Mirchi Ki Kheti: मिर्ची की खेती में बंपर पैदावार के 5 सीक्रेट टिप्स, बस एक छिड़काव और 50% तक बढ़ जाएगी उपज!
किसान भाइयो क्या आप मिर्ची की खेती से तगड़ी कमाई करना चाहते हैं? आज इस आर्टिकल में जानिए वे खास तरीके जिनसे आपकी मिर्च की खेती में पैदावार 50% तक बढ़ सकती है। सही किस्म के चुनाव से लेकर देसी टॉनिक तक, यहाँ पढ़ें पूरी रिपोर्ट।
Mirchi Ki Kheti: अगर आप एक किसान हैं और आपके मिर्ची के पौधों में फूल तो आ रहे हैं लेकिन फल नहीं बन रहे या फिर थ्रिप्स और वायरस ने आपकी मेहनत पर पानी फेर दिया है तो यह खबर आपके लिए ही है। किसान भाइयो अक्सर देखा गया है कि पारंपरिक तरीके से खेती करने वाले किसान मेहनत तो खूब करते हैं लेकिन प्रति हेक्टेयर पैदावार 50-60 क्विंटल पर ही सिमट कर रह जाती है। जबकि थोड़े से बदलाव के साथ इसे 100 क्विंटल के पार ले जाया जा सकता है।
किसान भाइयों आज के समय में अगर आप मिर्च की खेती करते है तो उसमे आप अधिक पैदावार आसानी के साथ में ले सकते है क्योंकि हमारे कृषि वैज्ञानिकों के द्वारा बहुत सारी उन्नत किस्मों को इजाद कर दिया गया है। लेकिन उन्नत किस्म के साथ साथ में आपको कुछ और भी बातों को ध्यान में रखना होता है जिनके जरिये आप अपनी मिर्च की फसल से अधिक पैदावार ले सकते है। आइये आज आपको इसके बारे में डिटेल में जानकारी देते है।
सही किस्म का चुनाव करना जरुरी होता है
किसान भाइयो ज्यादातर गलती इसी जगह पर किसानों से होती है और इसके चलते पैदावार पर बहुत बुरा असर होता है। अधिकतर किसान बाजार से कोई भी बीज लाकर बो देते हैं लेकिन गर्मी की मार झेलने के लिए हर किस्म तैयार नहीं होती। अगर आप गर्मी के मौसम में अब मिर्ची की खेती करने जा रहे है तो इसके लिए पुसा सदाबहार और अर्का मोहिनी जैसी किस्में सबसे अच्छी मानी जाती है और इन किस्मों में रोगों से लगने की छमता भी होती है।
बाजार में आजकल तीखी मिर्ची की डिमांड भी काफी अधिक है और अगर आप उसकी खेती करना चाहते है तो उसके लिए आपको पुसा ज्वाला किस्म की बुवाई करनी चाहिए। इसके अलावा भी और बहुत सारी मिर्ची की इसी किस्म है जिनकी बुवाई करके आप आसानी के साथ में अच्छी पैदावार ले सकते है। देखिये मिर्ची की उन्नत किस्मों की डिटेल में जानकारी –
| किस्म | विकसित संस्था | फल का आकार / तीखापन | रोग प्रतिरोधक क्षमता | औसत उपज (प्रति हेक्टेयर) | उपयुक्त क्षेत्र |
|---|---|---|---|---|---|
| पुसा ज्वाला | ICAR-IARI, नई दिल्ली | 9–10 सेमी, हल्के हरे, मध्यम तीखे | मोजेक वायरस, थ्रिप्स, माइट्स सहनशील | 85 क्विंटल हरी, 18 क्विंटल सूखी | पूरे भारत, खासकर गर्म क्षेत्र |
| पुसा सदाबहार | ICAR-IARI, नई दिल्ली | 6–8 सेमी, गुच्छों में फल, बहुत तीखे | CMV, TMV, लीफ कर्ल, थ्रिप्स, माइट्स | 95–150 क्विंटल हरी, 20–30 क्विंटल सूखी | राजस्थान, गुजरात, हरियाणा |
| अर्का लोहित | ICAR-IIHR, बेंगलुरु | गहरे हरे से लाल, बहुत तीखे | सामान्य रोग सहनशील | 25 टन हरी, 3 टन सूखी | मध्य व दक्षिण भारत |
| अर्का मेघना | ICAR-IIHR, बेंगलुरु | 10–10.6 सेमी, गहरे हरे, हाइब्रिड | पाउडरी मिल्ड्यू, वायरस प्रतिरोधी | 33.5 टन हरी, 5 टन सूखी | उत्तर व पश्चिम भारत |
| अर्का स्वेता | ICAR-IIHR, बेंगलुरु | 11–13 सेमी, हल्के हरे, मध्यम तीखे | CMV वायरस सहनशील | 28–33 टन हरी, 4.5–5 टन सूखी | पूरे भारत |
| अर्का हरिता | ICAR-IIHR, बेंगलुरु | 10 सेमी, हल्के हरे | पाउडरी मिल्ड्यू और वायरस प्रतिरोधी | 38 टन हरी, 5.8 टन सूखी | सिंचित क्षेत्र |
मिर्च की खेती में मिट्टी और खाद
किसान भाइयों मिर्च की खेती करने से पहले अपने खेत की मिट्टी की आपको अच्छे से जांच करवाना जरुरी है। मिर्च की खेती बलुई दोमट या अच्छी जल निकासी वाली भूमि में अच्छे से होती है और मिट्टी का pH मान 6.5 से 7.5 होना जरुरी होता है तभी आपको अधिक पैदावार मिलती है।

