मान लीजिए आपने कुछ महीने पहले काम के लिए लैपटॉप खरीदने को पर्सनल लोन लिया था। अब अचानक परिवार में मेडिकल इमरजेंसी आ गई और तुरंत पैसों की जरूरत है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही होता है कि क्या पहले से चल रहे पर्सनल लोन के साथ दूसरा पर्सनल लोन लिया जा सकता है।
अच्छी खबर यह है कि ज्यादातर मामलों में इसका जवाब हां होता है लेकिन कुछ जरूरी शर्तों और जांच के बाद और ये जरुरी शर्तें कौन कौन सी होती है और कौन कौन सी जांच से आपको गुजरना पड़ता है आइये जानते है।
RBI का नियम क्या कहता है
Reserve Bank of India ने ऐसा कोई नियम नहीं बनाया है, जो किसी व्यक्ति को एक से ज्यादा पर्सनल लोन लेने से रोकता हो। यानी RBI की तरफ से पर्सनल लोन की संख्या पर कोई सीधी सीमा तय नहीं है।
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RBI का नियम क्या कहता है[/caption]
इसका मतलब यह हुआ कि बैंक और NBFC अपने स्तर पर यह तय करते हैं कि वे किसी ग्राहक को कितने पर्सनल लोन और कितनी रकम तक का कर्ज देंगे। आमतौर पर बैंक इस बात पर ज्यादा ध्यान देते हैं कि ग्राहक की कुल चुकाने की क्षमता कितनी है।
लोन की संख्या नहीं, कुल रकम होती है अहम
बैंकों के लिए यह ज्यादा मायने रखता है कि कोई व्यक्ति कुल कितना कर्ज ले रहा है, न कि वह कितने अलग-अलग लोन में बंटा हुआ है। उदाहरण के तौर पर, यदि किसी ग्राहक की कुल पात्रता 5 लाख रुपये है, तो वह यह रकम एक लोन में ले या दो-तीन छोटे लोन में — बैंक के नजरिये से जोखिम लगभग समान रहता है।
हालांकि कई मामलों में बैंक यह शर्त रखते हैं कि उसी समय किसी दूसरे बैंक या NBFC से अतिरिक्त पर्सनल लोन न लिया जाए।
डेट-टू-इनकम रेशियो पर रहती है सबसे कड़ी नजर
दूसरा पर्सनल लोन देते समय बैंक सबसे पहले डेट-टू-इनकम (DTI) रेशियो देखते हैं। यह रेशियो बताता है कि आपकी मासिक आय का कितना हिस्सा EMI चुकाने में जा रहा है।
मान लीजिए आपकी सैलरी 50,000 रुपये है और कुल EMI 10,000 रुपये है, तो DTI 20% होगा। ज्यादातर बैंक 35% तक के DTI को सुरक्षित मानते हैं। कुछ मामलों में 35% से 50% तक का DTI भी स्वीकार किया जाता है, लेकिन तब सह-आवेदक, गारंटर या कम लोन राशि जैसी शर्तें लग सकती हैं।
मौजूदा EMI जोड़कर होता है नया हिसाब
अगर आपके ऊपर पहले से कोई लोन चल रहा है, तो नया पर्सनल लोन देते समय बैंक सभी मौजूदा EMI को जोड़कर नया DTI निकालते हैं। इसमें नए लोन की प्रस्तावित EMI भी शामिल होती है।
अगर इस गणना के बाद भी आपका DTI बैंक की तय सीमा में रहता है और बाकी शर्तें पूरी होती हैं, तो दूसरा पर्सनल लोन मंजूर किया जा सकता है। यही वजह है कि कई लोग एक ही समय में एक से ज्यादा पर्सनल लोन लेने में सफल हो जाते हैं।
क्रेडिट स्कोर निभाता है बड़ी भूमिका
पर्सनल लोन बिना किसी गारंटी के दिया जाता है, इसलिए बैंक आपके क्रेडिट स्कोर और क्रेडिट रिपोर्ट को बेहद गंभीरता से देखते हैं। आमतौर पर 750 या उससे ज्यादा का क्रेडिट स्कोर अच्छा माना जाता है।
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क्रेडिट स्कोर निभाता है बड़ी भूमिका - (Photo/Canva)[/caption]
क्रेडिट रिपोर्ट से यह साफ पता चलता है कि आपने पहले के लोन समय पर चुकाए या नहीं, कहीं EMI लेट तो नहीं हुई, या किसी लोन को सेटल या राइट-ऑफ तो नहीं किया गया। अगर रिकॉर्ड साफ है, तो बैंक दूसरे लोन के लिए ज्यादा भरोसा दिखाते हैं।
एक से ज्यादा लोन हों तो मैनेजमेंट जरूरी
अगर किसी व्यक्ति के पास एक से ज्यादा पर्सनल लोन या अन्य कर्ज चल रहे हैं, तो उनका सही प्रबंधन बेहद जरूरी हो जाता है। EMI चूकने पर न सिर्फ पेनल्टी लगती है, बल्कि क्रेडिट स्कोर भी तेजी से गिरता है।
विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि सभी EMI के लिए ऑटो-डेबिट सुविधा रखें, खर्च और बजट की नियमित समीक्षा करें और अतिरिक्त आय मिलने पर प्रीपेमेंट कर कर्ज का बोझ घटाने की कोशिश करें।
सोच-समझकर लिया गया फैसला ही सुरक्षित
एक से ज्यादा पर्सनल लोन लेना पूरी तरह कानूनी है और कई बार जरूरी भी हो जाता है। लेकिन यह तभी फायदेमंद होता है, जब आय स्थिर हो, DTI नियंत्रण में रहे और क्रेडिट रिकॉर्ड मजबूत हो।
बिना योजना के कई लोन लेना भविष्य में आर्थिक दबाव बढ़ा सकता है। इसलिए दूसरा पर्सनल लोन लेने से पहले अपनी चुकाने की क्षमता का ईमानदारी से आकलन करना सबसे जरूरी कदम है।
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