Haryana News: पानीपत की गलियों और चौराहों पर जहर घोलने वालों के खिलाफ कानून ने एक बार फिर अपनी सख्ती दिखाई है। नशे की तस्करी के खिलाफ चल रही जंग में अदालत का एक बड़ा फैसला सामने आया है, जिसने समाज में अवैध धंधा करने वालों को कड़ा संदेश दिया है।
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश एवं विशेष न्यायाधीश (NDPS) की अदालत ने अफीम की तस्करी के मामले में दोषी नानूराम को उम्र के इस पड़ाव पर जेल की चारदीवारी के पीछे भेज दिया है।
अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए दोषी को 10 साल के कठोर कारावास और एक लाख रुपये जुर्माने की सजा मुकर्रर की है।
इस पूरे मामले की जड़ें करीब साल भर पहले से जुड़ी हैं। तारीख थी 9 मई 2023, जब पानीपत की एंटी-नारकोटिक्स सेल की टीम गोहाना रोड पर ड्रेन नंबर 2 के पास अपनी रुटीन गश्त पर थी।
उस दिन पुलिस के पास एक पुख्ता इनपुट था कि शहर की फिजा में नशा घोलने की तैयारी हो रही है। मुखबिर की सूचना सटीक निकली और पुलिस ने घेराबंदी कर सिवाह गांव के रहने वाले नानूराम को धर दबोचा।
जब ड्यूटी मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में कानून के दायरे में रहकर नानूराम की तलाशी ली गई, तो उसके पास से 800 ग्राम अफीम बरामद हुई। पुलिस के सामने वह न तो कोई सफाई दे पाया और न ही कोई वैध दस्तावेज दिखा सका।
उस एक पल की गलती ने उसके जीवन की दिशा बदल दी और थाना ओल्ड इंडस्ट्रियल में एनडीपीएस एक्ट की धारा 18 के तहत मामला दर्ज कर लिया गया।
अदालत में सुनवाई के दौरान माहौल काफी गंभीर रहा। अभियोजन पक्ष ने एक-एक कर कड़ी से कड़ी जोड़ी और अदालत के सामने ठोस सबूतों का अंबार लगा दिया। गवाहों की गवाही और बरामदगी की प्रक्रिया ने नानूराम के बचने के सारे रास्ते बंद कर दिए।
फैसला सुनाते समय न्यायाधीश ने समाज में फैलते नशे के जाल पर गहरी चिंता व्यक्त की। कोर्ट ने माना कि नशे की यह लत न केवल युवा पीढ़ी को खोखला कर रही है बल्कि कई परिवारों को भी तबाह कर रही है। ऐसे में तस्करों के प्रति किसी भी तरह की नरमी बरतना न्यायसंगत नहीं होगा।
कोर्ट ने साफ कर दिया कि अगर दोषी एक लाख रुपये का जुर्माना नहीं भरता है, तो उसे एक साल की अतिरिक्त कैद काटनी होगी।
यह फैसला पानीपत पुलिस और एंटी-नारकोटिक्स सेल के उन जवानों की मेहनत पर भी मुहर है, जो दिन-रात शहर को नशा मुक्त बनाने की कोशिश में जुटे हैं।