रही बात ख़ास की तो अपने खेत में मिर्च के पौधों की रोपाई से पहले आपको 15-20 टन सड़ी गोबर खाद या वर्मीकम्पोस्ट प्रति हेक्टेयर डालना है और जैविक उर्वरक जैसे एजोस्पिरिलम + फॉस्फोबैक्टीरिया (800 ग्राम प्रत्येक) मिलाकर आपको खेत में डालना है। पौधों में फूल आने के समय में आपको कैल्शियम नाइट्रेट (10 ग्राम/लीटर) या सल्फर (10 किलो/एकड़) का छिड़काव करना है जिससे फूल ज्यादा आते है।
मिर्च की खेती में रोपाई का समय और दूरी
खत में मिर्च के पौधों की रोपाई करने का जो सही समय है बो सितम्बर या अक्टूबर का महीना होता है लेकिन आज के समय में बहुत सारी इसी किस्में आ चुकी है जिनके जरिये आप पुरे साल इसकी खेती कर सकते हो। रोपाई के समय में आपको ध्यान रखना है की पंक्ति से पंक्ति 60-75 सेमी और पौधे से पौधे 45-60 सेमी दूरी पर रहने चाहिए जिससे पौधों में फैलाव अच्छे से होता है। ट्रांसप्लांटिंग यानि रोपाई करने के बाद 20-30 दिन में टॉप ड्रेसिंग वर्मीकम्पोस्ट के माध्यम से जरूर करनी चाहिए। पौधों को सीधा रखने के लिए उनको सहारा देने का काम भी किया जा सकता है।
मिर्च की खेती में सिंचाई
किसान भाइयों आप अपने मिर्च के खेत में सिंचाई का काम हर सप्ताह भी कर सकते है या फिर आपके क्षेत्र में नमी अधिक है तो इसको 2 सप्ताह में भी कर सकते है। फसल में ड्रिप सिस्टम के जरिये सिंचाई करना सबसे अच्छा रहता है और इससे पानी की भी आप बचत कर सकते है। पौधों में जब फूल आने का समय होता है उस समय में आपको सिंचाई पर खास ध्यान रखना है।

फूल और फल बढ़ाने के आसान तरीके
मिर्च की खेती के दौरान पौधों में फूल की मात्रा और फलों की मात्रा बढ़ाने के लिए आप कई उपाय कर सकते है। जब पौधों में फूल आते है उस समय पर आप अपने खेत में होमोब्रासिनोलाइड (5 ml/10 लीटर) या ट्राइएकॉन्टेनॉल (1.25 ml/लीटर) का छिड़काव 15-20 दिन के अंतराल पर 3 बार करे।
इसके अलावा छाछ + गौमूत्र + सरसों की खल्ली का मिश्रण (1:1:1 अनुपात) बनाकर छिड़कें क्योंकि इससे पौधे हरे भरे रहने के साथ साथ में पैदावार भी पढ़ती है। नीम तेल + साबुन या पंचगव्य का नियमित छिड़काव अगर आप मिर्च की फसल पर करते है तो पौधों में रोग लगने की गुंजाइस ख़त्म हो जाती है।
मिर्च की फसल के प्रमुख रोग
मिर्च की फसल में कई प्रकार के रोगों का खतरा रहता है तो अगर आप सचेत नहीं रहते है तो इससे आपको काफी अधिक नुकसान का सामना करना पड़ता है। आपको बता दें की समय रहते अगर आप इन रोगों की पहचान करके उपाय कर देते है तो इससे आपको पैदावार भी अधिक मिलेगी और साथ में मिर्च की गुणवत्ता काफी अच्छी रहती है।
| रोग का नाम | कारण | मुख्य लक्षण | रोकथाम |
|---|---|---|---|
| पत्ता कुंचन / लीफ कर्ल वायरस | वायरस (सफेद मक्खी द्वारा फैलता) | पत्तियाँ मुड़ना, पीली होना, पौधा बौना रहना, फल कम लगना | नीम तेल 5 ml/लीटर या इमिडाक्लोप्रिड छिड़काव, पीले स्टिकी ट्रैप, रोगग्रस्त पौधे हटाएँ |
| भभूतिया रोग / पाउडरी मिल्ड्यू | फफूंद | पत्तियों पर सफेद पाउडर, पत्तियाँ पीली होकर गिरना | सल्फर या हेक्साकोनाजोल छिड़काव, पौधों के बीच दूरी रखें |
| फल सड़न / एन्थ्रेक्नोज | फफूंद | फलों पर काले धब्बे, फल सड़ना, तने पर घाव | बीज उपचार, मैनकोजेब या कार्बेन्डाजिम छिड़काव |
| उकठा / विल्ट | फफूंद या बैक्टीरिया | पत्तियाँ मुरझाना, तना अंदर से भूरा, पौधा सूखना | ट्राइकोडर्मा मिट्टी में मिलाएँ, जल निकासी रखें |
| डंपिंग ऑफ | फफूंद | छोटे पौधे का तना सड़ना और गिरना | बीज उपचार, ऊँची क्यारियाँ, पानी कम दें |
किसान भाइयों इस आर्टिकल में इतना ही और उम्मीद है की इस खबर में दी गई जानकारी आपके जरूर काम आएगी। इसी ही ख़बरों के लिए आप एनएफएल स्पाइस न्यूज़ को गूगल न्यूज़ या फिर सोशल मीडिया पर फॉलो कर सकते है।



