाले समय में हर घर में स्मार्ट मीटर हो ताकि बिजली चोरी रुके और उपभोक्ता को भी सटीक बिल मिले। अच्छी बात यह है कि इस योजना का लाभ उठाने की समय सीमा भी अब बढ़ा दी गई है। अब 31 मार्च 2028 तक लोग इस सब्सिडी वाली दर का फायदा उठा सकेंगे।

कानून और हक की बात

उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा का इस मामले में रुख बड़ा साफ है। उनका कहना है कि बिजली अधिनियम 2003 बहुत स्पष्ट रूप से कहता है कि अगर सरकार किसी भी उपकरण या सेवा पर सब्सिडी दे रही है तो उसका लाभ अंतिम उपभोक्ता तक पहुंचना ही चाहिए। इसी नियम को आधार बनाकर परिषद ने विभाग के सामने मजबूती से अपनी बात रखी।

इतना ही नहीं उन छोटे उपभोक्ताओं के हितों की भी बात की जा रही है जो बिजली खंभे से 40 मीटर के दायरे में रहते हैं। अक्सर देखा गया है कि स्लैब सिस्टम की वजह से इन लोगों को जरूरत से ज्यादा पैसे देने पड़ते हैं। अब कोशिश यह है कि नियमों में ऐसा बदलाव हो जिससे गरीब और छोटे उपभोक्ताओं को सिस्टम की पेचीदगियों की सजा न भुगतनी पड़े।

स्मार्ट मीटर सिर्फ सस्ता नहीं, सुविधा भी है

स्मार्ट मीटर को लेकर कई बार भ्रम की स्थिति रहती है लेकिन असल में यह आपके मोबाइल फोन की तरह काम करता है। जितना पैसा डालो, उतनी बिजली इस्तेमाल करो। न गलत रीडिंग का डर और न ही महीने के आखिर में भारी-भरकम बिल का झटका। विभाग को भी रीडिंग लेने आपके घर नहीं आना पड़ेगा सब कुछ ऑटोमैटिक होगा।

कुल मिलाकर देखें तो यूपी में बिजली विभाग अब उपभोक्ता की तरफ दोस्ती का हाथ बढ़ा रहा है। कीमतों में यह कमी न सिर्फ आर्थिक राहत है बल्कि एक पारदर्शी बिजली व्यवस्था की तरफ बढ़ा कदम भी है।

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Saloni Yadav

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