Property News: ₹20 लाख तक की प्रॉपर्टी खरीदने पर अब PAN कार्ड की जरूरत नहीं! मोदी सरकार का बड़ा फैसला
क्या आप भी घर या जमीन खरीदने की सोच रहे हैं? मोदी सरकार रजिस्ट्री के नियमों में क्रांतिकारी बदलाव करने जा रही है! अब ₹20 लाख तक की प्रॉपर्टी डील में पैन कार्ड का झंझट पूरी तरह खत्म हो सकता है। जानिए कब से लागू होगा यह नियम और कैसे बचेगा आपका कीमती समय और पैसा।
- पैन कार्ड सीमा में बढ़ोतरी (PAN Card Limit Hike)
- ₹20 लाख तक की छूट (Exemption up to ₹20 Lakh)
- रजिस्ट्री प्रक्रिया का सरलीकरण (Simplification of Registration)
- 1 अप्रैल 2026 से संभावित बदलाव (Expected Change from April 1)
नई दिल्ली: अपना घर खरीदने का सपना देख रहे मध्यम वर्ग (Middle Class) के लिए केंद्र की मोदी सरकार एक बड़ी राहत की तैयारी में है। अगर आप 20 लाख रुपये तक की कीमत का कोई फ्लैट, दुकान या जमीन का टुकड़ा खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो अब आपको भारी-भरकम कागजी कार्रवाई (Documentation) से मुक्ति मिलने वाली है। आयकर विभाग (Income Tax Department) के एक नए ड्राफ्ट के अनुसार, अचल संपत्ति के लेन-देन में पैन कार्ड की अनिवार्यता की सीमा को दोगुना किया जा सकता है।
क्या है मौजूदा नियम और क्या होगा बदलाव?
वर्तमान नियमों के तहत, यदि आप 10 लाख रुपये से अधिक मूल्य की कोई भी प्रॉपर्टी खरीदते या बेचते हैं, तो पैन कार्ड (Permanent Account Number) देना अनिवार्य है। लेकिन बढ़ती महंगाई और रियल एस्टेट (Real Estate) की कीमतों में उछाल को देखते हुए सरकार का मानना है कि 10 लाख की यह लिमिट अब पुरानी हो चुकी है। सूत्रों के मुताबिक, विभाग इस सीमा को बढ़ाकर 20 लाख रुपये करने पर विचार कर रहा है। इसका सीधा मतलब यह है कि 20 लाख तक की रजिस्ट्री (Property Registration) अब बिना पैन कार्ड के संभव हो सकेगी।
आम आदमी को कैसे मिलेगा सीधा फायदा?
यह बदलाव विशेष रूप से छोटे शहरों और ग्रामीण इलाकों के उन खरीदारों के लिए ‘गेम चेंजर’ साबित होगा, जिनके पास अक्सर पैन कार्ड नहीं होता या जो छोटे निवेश (Small Investment) करना चाहते हैं।
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कागजी झंझटों से आजादी: तहसील और सब-रजिस्ट्रार ऑफिस में बार-बार पैन की कॉपी और फॉर्म-60 भरने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
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ब्रोकर्स को राहत: प्रॉपर्टी डीलर्स और ब्रोकर्स (Real Estate Agents) के लिए भी सौदा पक्का करना आसान होगा, क्योंकि डॉक्यूमेंटेशन की कमी के कारण अब डील नहीं फंसेगी।
1 अप्रैल 2026 से लागू हो सकती है नई व्यवस्था
माना जा रहा है कि सरकार इस प्रस्ताव को नए वित्त वर्ष (Financial Year) यानी 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी कर सकती है। रियल एस्टेट एक्सपर्ट्स का कहना है कि संपत्तियों की कीमतों में सालाना होने वाली बढ़ोतरी (Appreciation) के कारण 10 लाख की लिमिट बहुत कम थी, जिससे पारदर्शी तरीके से काम करने वाले सामान्य करदाताओं को भी परेशानी होती थी। इस सीमा के बढ़ने से बाजार में नकदी का प्रवाह (Cash Flow) सुधरेगा और छोटे फ्लैट्स की मांग में तेजी आएगी।



