स्पीकर बिरला पर विपक्ष का नरम रुख: तारीफ के बीच माइक बंदी और लोकतंत्र बचाओ की पुकार!

लोकसभा में स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव की चर्चा में विपक्ष ने उनका सम्मान किया, लेकिन माइक बंद करने और बोलने न देने की शिकायतें कीं। टीएमसी, कांग्रेस, सपा, आरजेडी सांसदों ने सरकार को निशाना बनाया। लोकतंत्र की गरिमा पर जोर दिया गया। जानिए क्या क्या हुआ -

नई दिल्ली। लोकसभा स्पीकर (Speaker) ओम बिरला के खिलाफ लाया गया अविश्वास प्रस्ताव (No Confidence Motion) बुधवार को चर्चा में पहुंचा। विपक्ष भले ही आक्रामक नोटिस लेकर आया था, लेकिन बहस के दौरान उनका स्वर पूरी तरह बदल गया। सांसदों ने स्पीकर की खुली तारीफ की।

कहा गया, बिरला से कोई व्यक्तिगत शिकायत नहीं। दिक्कत सिर्फ इतनी कि विपक्ष को बोलने का मौका ही नहीं मिलता। यह नजारा संसद की लंबी परंपरा को झकझोर गया।

​टीएमसी सांसद की भावुक अपील

टीएमसी की सयानी घोष ने सदन में कहा, संसद में लोकतंत्र (Democracy) की सांसें कम हो रही हैं। विपक्षी सदस्यों की आवाज दबाई जा रही है। हमें अपने अधिकारों के लिए लड़ना पड़ रहा।

उन्होंने जोर देकर कहा, ओम बिरला से कोई निजी दुश्मनी नहीं। समस्या यह है कि सरकार के खिलाफ बोलने पर माइक बंद। घोष ने चेतावनी दी, संसद को पार्टी कार्यालय मत बनाइए। बंगाल का एसआईआर (SIR), फंड रोकने जैसे मुद्दे भी उठाए। उनकी आवाज में गुस्सा कम, चिंता ज्यादा झलक रही थी।

​कांग्रेस का सरकार पर हमला

कांग्रेस के केसी वेणुगोपाल ने अमेरिका द्वारा भारत को ब्लैकलिस्ट (Blacklist) करने का आरोप लगाया। बालाकोट घटना पर सरकार के रवैये को घेरा। लोकतंत्र की गरिमा बचाने की जिम्मेदारी स्पीकर और सरकार की बताई।

​चरणजीत सिंह चन्नी ने शिकायत की, विपक्षी नेता का माइक बार-बार बंद हो जाता है। चेयर हमेशा सरकार की सुनती है। उन्होंने अपना निजी दर्द भी बयां किया। दो साल से घर नहीं मिला। एक दिया भी टूटा हुआ था। यह सुनकर सदन में सन्नाटा छा गया।

सपा-आरजेडी की मांगें

सपा के आनंद भदौरिया ने कहा, यह प्रस्ताव स्पीकर की गरिमा बचाने के लिए लाए हैं। ओम बिरला की तारीफ की। लेकिन लोकसभा उपाध्यक्ष (Deputy Speaker) का चुनाव सात साल से लटका है। तुरंत कराने की मांग की। ​

आरजेडी के अभय कुमार सिन्हा ने सदन को सत्ताधारी पार्टी की तानाशाही बताया। विपक्ष खड़ा होता है तो ‘नो-नो’ ही सुनाई देता। जेएमएम के विजय कुमार हंसदक ने तुलना की, नेहरू के बाद सदन में सबसे ज्यादा बोला जाने वाला शब्द ‘नहीं’ है। यह टिप्पणी सदन में हंगामा मचा गई।

लोकतंत्र पर सवाल, आगे क्या?

विपक्ष ने साफ कहा, शिकायत स्पीकर से नहीं, व्यवस्था से। सरकार को निशाना बनाते हुए लोकतंत्र बचाने की पुकार की। चर्चा ने संसद की दीवारों को कंपा दिया। क्या यह बदलाव लाएगा? वक्त ही बताएगा।

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Saloni Yadav

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