दुनिया झुके या बढ़े, हमारी नीति नहीं बदलेगी! एस जयशंकर ने दो टूक कहा- सुपरपावर्स के बीच भारत का एक ही मंत्र, जानें चीन और यूरोप पर क्या बड़ा दावा किया
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने दूरदर्शन को दिए इंटरव्यू में भारत की विदेश नीति के 12 वर्षों का लेखा-जोखा रखा। उन्होंने साफ किया कि महाशक्तियों के बीच भारत सिर्फ 'इंडिया फर्स्ट' की नीति पर चलता है। जानें चीन, अमेरिका और यूरोप को लेकर उन्होंने क्या कहा।
नई दिल्ली: वैश्विक राजनीति के मंच पर भारत का रुख अब रक्षात्मक नहीं, बल्कि पूरी तरह स्पष्ट और आक्रामक है। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने मंगलवार को एक बार फिर दुनिया के बड़े मुल्कों को कड़ा संदेश देते हुए कहा कि मौजूदा सरकार की कूटनीति का सिर्फ एक ही बुनियादी आधार है - इंडिया फर्स्ट (पहले भारत)। उनके मुताबिक भारत सरकार का हर फैसला सिर्फ और सिर्फ देश के राष्ट्रीय हितों को तौलने के बाद ही लिया जाता है।
दूरदर्शन (DD India) को दिए एक खास इंटरव्यू में विदेश मंत्री ने भारतीय विदेश नीति के सफर और दुनिया की महाशक्तियों के साथ बदलते समीकरणों पर खुलकर बात की।
उन्होंने माना कि आज के दौर में कूटनीति का सबसे पेचीदा हिस्सा यह है कि आप खुद को सुपरपावर्स के बीच कैसे सही जगह पर रखते हैं। यह एक बेहद जटिल संतुलन है जिसे साधना आसान नहीं होता।
जब उनसे अमेरिका और चीन के साथ भारत के रिश्तों में आ रहे बदलावों को लेकर सवाल पूछा गया तो उन्होंने अमेरिका का उदाहरण देते हुए अपनी बात रखी।
"आज अमेरिका खुलकर कहता है कि वे 'अमेरिका फर्स्ट' की नीति पर चलते हैं। खैर, अमेरिका क्या करता है, इससे अलग हटकर हमारी सोच बिल्कुल साफ होनी चाहिए कि हम 'इंडिया फर्स्ट' की नीति पर ही आगे बढ़ेंगे।" — एस जयशंकर, विदेश मंत्री
चीन के साथ तनाव कम, पर पुरानी बात अभी नहीं लौटी
साल 2020 में गलवान घाटी की घटना के बाद से भारत और चीन के रिश्तों में आई कड़वाहट पर भी विदेश मंत्री ने बड़ा अपडेट दिया। उन्होंने कहा कि 2020 से हम एक बेहद कठिन दौर से गुजरे, जब सीमा पर शांति और स्थिरता पूरी तरह भंग हो गई थी। लेकिन राहत की बात यह है कि पिछले एक साल में चीजें काफी हद तक संभली हैं।
दोनों देशों के बीच राजनीतिक स्तर पर मामला शांत हुआ है हालांकि जयशंकर ने यह भी साफ किया कि रिश्ते अभी पूरी तरह से 2020 से पहले वाले दौर में नहीं लौटे हैं।
वहीं अमेरिका द्वारा वैश्विक मंच पर नियम बदलने को लेकर उन्होंने कहा कि चूंकि भारत नाटो (NATO) का हिस्सा नहीं है इसलिए उस राजनीति का सीधा असर हम पर नहीं पड़ा। हालांकि अमेरिकी टैरिफ, मार्केट एक्सेस और अंतरराष्ट्रीय संगठनों को लेकर उसके कड़े रुख ने भारत समेत पूरी दुनिया को प्रभावित जरूर किया है।
इस पूरे इंटरव्यू का सबसे चौंकाने वाला और सकारात्मक पहलू यूरोप को लेकर रहा। जयशंकर ने स्वीकार किया कि इस साल अगर भारत के रिश्ते किसी के साथ सबसे ज्यादा मजबूत हुए हैं तो वह बिना किसी शक के यूरोप है।
फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) और रणनीतिक साझेदारी ने भारत-यूरोप संबंधों को एक नई ऊंचाई दी है। इसके अलावा रूस और जापान के साथ भारत की दोस्ती हमेशा की तरह मजबूत बनी हुई है।
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