- चांदी की कीमत MCX पर 17 हजार रुपये टूटी, 2.34 लाख पर पहुंची
- सोने में भी 844 रुपये की गिरावट, निवेशकों में हलचल
- 5 साल में सबसे बड़ी एकदिनी गिरावट - फिर भी साल-दर-साल 155% बढ़ोतरी
Gold Silver Today Rate: कल की तेज़ी के बाद आज चांदी (Silver) बाजार में गिरावट का साया दिखाई दिया। बुधवार के ट्रेडिंग सेशन में MCX पर सिल्वर में लोअर सर्किट (Lower Circuit) लग गया जिससे कीमत सीधे 17,000 रुपये टूटकर 2,34,000 रुपये प्रति किलोग्राम पर आ गई।
सुबह शुरुआती कारोबार में चांदी नई ऊंचाई पर पहुंची थी लेकिन जैसे-जैसे दिन बढ़ा वैसे वैसे निवेशकों की आक्रामक प्रॉफिट बुकिंग (Profit Booking) ने बाजार की चमक फीकी कर दी।
सोने की कीमतों में भी कमजोरी
केवल सिल्वर ही नहीं, गोल्ड (Gold) भी सुस्त पड़ा। बुधवार को सोना 844 रुपये गिरकर 1,35,809 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया। बीते सेशन की तेजी के बाद यह गिरावट निवेशकों को चौंका रही है लेकिन मार्केट विशेषज्ञ इसे अस्थायी सुधार (Short-term Correction) मान रहे हैं।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी कमजोरी
वैश्विक बाजार (Global Market) में भी आज चांदी पर दबाव दिखाई दिया। COMEX में सिल्वर की कीमतें नीचे खुलीं और $74.170 प्रति औंस का इंट्राडे लो (Intraday Low) बनाया। फिलहाल कीमत लगभग $75 प्रति औंस के आसपास कारोबार कर रही है जो मंगलवार की क्लोजिंग से 3% कम है।
कमोडिटी एनालिस्ट्स का कहना है कि अमेरिकी डॉलर (US Dollar) की मजबूती और ट्रेजरी यील्ड्स (Treasury Yields) में उछाल से कीमती धातुओं पर दबाव बढ़ा है।
पांच साल की सबसे बड़ी एकदिनी गिरावट
सोमवार को सिल्वर ने पिछले पांच सालों की सबसे बड़ी एकदिनी गिरावट दर्ज की थी। हालांकि, दिलचस्प बात यह है कि साल-दर-साल (Year-on-Year) आधार पर अब भी यह 155% की जबरदस्त बढ़त पर है।
मंगलवार को मार्केट में जबरदस्त वैल्यू बाइंग (Value Buying) आई थी और MCX पर चांदी लगभग ₹27,000 उछली थी जिसने ज्यादातर पुराने नुकसान की भरपाई कर ली थी। उस दिन सिल्वर रिकॉर्ड ऊंचाई ₹254,174 रुपये से सिर्फ ₹3,000 दूर बंद हुई थी।
निवेशकों के लिए क्या यह चिंता की बात है?
मार्केट एक्सपर्ट मानते हैं कि मौजूदा गिरावट निवेशकों की रणनीतिक पोज़िशन एडजस्टमेंट (Position Adjustment) का नतीजा है। यह घबराने की नहीं बल्कि रणनीति बदलने की स्थिति है।
लंबी अवधि के निवेशक (Long-term Investors) अब भी सिल्वर में अपसाइड संभावनाओं को लेकर आश्वस्त हैं। एक्सपर्ट्स का मानना है कि 2 से 3 साल के नजरिए से चांदी में फिर तेजी लौट सकती है क्योंकि औद्योगिक मांग (Industrial Demand) और घटती आपूर्ति (Supply Constraints) इसका दीर्घकालिक समर्थन बनाए रखेगी।
आगे क्या संकेत मिल रहे हैं
अगले कुछ सेशनों में कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। लेकिन जिन निवेशकों का दृष्टिकोण दीर्घकालिक है वे मौजूदा गिरावट को अवसर के रूप में देख रहे हैं।
कमोडिटी मार्केट में कहावत है की "जब चमक कम हो, तब बुलियन (Bullion) में एंट्री सही समय पर होती है।" शायद यही वह पल है जब समझदारी, जल्दबाजी से ज्यादा मायने रखती है।
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