Haryana LPG Shortage: हरियाणा में गैस किल्लत पर सरकार का बड़ा एक्शन, शादियों और अस्पतालों के लिए बदले नियम; अब DC संभालेंगे कमान
हरियाणा में एलपीजी की किल्लत को देखते हुए प्रदेश की सरकार ने मोर्चा संभाल लिया है। अब DC की अध्यक्षता वाली कमेटी तय करेगी कि किसे पहले सिलेंडर मिलेगा। शादियों और अस्पतालों को प्राथमिकता दी गई है ताकि जरूरी काम न रुकें। जानिए पूरी खबर -
Haryana News: हरियाणा में रसोई गैस की किल्लत अब आम जनता के चूल्हे तक न पहुंचे इसके लिए सरकार ने इमरजेंसी मोड में काम शुरू कर दिया है। शनिवार को खाद्य, नागरिक आपूर्ति और उपभोक्ता विभाग ने एक हाई-लेवल मीटिंग के बाद कड़े निर्देश जारी किए हैं।
जानकारी के अनुसार राज्य में सिलेंडर की बढ़ती
सरकार ने दो टूक शब्दों में कह दिया है कि सिलेंडर कम भले ही हों लेकिन अस्पतालों, स्कूलों और कॉलेजों जैसी जगहों पर सप्लाई की एक बूंद की भी कमी नहीं होनी चाहिए। विभाग का मानना है कि इन जगहों पर गैस की कमी का मतलब है सीधे तौर पर आम जनजीवन और स्वास्थ्य सेवाओं का पटरी से उतर जाना। इसी को ध्यान में रखते हुए हर जिले में एक स्पेशल कमेटी बनाई गई है जिसके बॉस खुद उपायुक्त (DC) होंगे।
शादी वाले घरों को नहीं होगी टेंशन, खास तौर पर बेटियों की शादी
आपको बता दें की खबर सिर्फ पाबंदियों की नहीं बल्कि राहत की भी है। शादी-ब्याह के इस सीजन में सरकार ने मानवीय रुख अपनाया है। आदेश में स्पष्ट कहा गया है कि जिन घरों में शादियां हैं उन्हें सिलेंडर के लिए भटकना नहीं पड़ेगा।
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खासकर उन परिवारों को टॉप प्रायोरिटी दी जाएगी जहाँ बेटी की शादी है। सरकार का मकसद है कि खुशी के इन मौकों पर गैस की किल्लत की वजह से कोई फीकापन न आए और शादी के सभी काम आसानी से पुरे हो सके।
कैसे काम करेगी नई कमेटी?
आपको बता दें की यह कोई कागजी कमेटी नहीं होगी। इसमें पुलिस अधीक्षक (SP), सीएमओ (CMO) और जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) को बतौर सदस्य जोड़ा गया है। वहीं जिला खाद्य एवं आपूर्ति नियंत्रक (DFSC) इसके सचिव होंगे।
डेली रिपोर्टिंग कर्णींहोगी और DFSC को रोजाना तेल कंपनियों की सप्लाई चेक करनी होगी। हर जिले में कम से कम 20 प्रतिशत गैस का रिजर्व स्टॉक रखना अनिवार्य कर दिया गया है। इसके साथ ही कमेटी हर रोज कॉमर्शियल और घरेलू गैस की उपलब्धता की समीक्षा करेगी ताकि कालाबाजारी पर भी लगाम कसी जा सके।
कुल मिलाकर हरियाणा सरकार ने उन लोगों को सख्त संदेश दे दिया है जो इस किल्लत का फायदा उठाकर मुनाफाखोरी की ताक में थे। अब देखना यह है कि जमीनी स्तर पर ये आदेश कितनी जल्दी आम आदमी को राहत पहुँचाते हैं।



