Seed Act 2026: शिवराज सिंह चौहान का बड़ा फैसला, नकली बीज बेचने वालों को होगी जेल और 30 लाख का जुर्माना

  • खेतों में अब नहीं चलेगा नकली बीजों का खेल शिवराज सिंह चौहान का बड़ा ऐलान
  • 60 साल पुराना कानून बदलेगा धोखा देने वालों को 30 लाख का जुर्माना और जेल की तैयारी
  • QR कोड से खुलेगी बीज की पूरी कुंडली, किसान का हक रहेगा सुरक्षित

भारत के खेतों में अब वो दिन लदने वाले हैं जब किसान मेहनत की कमाई लगाकर बाजार से बीज लाता था और फसल कटने के वक्त उसे पता चलता था कि उसे ठग लिया गया है। केंद्र सरकार अब खेती की बुनियाद यानी ‘बीज’ को लेकर एक ऐसा क्रांतिकारी बदलाव करने जा रही है, जो पिछले छह दशकों से नहीं हुआ। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने शुक्रवार को साफ कर दिया कि प्रस्तावित ‘बीज अधिनियम 2026’ न केवल किसानों की ढाल बनेगा, बल्कि नकली और घटिया बीज बेचने वाले धंधेबाजों की कमर तोड़कर रख देगा।

शिवराज सिंह चौहान ने दिल्ली में पत्रकारों से रूबरू होते हुए कहा कि यह कानून देश की कृषि व्यवस्था को आधुनिक बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है। दरअसल, अब तक हम 1966 के पुराने कानून के भरोसे चल रहे थे, जिसमें वक्त के साथ कई खामियां आ गई थीं। नए कानून का मकसद सिर्फ नियम बनाना नहीं, बल्कि बीज की सप्लाई चेन में शुरू से अंत तक पारदर्शिता लाना है।

QR कोड बताएगा बीज असली है या नकली

अक्सर किसान इस बात को लेकर परेशान रहता है कि जो पैकेट वह खरीद रहा है, उसके अंदर की गुणवत्ता क्या है। अब इस समस्या का समाधान तकनीक के जरिए निकाला गया है। नए कानून के तहत हर बीज के पैकेट पर एक ‘QR कोड’ होगा। किसान जैसे ही इसे स्कैन करेगा, उसके मोबाइल पर बीज का पूरा कच्चा-चिट्ठा खुल जाएगा। यह बीज कहां बना, किस डीलर ने इसे सप्लाई किया और किस दुकान से इसे बेचा गय। सब कुछ एक क्लिक पर होगा। अगर बीज खराब निकला, तो सरकार तुरंत पकड़ लेगी कि गड़बड़ कहां हुई थी।

धोखेबाजों पर कड़ा प्रहार: 30 लाख तक का दंड

मंत्री ने कड़े लहजे में चेतावनी दी कि किसानों के साथ धोखाधड़ी करने वालों के प्रति सरकार ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपनाएगी। पहले के नियमों में जुर्माना इतना मामूली था कि बीज कंपनियां उसे भरकर फिर से वही काम शुरू कर देती थीं। लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। जानबूझकर घटिया बीज बेचने पर 30 लाख रुपये तक का जुर्माना और 3 साल तक की जेल हो सकती है। शिवराज सिंह चौहान के शब्दों में, “किसानों को ठगने वालों को बख्शा नहीं जाएगा, उनके लिए जेल के दरवाजे खुले हैं।”

अब हर बीज कंपनी को पंजीकरण कराना अनिवार्य होगा। सिर्फ उन्हीं संस्थाओं को बीज बेचने की इजाजत मिलेगी जो सरकार की कसौटी पर खरी उतरेंगी। रजिस्टर्ड कंपनियों का डेटा सार्वजनिक होगा, जिससे बिना लाइसेंस वाले झोलाछाप विक्रेताओं का बाजार से पत्ता साफ हो जाएगा।

देसी बीज और परंपरा पर कोई आंच नहीं

इस नए कानून को लेकर कुछ हलकों में यह चिंता जताई जा रही थी कि क्या इससे हमारे पारंपरिक बीज बचाने की परंपरा खत्म हो जाएगी? कृषि मंत्री ने इस पर स्थिति पूरी तरह साफ कर दी। उन्होंने कहा कि हमारे किसान भाई अपने पारंपरिक बीजों को बचाने, इस्तेमाल करने और आपस में बदलने के लिए पहले की तरह ही आजाद रहेंगे। सदियों से चली आ रही बीज विनिमय की परंपरा पर कोई पाबंदी नहीं लगेगी। सरकार का निशाना सिर्फ उन व्यापारिक संस्थाओं पर है जो मुनाफे के चक्कर में किसानों की फसल बर्बाद करती हैं।

राज्यों के हक और वैज्ञानिक संस्थाओं की भूमिका

खेती चूंकि राज्यों का विषय है, इसलिए शिवराज सिंह चौहान ने यह भरोसा भी दिलाया कि राज्यों के अधिकारों में कोई कटौती नहीं की जाएगी। केंद्र सरकार सिर्फ एक मददगार और समन्वयक की भूमिका निभाएगी। इस पूरी प्रक्रिया में ICAR, कृषि विश्वविद्यालय और देशभर के 731 कृषि विज्ञान केंद्रों को बड़ी जिम्मेदारी दी गई है। यही केंद्र ‘विकसित कृषि संकल्प अभियान’ के जरिए गांव-गांव जाकर किसानों को सही बीज की पहचान करना सिखाएंगे।

अंत में मंत्री ने एक बड़ी बात कही कि विदेशी बीजों को भी अब भारतीय जमीन पर उतरने से पहले कड़े परीक्षणों से गुजरना होगा। कुल मिलाकर, बीज अधिनियम 2026 एक ऐसा सुरक्षा कवच बनने जा रहा है, जिससे अच्छी कंपनियों को प्रोत्साहन मिलेगा और गलत करने वालों के मन में कानून का खौफ होगा।

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