West Bengal SIR (NFLSpice News): पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची को लेकर चल रही विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया अब एक अहम मोड़ पर पहुंच गई है। चुनाव आयोग ने ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में सामने आए संदिग्ध मामलों को गंभीरता से लेते हुए बड़ा फैसला किया है। आयोग ने तय किया है कि ऐसे मामलों में बूथ लेवल ऑफिसर्स से लिखित स्पष्टीकरण लिया जाएगा।
16 दिसंबर को प्रकाशित ड्राफ्ट मतदाता सूची की जांच के दौरान करीब 1.4 करोड़ नाम ऐसे पाए गए हैं, जिन्हें संदिग्ध श्रेणी में रखा गया है। इन मामलों पर अब सीधे तौर पर भारतीय चुनाव आयोग की नजर है।
BLOs से पूछा जाएगा - नाम शामिल करने की वजह क्या थी
मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, जिन BLOs ने इन नामों को पहले ड्राफ्ट सूची और फिर प्रस्तावित अंतिम सूची में शामिल करने की सिफारिश की थी, उनसे इसकी ठोस वजह लिखित रूप में मांगी जाएगी।
इन अधिकारियों को यह बताना होगा कि उन्होंने किन आधारों पर इन आवेदकों को मतदाता सूची में शामिल करने की अनुशंसा की। आयोग इन्हीं जवाबों के आधार पर तय करेगा कि किन मामलों को दावों और आपत्तियों की सुनवाई के लिए भेजा जाए।
27 दिसंबर से शुरू हो सकती है सुनवाई
सूत्रों के अनुसार, दावों और आपत्तियों पर सुनवाई की प्रक्रिया 27 दिसंबर से शुरू होने की संभावना है। यह सुनवाई उन मामलों पर होगी जिनमें BLOs के जवाब संतोषजनक नहीं पाए जाएंगे या जिनमें दस्तावेजी असंगतियां सामने आएंगी।
2002 की सूची से गायब, उम्र 45 पार
संदिग्ध मामलों की सबसे बड़ी श्रेणी उन मतदाताओं की है, जिनकी मौजूदा उम्र 45 साल या उससे अधिक है, लेकिन उनका नाम 2002 की मतदाता सूची में दर्ज नहीं था। चूंकि 2002 में वे मतदान की न्यूनतम उम्र पूरी कर चुके होने चाहिए थे इसलिए सवाल उठ रहा है कि वे उस समय मतदाता क्यों नहीं बने।
इन मामलों में वर्तमान पुनरीक्षण के दौरान ‘प्रोजेनी मैपिंग’ के जरिए नाम जोड़े गए, जिस पर अब आयोग को आपत्ति है।
पांच साल में पिता, चालीस में दादा!
दूसरी श्रेणी के मामलों ने अधिकारियों को चौंका दिया है। इनमें ऐसे मतदाता सामने आए हैं जो कथित तौर पर 15 साल या उससे कम उम्र में पिता बन गए। एक मामला ऐसा भी पाया गया जहां रिकॉर्ड के अनुसार एक व्यक्ति पांच साल की उम्र में पिता बन गया।
तीसरी श्रेणी में ऐसे मतदाता शामिल हैं जो 40 साल या उससे कम उम्र में दादा बताए गए हैं। इन प्रविष्टियों ने मतदाता डेटा की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
माता-पिता का नाम एक जैसा
चौथी और अंतिम श्रेणी में वे मामले हैं जिनमें मतदाता के पिता और माता का नाम एक ही दर्ज है। चुनाव अधिकारियों का मानना है कि यह या तो गंभीर त्रुटि है या फिर जानबूझकर की गई गलत एंट्री।
फरवरी में आएगी अंतिम सूची, फिर चुनावी तारीखें
चुनाव आयोग ने साफ किया है कि सभी प्रक्रियाओं के बाद अंतिम मतदाता सूची 14 फरवरी 2026 को प्रकाशित की जाएगी। इसके तुरंत बाद पश्चिम बंगाल में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों की तारीखों का ऐलान किया जाएगा।
राजनीतिक हलकों में इस पूरी कवायद को आगामी चुनाव से पहले मतदाता सूची को पूरी तरह दुरुस्त करने की निर्णायक कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।
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