दुबई में बिहार के अर्जुन की मौत, लापता हैं दो और परिजन; वैशाली में पसरा मातम

बिहार के वैशाली का एक परिवार तबाह हो गया जब दुबई से अर्जुन कुमार की मौत की खबर आई। युद्ध के साये में हुई इस मौत ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या यह हमला था या हादसा? आखिर क्यों कंपनी शव दिखाने से कतरा रही है? पढ़िए इस दर्दनाक हादसे और लापता परिजनों की पूरी रिपोर्ट।

  • खाड़ी देशों के तनाव की भेंट चढ़ा वैशाली का युवक।
  • कंपनी ने शव दिखाने से किया इनकार, बढ़ा संदेह।
  • अर्जुन की मौत के बाद साले और बहनोई भी लापता।
  • पार्थिव शरीर की वापसी के लिए परिजनों की करुण पुकार।

Breaking News: खाड़ी देशों (Gulf Countries) में धधकती युद्ध की आग ने सात समंदर पार बिहार के एक घर का चिराग बुझा दिया है। वैशाली जिले के महम्मदपुर पंचायत अंतर्गत खजबत्ता गांव के रहने वाले अर्जुन कुमार की दुबई में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई है। जैसे ही ये खबर मिली तो खबर मिलते ही पूरे गांव में सन्नाटा पसरा है और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। अर्जुन महज तीन महीने पहले अपने परिवार की गरीबी दूर करने और सुनहरे भविष्य (Golden Future) का सपना लेकर विदेश गए थे लेकिन किसे पता था कि वे तिरंगे में लिपटकर लौटेंगे।

आखिरी कॉल और उसके बाद पुरे गांव में सन्नाटा

अर्जुन कुमार (पिता: सुरेंद्र महतो) दुबई की गैसफार नामक कंपनी में बतौर रिगर (Rigger) काम कर रहे थे। परिजनों ने बताया कि शनिवार, 28 फरवरी को अर्जुन ने अपनी पत्नी से वीडियो कॉल पर बात की थी। उस वक्त सब कुछ सामान्य लग रहा था लेकिन उसके बाद से उनका फोन अचानक बंद हो गया।

सोमवार रात जब कंपनी की ओर से मौत की आधिकारिक सूचना (Official Intimation) मिली तो परिवार के पैरों तले जमीन खिसक गई। आशंका जताई जा रही है कि युद्ध के दौरान हुए किसी बड़े हमले या तकनीकी हादसे की चपेट में आने से अर्जुन की जान गई है।

साले और बहनोई का अभी तक भी सुराग नहीं

आपको बता दें की यह दुखद घटना केवल एक मौत तक सीमित नहीं है बल्कि एक गहरे रहस्य और डर में बदल गई है। अर्जुन के साथ उसी साइट पर उनके साले रंजन कुमार (मुजफ्फरपुर) और बहनोई अजय महतो (चांदपकड़ी) भी कार्यरत थे।

अर्जुन की मौत के बाद से इन दोनों का भी कोई अता-पता नहीं है। परिजनों का उनसे संपर्क पूरी तरह टूट चुका है जिससे यह डर सता रहा है कि कहीं वे भी किसी बड़ी अनहोनी (Mishap) का शिकार तो नहीं हो गए।

शव दिखाने से कंपनी ने किया इनकार

इस मामले में एक नया मोड़ भी आ चूका है क्योंकि दुबई में मौजूद अर्जुन के कुछ रिश्तेदारों ने जब कंपनी प्रबंधन से संपर्क कर पार्थिव शरीर (Mortal Remains) देखने की इच्छा जताई तो उन्हें सुरक्षा कारणों और पुलिस क्लियरेंस (Police Clearance) का हवाला देकर रोक दिया गया।

कंपनी यह बताने को भी तैयार नहीं है कि शव फिलहाल किस अस्पताल या मोर्चरी में रखा गया है। इस गोपनीयता ने परिजनों की बेचैनी और संदेह को और बढ़ा दिया है।

एजेंट के भरोसे गया था कमाने और अब सरकार से आस

दिसंबर 2025 में एक स्थानीय एजेंट के माध्यम से दो साल के अनुबंध (Contract) पर दुबई गए अर्जुन का मकसद सिर्फ अपने बूढ़े माता-पिता और पत्नी को अच्छी जिंदगी देना था। अब शोकाकुल परिवार भारत सरकार और विदेश मंत्रालय (Ministry of External Affairs) से गुहार लगा रहा है कि अर्जुन के शव को जल्द से जल्द वतन लाया जाए और वहां फंसे अन्य सदस्यों की सुरक्षित वापसी (Safe Repatriation) सुनिश्चित की जाए।

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Saloni Yadav

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