फरवरी में महंगाई ने ली हल्की करवट: खाने-पीने की चीजें महंगी, फिर भी RBI की सीमा के अंदर CPI
फरवरी में भारत की खुदरा महंगाई थोड़ी बढ़कर 3.21% हो गई। बढ़ोतरी की बड़ी वजह खाद्य पदार्थों की कीमतें रहीं। हालांकि महंगाई अभी भी RBI के तय दायरे में है। राज्यों में तेलंगाना सबसे ऊपर और मिजोरम सबसे नीचे रहा।
नई दिल्ली: आम आदमी के किचन के बजट को लेकर एक बड़ी खबर आई है। ताज़ा सरकारी आंकड़ों ने साफ कर दिया है कि फरवरी के महीने में देश में महंगाई का पारा थोड़ा चढ़ गया है। अगर आप पिछले कुछ दिनों से टमाटर और गोभी के दाम सुनकर हैरान थे, तो नेशनल स्टैटिस्टिक्स ऑफिस (NSO) के आंकड़े आपकी उस चिंता की पुष्टि कर रहे हैं।
गुरुवार को जारी डेटा के मुताबिक, फरवरी में खुदरा महंगाई दर (CPI) बढ़कर 3.21% हो गई है। याद दिला दें कि जनवरी में यह आंकड़ा 2.74% पर था। हालांकि, घबराने वाली बात इसलिए नहीं है क्योंकि यह उछाल अभी भी रिजर्व बैंक (RBI) के 4% के ‘कंफर्ट जोन’ के नीचे ही है।
थाली में क्या हुआ सस्ता और क्या महंगा?
इस बार की महंगाई का मुख्य विलेन ‘फूड बास्केट’ यानी खाने-पीने का सामान रहा है। खाद्य महंगाई दर जनवरी के 2.13% से छलांग लगाकर फरवरी में 3.47% पर पहुंच गई।
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इनकी बढ़ी कीमतें: टमाटर, गोभी और नारियल जैसे सामानों ने जेब पर बोझ डाला। सिर्फ सब्जियां ही नहीं, सोने, चांदी और डायमंड की ज्वेलरी खरीदना भी महंगा हुआ है।
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यहाँ मिली राहत: अच्छी खबर यह रही कि लहसुन, प्याज, आलू और अरहर की दाल की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई है। लीची प्रेमियों के लिए भी सीजन की शुरुआत राहत भरी रही।
तेल की कीमतों पर टिकी नज़र
मार्केट एक्सपर्ट्स और अर्थशास्त्रियों का मानना है कि महंगाई में यह तेजी मुख्य रूप से खाने-पीने की चीजों तक सीमित है। ICRA की मुख्य अर्थशास्त्री अदिति नायर ने साफ किया कि कुल महंगाई में जो 47 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी हुई है, उसमें से 44 पॉइंट का योगदान अकेले फूड एंड बेवरेज सेगमेंट का है।
वहीं, आनंद राठी ग्रुप के सुजन हाजरा का कहना है कि कच्चे तेल और गैस की कीमतों में हालिया हलचल आने वाले समय में जोखिम पैदा कर सकती है। हालांकि, राहत की बात यह है कि ‘कोर इन्फ्लेशन’ (जिसमें खाना और ईंधन शामिल नहीं होता) अभी भी 3.4% पर स्थिर बना हुआ है।
गाँव बनाम शहर: कहाँ कितनी महंगाई?
दिलचस्प बात यह है कि शहरों के मुकाबले ग्रामीण इलाकों में महंगाई थोड़ी ज्यादा महसूस की गई। ग्रामीण क्षेत्रों में महंगाई दर 3.37% रही, जबकि शहरी इलाकों में यह 3.02% दर्ज की गई।
राज्यों की बात करें तो तेलंगाना 5.02% की दर के साथ देश में सबसे ऊपर रहा, जबकि मिजोरम में महंगाई महज 0.1% के साथ सबसे कम रही।
क्या कहती है RBI की अगली चाल?
अब सबकी नज़रें 6 से 8 अप्रैल को होने वाली RBI की ‘मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी’ (MPC) की बैठक पर टिकी हैं। चूंकि महंगाई अभी भी नियंत्रण में है, इसलिए विशेषज्ञों को उम्मीद है कि मार्केट में लिक्विडिटी बनाए रखने के लिए केंद्रीय बैंक नरम रुख अपना सकता है।



