Haryana News: हरियाणा सरकार ने एक ऐसा फैसला किया है जिसका इंतजार राज्य के सैकड़ों सरकारी डॉक्टरों को लंबे समय से था।

पोस्ट ग्रेजुएट मेडिकल एजुकेशन नीति में बड़ा संशोधन करते हुए सरकार ने तय किया है कि क्लीनिकल स्पेशलिटी में पीजी डिग्री करने वाले सरकारी डॉक्टरों को अब मेडिकल एजुकेशन बॉन्ड नहीं भरना होगा। यानी पढ़ाई के बाद उन्हें अपना मूल विभाग नहीं छोड़ना पड़ेगा ओर वे जहाँ थे वहीं काम जारी रख सकेंगे।

यह बदलाव छोटा नहीं है।

दरअसल अब तक की व्यवस्था में पीजी करने के बाद डॉक्टरों को मेडिकल एजुकेशन विभाग में सेवा देना अनिवार्य था जिससे कई बार न तो अस्पतालों को पूरे विशेषज्ञ मिलते थे और न ही डॉक्टरों को उनकी पसंद की पोस्टिंग। इस खींचतान में आम मरीज सबसे ज़्यादा नुकसान में रहता था।

नई नीति के तहत नान-क्लीनिकल और पैरा-क्लीनिकल स्पेशलिस्ट डॉक्टरों के लिए एक अलग रास्ता तय किया गया है। उन्हें निर्धारित टीचिंग सेवा पूरी करने के बाद मेडिकल कॉलेजों में तीन साल की सेवा देनी होगी। इसके बाद उन्हें स्थायी नियुक्ति का विकल्प भी मिलेगा ओर जो कि कई डॉक्टरों के लिए एक बड़ी राहत है।

अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. सुमिता मिश्रा ने साफ कहा कि इस निर्णय का मकसद दोहरा है। एक तरफ मेडिकल कॉलेजों में फैकल्टी की लंबे समय से चली आ रही कमी को पाटना, और दूसरी तरफ राज्य के नागरिकों तक बेहतर विशेषज्ञ स्वास्थ्य सेवाएं पहुँचाना।

जानकार मानते हैं कि अगर इस नीति को सही तरीके से लागू किया गया तो हरियाणा के सरकारी मेडिकल कॉलेजों की तस्वीर बदल सकती है। जहाँ अब तक प्रोफेसर और सीनियर फैकल्टी के पद खाली पड़े रहते थे।

सच के साथ रहना और इसको लगातार निभाना इतना मुश्किल भी नहीं होता। हरियाणा से हूँ...