नई दिल्ली, विशेष संवाददाता: पश्चिम एशिया में गहराते युद्ध के बाद वैश्विक अर्थव्यवस्था पर मंडराते काले बादलों के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मोर्चा संभाल लिया है। रविवार को प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में 'सुरक्षा संबंधी कैबिनेट समिति' (CCS) की एक हाई-प्रोफाइल बैठक हुई। इस बैठक का मुख्य एजेंडा केवल युद्ध की समीक्षा करना नहीं था, बल्कि भारत की अर्थव्यवस्था, खाद्य सुरक्षा और आम आदमी की जेब पर पड़ने वाले इसके असर को 'जीरो' करना था। प्रधानमंत्री ने स्पष्ट संदेश दिया कि दुनिया में कहीं भी हलचल हो, भारत के नागरिक और किसानों को इसका खामियाजा नहीं भुगतना चाहिए।
'होल-ऑफ-गवर्नमेंट' एप्रोच: हर विभाग अलर्ट मोड पर
प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) के अनुसार, कैबिनेट सचिव ने बैठक में एक विस्तृत प्रेजेंटेशन दिया, जिसमें युद्ध के अल्पकालिक और दीर्घकालिक प्रभावों का खाका खींचा गया। पीएम मोदी ने 'होल-ऑफ-गवर्नमेंट' एप्रोच अपनाने का निर्देश दिया है। इसका मतलब है कि कृषि, पेट्रोलियम, वित्त, और शिपिंग जैसे सभी मंत्रालय अब एक टीम की तरह काम करेंगे। उभरती चुनौतियों से निपटने के लिए मंत्रियों और सचिवों के समर्पित समूह (Group of Ministers) बनाए गए हैं, जो हर सेक्टर की पल-पल की निगरानी करेंगे।
अन्नदाता और आम आदमी की सुरक्षा सर्वोपरि
बैठक में सबसे ज्यादा चर्चा कृषि और ऊर्जा क्षेत्र पर हुई। खरीफ सीजन के मुहाने पर खड़े किसानों के लिए खाद (Fertilizer) की उपलब्धता सुनिश्चित करना सरकार की प्राथमिकता है।
खाद का संकट टलेगा: पीएम को जानकारी दी गई कि पिछले कुछ वर्षों में बनाए गए 'बफर स्टॉक' के कारण खाद की कमी नहीं होगी। साथ ही, सरकार अब आयात के लिए नए वैकल्पिक देशों की तलाश कर रही है ताकि किसी एक क्षेत्र पर निर्भरता खत्म हो सके।
बिजली और ईंधन: ऊर्जा क्षेत्र की समीक्षा करते हुए बताया गया कि पावर प्लांट्स में कोयले का पर्याप्त स्टॉक है, जिससे बिजली संकट का कोई खतरा नहीं है।
महंगाई पर लगाम: पीएम मोदी ने राज्य सरकारों के साथ मिलकर कालाबाजारी और जमाखोरी रोकने के सख्त निर्देश दिए हैं, ताकि आवश्यक वस्तुओं की कीमतें न बढ़ें।
ग्लोबल शॉक से निपटने के लिए 'एक्सपोर्ट का नया रूट'
युद्ध की वजह से सप्लाई चेन टूटने का खतरा हमेशा रहता है। इसे देखते हुए सरकार ने एक रणनीतिक बदलाव का फैसला किया है। भारत अब केवल पारंपरिक बाजारों पर निर्भर नहीं रहेगा। पीएम ने भारतीय सामानों के लिए नए वैश्विक बाजारों (Export Destinations) की पहचान करने और उन्हें विकसित करने का निर्देश दिया है। इसके अलावा, फार्मास्यूटिकल्स और केमिकल्स जैसे प्रमुख उद्योगों के लिए कच्चे माल (Raw Materials) के आयात के स्रोतों में विविधता लाई जाएगी ताकि औद्योगिक उत्पादन पर कोई आंच न आए।
शिपिंग और लॉजिस्टिक्स: समुद्री रास्तों पर पैनी नजर
चूंकि पश्चिम एशिया युद्ध का केंद्र है, इसलिए समुद्री व्यापार मार्ग (Shipping Lanes) सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं। CCS की बैठक में व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा और माल ढुलाई की लागत को नियंत्रित रखने पर भी विस्तृत चर्चा हुई। सरकार का लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि अंतरराष्ट्रीय अस्थिरता के बावजूद भारत की 'इकोनॉमिक ग्रोथ' की रफ्तार धीमी न पड़े।
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