खेती किसानी। देशभर में किसान अब रासायनिक उर्वरकों से तंग आ चुके हैं। महंगाई, मिट्टी की बर्बादी और सेहत का डर – सब मिलाकर जैविक खेती की तरफ रुख तेज हो रहा है। लेकिन सवाल ये कि अगर आप अभी रासायनिक छोड़ जैविक अपनाएं, तो कटाई और उपज पर क्या होगा? लेटेस्ट स्टडीज और किसानों के अनुभव बताते हैं – शुरू में थोड़ा नुकसान, लेकिन लंबे में जबरदस्त फायदा इससे किसानों को होने वाला है। आइए आपको आज डिटेल में जानकारी देते है कि जैविक खाद से शुरुआत में पैदावार क्यों गिरती है?
पहले 1-2 सीजन में क्यों गिरती है उपज? असल वजह जान लीजिए
जैविक उर्वरक जैसे गोबर की खाद, कंपोस्ट या बैक्टीरिया वाली खाद धीरे-धीरे काम करते हैं। रासायनिक तो फट से असर दिखाते हैं, लेकिन जैविक को मिट्टी में जीव जंतु जगाने पड़ते हैं।
- पज में 5-15% तक गिरावट आम बात है, खासकर गेहूं, धान या सब्जियों में।
- कटाई का समय 7-15 दिन लेट हो सकता है क्योंकि पौधे को पोषण धीरे मिलता है।
ताजा रिपोर्ट्स से पता चला कि पंजाब और हरियाणा के किसानों ने 2024-25 में स्विच किया तो पहली फसल में 10% कम पैदावार हुई। लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी – मिट्टी टेस्ट करवाकर सही मात्रा डाली।
लंबे समय में 25% तक बढ़ोतरी! गुणवत्ता भी टॉप क्लास
नियमित जैविक इस्तेमाल से मिट्टी जिंदा हो जाती है। जल्दी सूखती नहीं, कीड़े कम आते हैं और फसल मजबूत बनती है। किसानों को उपज में 10-25% इजाफा हो जाता है। इसको कुछ फसलों में ट्राई करके देखा गया जैसे मक्का या दालों में तो रिजल्ट आगे चलकर काफी अच्छा रहा है।
स्वाद, पोषण और बाजार भाव बेहतर – जैविक सब्जियां 20-30% महंगे बिकती हैं।
कटाई आसान, क्योंकि पौधे स्वस्थ रहते हैं, टूटते नहीं।
2025 की ICAR स्टडी कहती है कि 3 साल बाद मिट्टी की उर्वरता 30% बढ़ जाती है, जिससे हर साल फायदा। उत्तर प्रदेश के किसानों ने बताया, उनकी जैविक टमाटर अब शहरों में धड़ल्ले से बिक रही है।
खास बैक्टीरिया से कमाल – 35% तक ज्यादा पैदावार, बिना एक्स्ट्रा खर्च के ओर ये किसानों के लिए काफी लाभकारी भी है क्योंकि इससे मिट्टी ओर सेहत दोनों अच्छी रहती है।
साधारण जैविक नहीं, स्पेशल वाले ट्राई करें:
- राइजोबियम को दालों में इस्तेमाल करने से 20-35% उपज बढ़ी।
- एजोटोबैक्टर को सूखे इलाकों में मक्का-ज्वार के लिए इस्तेमाल करने से 10-15% एक्स्ट्रा उपज।
- कंपोस्ट से कीट कंट्रोल (कोई कीटनाशक नहीं) भी लाभकारी है।
राजस्थान के ड्राई एरिया में किसानों ने 2025 में एजोस्पिरिलम यूज किया तो पानी कम लगा और उपज डबल हो गई। सरकार भी सब्सिडी दे रही है इन पर।
तो क्या करें किसान भाई? शुरूआत में ऐसे बचें नुकसान से
परिवर्तन आसान नहीं, लेकिन स्मार्ट तरीके से करें:
- मिट्टी टेस्ट करवाएं, आधी रासायनिक + आधी जैविक से शुरू करें।
- सही फसल चुनें – दालें या सब्जियां पहले ट्राई करें।
- - विशेषज्ञों से सलाह लें, जैसे कृषि विश्वविद्यालयों से।
अब आखिर में निष्कर्ष जो कि ये कि शुरू में थोड़ा धैर्य रखें, 2-3 सीजन बाद आपका खेत सोना उगलेगा। जैविक से न सिर्फ जेब भरेगी, मिट्टी और सेहत भी बचेंगी। ज्यादा जानकारी के लिए लोकल कृषि केंद्र जाएं!
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