Silver Price Record: चांदी ने रचा इतिहास, 3 लाख के करीब पहुंचे भाव, सोने की कीमतों में बड़ी गिरावट; चेक करें आज का रेट

  • चांदी ने तीन लाख के करीब पहुंचकर बनाया नया रिकॉर्ड
  • सोने की चमक पड़ी फीकी, कीमतों में आई बड़ी गिरावट
  • ग्लोबल मार्केट में मची हलचल का भारतीय ग्राहकों पर असर

नए साल का आगाज कमोडिटी बाजार के लिए किसी रोलरकोस्टर राइड से कम नहीं रहा है। जनवरी 2026 के इन शुरुआती हफ्तों में सर्राफा बाजार से जो खबरें आ रही हैं, उन्होंने निवेशकों की धड़कनें तेज कर दी हैं। एक तरफ जहां चांदी की कीमतों ने आसमान छूते हुए इतिहास के सारे पन्ने पलट दिए हैं, वहीं दूसरी ओर सोने की चमक थोड़ी फीकी पड़ती दिख रही है। आम आदमी के लिए यह समझना मुश्किल हो रहा है कि यह उछाल निवेश का मौका है या फिर जेब पर भारी पड़ने वाली आफत।

चांदी की ऐतिहासिक छलांग और फिर थोड़ी सुस्ती

इस महीने चांदी ने जो कर दिखाया है, उसकी उम्मीद शायद ही किसी ने की होगी। दिल्ली के बाजारों से लेकर एमसीएक्स (MCX) के स्क्रीन तक, हर जगह चांदी की ही चर्चा रही। 14 जनवरी का दिन इतिहास में दर्ज हो गया जब चांदी ने 2,92,600 रुपये प्रति किलोग्राम का वो स्तर छू लिया, जिसे कुछ समय पहले तक नामुमकिन माना जा रहा था। दिल्ली में तो इसकी कीमतें 2,95,000 रुपये तक जा पहुंचीं। अगर आप पिछले साल से तुलना करें, तो यह लगभग 200 फीसदी की भारी बढ़त है।

हालांकि, बाजार का नियम है कि जो ऊपर जाता है, वह थोड़ा संभलता भी है। इसी ऊंचे स्तर से चांदी में थोड़ी मुनाफावसूली देखी गई। 16 जनवरी को कीमतें करीब 4,000 रुपये गिरीं और फिलहाल यह 2.87 लाख रुपये के आसपास कारोबार कर रही है। ग्लोबल मार्केट में भी यह 93 डॉलर के स्तर को छूकर वापस आई है, जिससे बाजार में थोड़ी राहत की सांस ली गई है।

सोने की कीमतों में आई नरमी, ग्राहकों को राहत

चांदी के विपरीत, सोने के तेवर इस समय थोड़े नरम हैं। जो सोना कुछ दिन पहले तक रिकॉर्ड बना रहा था, उसमें अब गिरावट का रुख है। 99.9 प्रतिशत शुद्धता वाला सोना 1,100 रुपये टूटकर 1,46,200 रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गया है। दिल्ली के सर्राफा बाजार में 24 कैरेट गोल्ड की उपलब्धता 1,43,540 रुपये के आसपास है।

विशेषज्ञों का कहना है कि डॉलर की मजबूती ने सोने की रफ्तार पर ब्रेक लगा दिया है। जब डॉलर ताकतवर होता है, तो अंतरराष्ट्रीय निवेशकों के लिए सोना महंगा हो जाता है, जिससे मांग में कमी आती है और कीमतें गिरती हैं। फिलहाल सोने के खरीदारों के लिए यह एक छोटे अंतराल जैसा है, जहां कीमतें स्थिर होने की कोशिश कर रही हैं।

आखिर क्यों बाजार में मचा है ऐसा गदर?

यह सिर्फ सिक्कों और गहनों का खेल नहीं है, बल्कि इसके पीछे वैश्विक राजनीति की बड़ी बिसात बिछी हुई है। अमेरिका और चीन के बीच बढ़ता व्यापारिक तनाव और मिडिल ईस्ट की अस्थिरता ने निवेशकों को डरा दिया है। जब दुनिया में अनिश्चितता होती है, तो लोग शेयर बाजार छोड़ सोने-चांदी की सुरक्षित शरण में आते हैं।

चांदी की इस रिकॉर्ड तोड़ दौड़ के पीछे एक खास वजह ‘रिसोर्स नेशनलिज्म’ भी है। कई देश अब अपनी चांदी और अन्य खनिजों को बाहर भेजने के बजाय उन्हें सहेज रहे हैं। साथ ही, इंडस्ट्रियल डिमांड इतनी ज्यादा है कि आपूर्ति कम पड़ती दिख रही है।

आगे क्या? तीन लाख का आंकड़ा दूर नहीं

बाजार के जानकारों की मानें तो यह तो बस शुरुआत है। जिस तरह के हालात बने हुए हैं, आने वाले हफ्तों में चांदी बहुत आसानी से 3 लाख रुपये प्रति किलो का जादुई आंकड़ा पार कर सकती है। वहीं, सोना भी भले ही अभी नीचे हो, लेकिन 1.5 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम का लक्ष्य इसकी पहुंच से बाहर नहीं लगता। अगर आप खरीदारी की सोच रहे हैं, तो इन उतार-चढ़ाव पर पैनी नजर रखना ही समझदारी होगी।

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