कुत्तों के हमले और इंसानी डर पर सुप्रीम कोर्ट की दो टूक, क्या सड़कों से हटेंगे आवारा कुत्ते?

सुप्रीम कोर्ट ने आवारा कुत्तों से जुड़ी एक अहम सुनवाई के दौरान कहा कि कुत्ते इंसानी डर को महसूस कर लेते हैं और डरे हुए लोगों पर हमला कर सकते हैं। कोर्ट ने साफ किया कि उसका पिछला आदेश कुत्तों को पूरी तरह हटाने के लिए नहीं, बल्कि नियमों के सही पालन के लिए था।

  • सुप्रीम कोर्ट ने कहा: डर को भांप लेते हैं कुत्ते, डरने वालों पर हमला होने का खतरा ज्यादा।
  • संस्थानों और सार्वजनिक जगहों से आवारा कुत्तों को हटाने के नियम पर सुनवाई।
  • वकील की दलील: कुत्तों के हटने से बढ़ सकती है चूहों की तादाद और बीमारियां।
  • कोर्ट का रुख: कुत्तों को हटाने का आदेश नहीं, बस नियमों के पालन की बात कही।

सुप्रीम कोर्ट में गुरुवार को आवारा कुत्तों के मुद्दे पर एक दिलचस्प लेकिन गंभीर चर्चा हुई। जस्टिस विक्रम नाथ, संदीप मेहता और एन.वी. अंजारिया की बेंच ने एक ऐसी बात कही जो अक्सर आम लोग गली-मोहल्लों में चर्चा करते हैं। कोर्ट ने कहा कि कुत्ते इंसानों के भीतर छिपे डर को भांपने की ताकत रखते हैं। अगर कोई व्यक्ति कुत्तों से डरता है या पहले कभी कुत्ते के काटने का शिकार हो चुका है तो जानवर इस ऊर्जा को महसूस कर लेते हैं और ऐसे लोगों पर हमला होने की संभावना ज्यादा रहती है।

यह पूरी चर्चा उस समय शुरू हुई जब एक वकील ने कोर्ट की इस बात से असहमति जताई। हालांकि बेंच ने अपने व्यक्तिगत अनुभवों का हवाला देते हुए साफ किया कि न केवल आवारा बल्कि पालतू कुत्ते भी डर भांपकर रिएक्ट करते हैं।

संस्थानों से कुत्ते हटाने का पिछला आदेश

यह मामला असल में नवंबर 2025 के उस आदेश से जुड़ा है, जिसमें कोर्ट ने स्कूलों, अस्पतालों और बस टर्मिनलों जैसे सार्वजनिक संस्थानों के भीतर से आवारा कुत्तों को हटाने की बात कही थी। कोर्ट का कहना था कि इन जगहों पर कुत्तों को पकड़कर कहीं और ले जाया जाना चाहिए न कि नसबंदी के बाद वापस उसी कैंपस में छोड़ दिया जाए। इसी आदेश में बदलाव के लिए कुछ संगठन कोर्ट पहुंचे थे।

चूहे, बिल्लियां और इकोलॉजिकल बैलेंस

सुनवाई के दौरान एक एनजीओ की तरफ से पेश सीनियर वकील सी.यू. सिंह ने एक अनोखा तर्क दिया। उन्होंने कहा कि आवारा कुत्ते हमारे पर्यावरण का संतुलन बनाए रखते हैं। अगर सड़कों से अचानक कुत्तों को हटा दिया गया तो शहरों में चूहों की आबादी बेतहाशा बढ़ जाएगी जिससे प्लेग जैसी बीमारियां फैल सकती हैं।

इस पर कोर्ट ने सवाल किया कि क्या कोई ऐसा वैज्ञानिक प्रमाण है जो कुत्तों की कमी और चूहों की बढ़त के बीच सीधा संबंध दिखाता हो? माहौल को थोड़ा हल्का करते हुए बेंच ने टिप्पणी की कि अगर चूहों की समस्या है तो बिल्लियां इसका बेहतर समाधान हो सकती हैं क्योंकि वे चूहों की प्राकृतिक शिकारी हैं।

पेटा (PETA) की दलील और कोर्ट की सफाई

पेटा इंडिया की तरफ से पेश वकील श्याम दीवान ने ‘एनिमल बर्थ कंट्रोल’ (ABC) नियमों का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि कुत्तों को पकड़ने के बाद वापस उसी इलाके में छोड़ना जरूरी है वरना शेल्टर होम में भीड़ बढ़ेगी और यह जानवरों के साथ क्रूरता होगी। उन्होंने मांग की कि इस मामले में विशेषज्ञों की एक कमेटी बनाई जाए।

सुप्रीम कोर्ट ने अपनी स्थिति साफ करते हुए कहा कि उन्होंने कभी नहीं कहा कि सड़कों से सभी कुत्तों को हटा दिया जाए। कोर्ट का जोर इस बात पर था कि प्रशासन नियमों के तहत सख्ती से काम करे ताकि आम लोगों की सुरक्षा और जानवरों के अधिकार दोनों के बीच संतुलन बना रहे। फिलहाल इस मामले में सभी पक्षों की दलीलें सुनी जा रही हैं।

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