- हरियाणा में जनवरी माह में स्कूलों में लंबी छुट्टियों का प्रस्ताव
- 1 से 15 जनवरी तक शीतकालीन अवकाश की संभावना, आदेश जल्द
- सर्दी और कोहरे के बीच बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता
- 22 जनवरी से 10वीं-12वीं प्री-बोर्ड परीक्षा की तैयारियां तेज
चंडीगढ़। ठंड का असर हरियाणा में अब पढ़ाई पर भी दिखने लगा है। न्यूनतम तापमान में गिरावट और सुबह के समय कोहरे की बढ़ती परत को देखते हुए राज्य के राजकीय विद्यालयों में जनवरी महीने के पहले पखवाड़े को लेकर शीतकालीन अवकाश प्रस्तावित किया गया है। शिक्षा विभाग से जुड़े सूत्र बताते हैं कि प्रस्ताव पर सहमति बन चुकी है लेकिन औपचारिक आदेश का इंतजार फिलहाल जारी है।
प्रस्तावित अवकाश की समयसीमा
यदि सब कुछ योजना के मुताबिक रहता है तो 1 जनवरी से 15 जनवरी तक सरकारी स्कूलों में पढ़ाई पूरी तरह बंद रहेगी। यह फैसला उन बच्चों के लिए राहत साबित हो सकता है जो सुबह की असहनीय सर्दी में स्कूल पहुंचने की चुनौती का सामना कर रहे हैं। हालांकि अभिभावकों और शिक्षकों की नज़र अब शिक्षा विभाग के अंतिम निर्देशों पर टिकी हुई है।
जनवरी के अतिरिक्त अवकाश भी जोड़ेंगे राहत
शीतकालीन अवकाश के अलावा जनवरी में कई साप्ताहिक और विशेष छुट्टियां भी पड़ रही हैं। रविवार, दूसरा शनिवार, प्रमुख पर्व और राजपर्व मिलाकर छात्रों को जनवरी में लंबे ब्रेक का फायदा मिलने वाला है।
इसी क्रम में 23 जनवरी को छोटूराम जयंती और बसंत पंचमी की छुट्टी, 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस और उसके बाद 27 जनवरी को संभावित प्रतिपूरक अवकाश इस पूरे महीने को छात्रों के लिए सबसे ज्यादा आरामदायक महीनों में शामिल कर सकते हैं।
बोर्ड छात्र भी तैयारी में जुटे
छात्रों की लापरवाही न बढ़े, इसके संकेत भी पहले से दे दिए गए हैं। शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि 22 जनवरी से 10वीं और 12वीं कक्षा की प्री-बोर्ड परीक्षाएं शुरू होंगी। यानी छुट्टियों के बाद परीक्षा माहौल में स्कूलों की रौनक लौट आएगी।
शिक्षकों के मुताबिक, अवकाश के बाद नियमित कक्षाएं, प्रैक्टिस टेस्ट और मॉडल पेपर्स के ज़रिए बोर्ड परीक्षार्थियों को फाइनल परीक्षा पैटर्न में ढाला जाएगा।
आदेश जारी होने की प्रतीक्षा
इस समय सबसे बड़ा सवाल यही है कि आधिकारिक आदेश कब आएंगे। सर्दी में और बढ़ोतरी के आसार हैं, ऐसे में संभावना यही जताई जा रही है कि यह प्रस्ताव जल्द ही आधिकारिक रूप से जारी हो सकता है।
अभिभावकों का कहना है कि मौसम को देखते हुए निर्णय बिल्कुल समयानुकूल है। बस वे चाहते हैं कि आदेश जल्द जारी हों ताकि बच्चों की तैयारी का शेड्यूल समय पर तय किया जा सके।
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