Pakistan-Afghanistan War: काबुल और कंधार पर पाकिस्तान की भारी बमबारी, तालिबान ने दी 'ओपन वार' की चेतावनी
पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच तनाव युद्ध में तब्दील हो गया है। पाकिस्तानी एयरस्ट्राइक के बाद तालिबान ने जवाबी ड्रोन हमले किए हैं। अमेरिका ने पाकिस्तान का समर्थन किया है, जबकि UN ने शांति की अपील की है। जानिए क्या है पूरा विवाद।
इस्लामाबाद/काबुल: दक्षिण एशिया (South Asia) के दो पड़ोसी मुल्क, जो कभी एक-दूसरे के हमदर्द हुआ करते थे, अब बारूद की भाषा बोल रहे हैं। पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच तनाव अब 'कोल्ड वॉर' की सीमाओं को लांघकर 'ओपन वार' (Open War) यानी सीधे युद्ध में बदल चुका है।
शुक्रवार को पाकिस्तानी वायुसेना के लड़ाकू विमानों ने अफगानिस्तान की राजधानी काबुल और तालिबान के गढ़ कंधार सहित कई शहरों पर भीषण बमबारी की। इस हमले ने न केवल तालिबान की सत्ता को चुनौती दी है, बल्कि पूरे क्षेत्र में अस्थिरता का खतरा पैदा कर दिया है।
सर्जिकल स्ट्राइक या सीधे युद्ध का ऐलान?
पाकिस्तान का दावा है कि यह हमला उन आतंकी ठिकानों (Terrorist Hideouts) पर किया गया है, जहाँ से तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) के लड़ाके इस्लामाबाद सरकार को अस्थिर करने की साजिश रच रहे थे। हालांकि, तालिबान के प्रवक्ता ज़बीहुल्लाह मुजाहिद ने इसे संप्रभुता का उल्लंघन बताते हुए कहा कि इसमें निर्दोष नागरिक हताहत हुए हैं।
यह टकराव तब और बढ़ गया जब तालिबान ने जवाबी कार्रवाई (Retaliatory Action) करते हुए पाकिस्तानी सैन्य चौकियों पर ड्रोन हमले किए।
पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ के कड़े शब्दों ने आग में घी डालने का काम किया है। उन्होंने स्पष्ट कहा, "हमारे सब्र का बांध टूट चुका है, अब यह हमारे और तुम्हारे बीच खुला युद्ध है।"
तालिबान का 'शांति' कार्ड और वैश्विक चिंता
हैरानी की बात यह है कि एक तरफ सीमा पर तोपें गरज रही हैं, वहीं दूसरी तरफ तालिबान अब बातचीत (Negotiations) की मेज पर आने की इच्छा जता रहा है।
मुजाहिद ने कहा कि वे मुद्दों को कूटनीति (Diplomacy) से सुलझाना चाहते हैं। लेकिन विशेषज्ञ इसे तालिबान की 'गुरिल्ला रणनीति' (Guerrilla Tactics) का हिस्सा मान रहे हैं, क्योंकि वे जानते हैं कि पाकिस्तान एक परमाणु शक्ति संपन्न देश है।
संयुक्त राष्ट्र (UN) प्रमुख एंटोनियो गुटेरेस ने इस पर गहरी चिंता जताई है। वहीं, अमेरिका ने खुलकर पाकिस्तान के 'आत्मरक्षा के अधिकार' का समर्थन किया है। अमेरिका का कहना है कि तालिबान अपने आतंकवाद विरोधी वादों (Counterterrorism Commitments) को निभाने में पूरी तरह विफल रहा है।
मानवीय संकट का गहराता साया
युद्ध की इस आहट के बीच सबसे ज्यादा पीस रही है वहां की जनता। अफगानिस्तान की लगभग आधी आबादी पहले से ही मानवीय सहायता (Humanitarian Aid) पर निर्भर है। अगर यह संघर्ष लंबा खिंचता है, तो यह इलाका एक बड़े मानवीय शरणार्थी संकट (Refugee Crisis) की ओर बढ़ सकता है।
कतर और तुर्की जैसे देश एक बार फिर मध्यस्थता (Mediation) की कोशिशों में जुट गए हैं, लेकिन फिलहाल शांति दूर की कौड़ी नजर आ रही है।