- हरियाणा में जन्म के समय लिंगानुपात 923 दर्ज, छह साल का उच्चतम स्तर।
- 2024 में 910 के न्यूनतम स्तर से 13 अंकों की उल्लेखनीय बढ़त।
- स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट बताती है—‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ नीति के असर स्पष्ट।
- 31 दिसंबर तक यह आँकड़ा रिकॉर्ड स्तर पर पहुँचने की उम्मीद।
Haryana News: हरियाणा ने एक बार फिर साबित किया है कि सामाजिक सोच में बदलाव आने लगा है। साल 2025 के अंत तक राज्य ने जन्म के समय लिंगानुपात (Gender Ratio at Birth) में वह सुधार दिखाया है जिसकी झलक पिछले कई वर्षों से गायब थी।
स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, 30 दिसंबर 2025 तक जन्म के समय लिंगानुपात 923 दर्ज किया गया है। यानी हर हजार लड़कों पर 923 लड़कियों का जन्म हुआ। यह पिछले साल 910 से सीधा 13 अंकों की बढ़त है जो पिछले छह वर्षों का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन है।
सरकारी सूत्रों का कहना है कि 31 दिसंबर तक यह आँकड़ा और ऊपर जा सकता है। अगर ऐसा होता है तो यह हरियाणा के इतिहास का अब तक का सबसे ऊंचा जन्म लिंगानुपात (Highest Gender Ratio at Birth) होगा जो अब तक 2019 में दर्ज 923 का रिकॉर्ड था।
साल 2024 में हरियाणा का लिंगानुपात आठ साल में सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया था। तब प्रति हजार लड़कों पर सिर्फ 910 लड़कियाँ जन्म ले रही थीं। यह गिरावट 2020 से शुरू हुई थी जब आंकड़ा 922 था। 2021 में यह 914 हुआ, 2022 में 917, और 2023 में 916 पर टिका रहा।
इन वर्षों की गिरावट ने सरकार को सोचने पर मजबूर किया। स्वास्थ्य विभाग और महिला एवं बाल विकास विभाग ने मिलकर जिलास्तरीय निगरानी (Monitoring) और जागरूकता अभियान तेज किए।
राज्य में ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ (Save the Daughter, Educate the Daughter) अभियान की शुरुआती धार फिर लौटती दिख रही है।
अधिकारियों का कहना है कि सामाजिक अभियानों, प्री-कंसेप्शन एंड प्री-नेटल डायग्नोस्टिक टेक्निक्स (PCPNDT) एक्ट की सख्त निगरानी और ग्रामीण स्तर पर संवेदनशील संवाद (Community Dialogue) ने सकारात्मक असर किया है।
पंचायतों और स्वास्थ्य कर्मियों की संयुक्त भूमिका से अब कई जिलों में जन्म रजिस्ट्रेशन (Birth Registration) में पारदर्शिता बढ़ी है।
हरियाणा के कई हिस्सों में अब बेटियों के जन्म पर उत्सव जैसी परंपरा दोबारा लौट रही है। यह बदलाव केवल सरकारी नीतियों का असर नहीं बल्कि समाज के रुख में आई नई समझ का संकेत है।
विशेषज्ञों का मानना है कि राज्य का यह सुधार लंबी सामाजिक जंग में बड़ी उम्मीद लेकर आया है। आने वाले समय में अगर यह गति बनी रही तो हरियाणा न केवल पुराने आंकड़े तोड़ेगा बल्कि देश के लिए एक नजीर (Example) भी पेश करेगा।
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