Kosli Bypass News: क्या बढ़ेगा जमीन का मुआवजा? 11 साल बाद जगी कोसली बाईपास निर्माण की उम्मीद
कोसली बाईपास के लिए 11 साल का इंतजार खत्म हो सकता है। हरियाणा सरकार ने संकेत दिए हैं कि वह 24 एकड़ जमीन के लिए मुआवजे की राशि बढ़ा सकती है। विधायक अनिल यादव ने सदन में किसानों की मांग और सर्कल रेट का मुद्दा प्रभावी ढंग से उठाया।
चंडीगढ़/रेवाड़ी: हरियाणा विधानसभा के गलियारों में एक बार फिर कोसली की लाइफलाइन (Lifeline) कहे जाने वाले बाईपास का मुद्दा गूंजा। पिछले एक दशक से भी ज्यादा समय से फाइलों में दबे इस प्रोजेक्ट को लेकर अब एक नई उम्मीद जागी है। कोसली विधायक अनिल यादव ढहीना की सक्रियता और पीडब्ल्यूडी मंत्री रणबीर सिंह गंगवा के सकारात्मक रुख ने संकेत दिए हैं कि सरकार अब किसानों की 'नब्ज' टटोलकर मुआवजे की राशि बढ़ाने को तैयार है।
बाधा जमीन की नहीं, 'भाव' की है
ग्राउंड रिपोर्ट (Ground Report) यह है कि सरकार को इस बाईपास के लिए करीब 24 एकड़ जमीन की दरकार है। ई-भूमि पोर्टल (e-Bhoomi Portal) पर जमीन जुटाने की कोशिशें जारी हैं, लेकिन पेंच 60 लाख रुपये प्रति एकड़ के मुआवजे पर फंसा है।
विधायक अनिल यादव ने सदन में तर्क दिया कि जब धनिया गांव में सर्कल रेट (Circle Rate) ही 40 लाख और शहादतपुर में लगभग 48 लाख रुपये है, तो किसान अपनी उपजाऊ जमीन महज 60 लाख में क्यों देंगे?
यह सिर्फ एक सड़क का निर्माण नहीं है, बल्कि कोसली की अर्थव्यवस्था और रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़ा सवाल है। 11 साल पहले हुई घोषणा आज भी कागजों से बाहर निकलने के लिए छटपटा रही है। शहर के भीतर रेंगता ट्रैफिक और हर रोज लगने वाला जाम (Traffic Congestion) स्थानीय व्यापारियों और आम जनता के लिए सिरदर्द बन चुका है।
सरकार का 'बॉल' अब विधायक के पाले में
दिलचस्प मोड़ तब आया जब कैबिनेट मंत्री रणबीर सिंह गंगवा ने विधायक को ही जिम्मेदारी सौंपते हुए कहा कि वे किसानों के साथ बैठकर बीच का रास्ता निकालें। सरकार ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि यदि किसान एक निश्चित राशि पर सहमत होते हैं तो मुआवजा राशि (Compensation Amount) बढ़ाने पर गंभीरता से विचार किया जाएगा।
इस चर्चा में झज्जर विधायक गीता भुक्कल ने भी सुर मिलाते हुए छुछकवास बाईपास का उदाहरण दिया, जिससे यह साफ है कि पूरे अहीरवाल और आसपास के बेल्ट में भूमि अधिग्रहण (Land Acquisition) के लिए मुआवजे की नीति में बदलाव की मांग जोर पकड़ रही है।