मोनू मानेसर को बड़ी राहत: नासिर-जुनैद केस में हाईकोर्ट ने दी जमानत, क्या अब जेल से बाहर आएगा गौरक्षक?
नासिर-जुनैद हत्याकांड मामले में फंसे मोनू मानेसर को राजस्थान हाईकोर्ट ने जमानत दे दी है। ढाई साल के लंबे इंतजार और कानूनी लड़ाई के बाद मिली इस राहत ने हरियाणा की सियासत और जमीनी हलचल को फिर से तेज कर दिया है। क्या मोनू अब जेल से बाहर आएगा? जानिए पूरी कानूनी प्रक्रिया और मामले की गहराई।
जयपुर/गुड़गांव: हरियाणा के चर्चित गौरक्षक मोहित यादव उर्फ मोनू मानेसर के लिए कानूनी मोर्चे पर एक बड़ी और सुखद खबर सामने आई है। राजस्थान हाईकोर्ट (Rajasthan High Court) ने नासिर-जुनैद हत्याकांड मामले में मोनू मानेसर की जमानत याचिका (Bail Plea) स्वीकार कर ली है।
लंबे समय से सलाखों के पीछे बंद मोनू के लिए यह फैसला एक बड़ी संजीवनी माना जा रहा है हालांकि तकनीकी कारणों से उसे जेल की दहलीज से बाहर आने में अभी थोड़ा वक्त और लग सकता है।
एडवोकेट कुलभूषण भारद्वाज के अनुसार मोनू के खिलाफ चल रहे विभिन्न मामलों में यह सबसे महत्वपूर्ण मोड़ है। ज्ञात हो कि अगस्त 2023 में गुरुग्राम पुलिस ने उसे पटौदी फायरिंग और नूंह दंगों से जुड़ी कथित भड़काऊ पोस्ट (Provocative Posts) के मामले में हिरासत में लिया था।
गुरुग्राम की स्थानीय अदालतों से राहत मिलने के बाद राजस्थान पुलिस ने उसे नासिर-जुनैद हत्याकांड में मुख्य आरोपी (Main Accused) बताते हुए ट्रांजिट रिमांड पर लिया था। तभी से वह राजस्थान की जेल में न्यायिक हिरासत (Judicial Custody) काट रहा है।
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मोनू मानेसर का नाम केवल विवादों से नहीं बल्कि एक दशक लंबे काऊ प्रोटेक्शन (Cow Protection) अभियान से भी जुड़ा है। उसके समर्थकों का दावा है कि उसने हजारों गायों को तस्करों के चंगुल से मुक्त कराया है।
हालांकि नूंह में ब्रजमंडल यात्रा के दौरान हुई हिंसा और उसके बाद भड़की सांप्रदायिक चिंगारी ने उसे सुर्खियों के केंद्र (Center of limelight) में ला खड़ा किया। पुलिस रिकॉर्ड में जहां उस पर दंगा भड़काने और हत्या जैसे गंभीर आरोप लगे वहीं उसके परिवार का मानना है कि उसे गौरक्षा की मुहिम के कारण निशाना बनाया गया।
करीब ढाई साल के लंबे अंतराल के बाद जमानत मिलने की खबर से मोनू के पैतृक गांव और परिवार में जश्न जैसा माहौल है। परिजनों का कहना है कि सत्य की जीत हुई है। फिलहाल कोर्ट द्वारा निर्धारित बेल बॉन्ड (Bail Bond) भरने की प्रक्रिया जारी है।
जैसे ही कागजी औपचारिकताएं (Legal Formalities) पूरी होंगी मोनू मानेसर की रिहाई का रास्ता साफ हो जाएगा। इस फैसले के बाद क्षेत्र में सुरक्षा और कानून व्यवस्था (Law and Order) पर भी प्रशासन की पैनी नजर बनी हुई है।



