West Asia Crisis: क्या भारत पर पड़ेगा युद्ध का असर? रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की बड़ी बैठक, सरकार ने बनाया 'एक्शन प्लान'

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच भारत सरकार अलर्ट पर है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सीनियर मंत्रियों के साथ बैठक कर ऊर्जा और सप्लाई चेन की समीक्षा की। सरकार का लक्ष्य युद्ध के बीच आम जनता को महंगाई और किल्लत से बचाना है।

Mar 29, 2026 - 20:47
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West Asia Crisis: क्या भारत पर पड़ेगा युद्ध का असर? रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की बड़ी बैठक, सरकार ने बनाया 'एक्शन प्लान'
कर्तव्य भवन में हुई IGoM की पहली हाई-लेवल बैठक, रक्षा मंत्री ने की अध्यक्षता।

नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में बारूद की गंध और गहराते तनाव के बीच भारत ने अपनी कमर कस ली है। शनिवार को राजधानी के कर्तव्य भवन में एक बड़ी हलचल देखने को मिली, जहां रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मंत्रियों के एक अनौपचारिक समूह (IGoM) की पहली और बेहद महत्वपूर्ण बैठक की अध्यक्षता की। यह मीटिंग महज एक औपचारिक चर्चा नहीं थी, बल्कि युद्ध की आहट के बीच भारत की 'सुरक्षा ढाल' तैयार करने की एक गंभीर कोशिश है।

सीधे असर की तैयारी

ग्राउंड जीरो से आ रही खबरें परेशान करने वाली हो सकती हैं, लेकिन सरकार का संदेश साफ है—"हम तैयार हैं।" बैठक के दौरान राजनाथ सिंह ने अधिकारियों को दो-टूक कहा कि हमें सिर्फ आज का नहीं, बल्कि अगले कुछ महीनों का 'रोडमैप' चाहिए। उन्होंने जोर दिया कि ऊर्जा आपूर्ति (Energy Supply) और जरूरी चीजों की कीमतों पर युद्ध का साया नहीं पड़ना चाहिए।

बैठक में मौजूद रणनीतिकारों ने इस बात पर मंथन किया कि अगर खाड़ी देशों से सप्लाई चेन बाधित होती है, तो भारत के पास 'प्लान-बी' क्या है। इस दौरान 7 अलग-अलग एम्पावर्ड ग्रुप्स (EGoS) के सचिवों ने अपनी रिपोर्ट पेश की, जिसमें लॉजिस्टिक्स से लेकर फर्टिलाइजर तक के संभावित संकटों का कच्चा चिट्ठा सामने रखा गया।

दिग्गजों का जमावड़ा और रणनीति

इस हाई-प्रोफाइल मीटिंग की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसमें वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी, किरेन रिजिजू और जेपी नड्डा जैसे कद्दावर चेहरे मौजूद थे। मंत्रियों ने इस बात पर चिंता जताई कि कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और शिपिंग रूट्स में बदलाव का सीधा असर भारतीय रसोई और ट्रांसपोर्ट पर पड़ सकता है।

फेक न्यूज़ पर 'सर्जिकल स्ट्राइक'

एक दिलचस्प बात जो इस बैठक से निकलकर आई, वह थी 'सूचना का प्रबंधन'। सरकार को डर है कि युद्ध की खबरों के बीच अफवाहें बाजार में पैनिक (डर) पैदा कर सकती हैं। राजनाथ सिंह ने निर्देश दिए हैं कि सभी विभाग सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों पर नजर रखें ताकि भ्रामक जानकारी को तुरंत काटा जा सके। जनता तक केवल वही जानकारी पहुंचे जो पूरी तरह जांची गई हो।

सोशल मीडिया पर भरोसा

बैठक के बाद राजनाथ सिंह ने 'X' (पहले ट्विटर) पर देश को भरोसा दिलाते हुए लिखा कि पीएम मोदी के नेतृत्व में सरकार हर स्थिति पर नजर रख रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारतीय हितों की रक्षा करना और सप्लाई चेन को मजबूत रखना उनकी प्राथमिकता है।

कुल मिलाकर, सरकार ने साफ कर दिया है कि भले ही संघर्ष सात समंदर पार हो, लेकिन भारत की थाली और तेल की टंकी पर उसका असर कम से कम हो, इसके लिए 'कंट्रोल रूम' अब एक्टिव मोड में है।

Vinod Yadav एनएफएल स्पाइस न्यूज़ के फाउंडर है और साथ ही 10 सालों से पत्रकारिता के साथ में जुड़े हुए है। इन्होने स्नातक करने के बाद से ही पत्रकारिता में अपनी पहचान बनाई है और आज राष्ट्रीय - अंतर्राष्ट्रीय मुद्दों के अलावा कई अलग अलग क्षेत्रों में अपनी पकड़ को काफी मजबूत बनाया है।