रेवाड़ी। माजरा में निर्माणाधीन अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) परिसर को आगामी दिनों में चौबीसों घंटे बिना किसी कट के निर्बाध बिजली आपूर्ति मिलेगी। दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम (DHBVN) ने एम्स परिसर को विशेष बिजली कनेक्टिविटी देने के लिए करीब 16 करोड़ रुपये की लागत वाले इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट का काम लगभग पूरा कर लिया है। संस्थान में इस सत्र से शुरू होने जा रही मेडिकल की पढ़ाई और आगामी ओपीडी सेवाओं को देखते हुए बिजली निगम ने इसे अपनी प्राथमिकता सूची में रखकर काम किया है।
दो अलग-अलग सब-स्टेशनों से जोड़े गए 8100 किलोवाट के फीडर
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के अधिकारियों से मिली जानकारी के अनुसार, एम्स जैसे बड़े चिकित्सा संस्थान में संवेदनशील जीवन रक्षक उपकरणों के संचालन के लिए यह ग्रिड लाइन तैयार की गई है। इसके लिए 8,100 किलोवाट क्षमता के दो डेडिकेटेड (विशेष) फीडर बनाए गए हैं, जो एम्स परिसर को सीधे पाली गोठड़ा और बुरोली सब-स्टेशन से जोड़ेंगे। दो अलग सब-स्टेशनों से लाइन जोड़ने का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि यदि किसी तकनीकी खराबी के कारण एक ग्रिड फेल भी होता है, तो दूसरे ग्रिड से तत्काल बिजली आपूर्ति बहाल रखी जा सकेगी।
इमरजेंसी और आईसीयू के लिए जरूरी थी ग्रिड व्यवस्था
एम्स संघर्ष समिति और स्थानीय प्रशासन ने भी बिजली के काम की रफ्तार पर संतोष जताया है। डॉक्टरों के मुताबिक, आधुनिक अस्पतालों में वेंटिलेटर, आईसीयू, ऑपरेशन थिएटर (OT) और एडवांस सीटी स्कैन व एमआरआई मशीनों के लिए बिना रुकावट के बिजली मिलना बेहद जरूरी होता है। सामान्य बिजली कटों के दौरान बड़े जनरेटरों पर निर्भरता रहती है, जिससे भारी खर्च होने के साथ ही तकनीकी खराबी का खतरा भी बना रहता है। अब इस नई व्यवस्था से एम्स पूरी तरह आत्मनिर्भर हो जाएगा और मरीजों को हाई-टेक स्वास्थ्य सेवाओं में कोई बाधा नहीं आएगी।