इटली ने अमेरिका-इजरायल के खिलाफ खोला मोर्चा, ईरान पर हमले को बताया अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन
मिडिल ईस्ट में तनाव के बीच इटली ने अमेरिका और इजरायल के खिलाफ सख्त स्टैंड लिया है। रक्षा मंत्री गुइडो क्रोसेटो ने ईरान पर हुए हमलों को अवैध बताते हुए कहा कि सहयोगियों को बिना बताए युद्ध शुरू करना पूरी दुनिया को खतरे में डालना है। जानिए आखिर क्यों भड़का है इटली और इसके वैश्विक परिणाम क्या होंगे।
International News Update: पश्चिम एशिया (Middle East) में जारी बारूदी तनाव के बीच एक बड़े कूटनीतिक उलटफेर की खबर सामने आई है। अब तक इजरायल और अमेरिका के सुर में सुर मिलाने वाले यूरोपीय देशों में दरार दिखने लगी है। इटली के रक्षा मंत्री गुइडो क्रोसेटो (Guido Crosetto) ने पिछले सप्ताहांत ईरान पर किए गए अमेरिका-इजरायल के हमलों की तीखी आलोचना करते हुए इसे अंतरराष्ट्रीय कानून का स्पष्ट उल्लंघन (Breach of international law) करार दिया है।
यह बयान इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इटली की वर्तमान दक्षिणपंथी सरकार ने पिछले साल सत्ता में आने के बाद से अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ बेहद करीबी रिश्ते बनाने की कोशिश की है। लेकिन युद्ध के इस नए मोर्चे ने रोम और वॉशिंगटन के बीच के समीकरण बदल दिए हैं।
बिना बताए छिड़ी जंग: इटली की नाराजगी
संसद के निचले सदन को संबोधित करते हुए क्रोसेटो ने दो टूक शब्दों में कहा कि यह हमला किसी भी वैश्विक नियम के दायरे में नहीं था। उन्होंने गहरी नाराजगी जताते हुए कहा कि अमेरिका और इजरायल ने अपने सहयोगियों (Allies) और साझेदारों को भरोसे में लिए बिना यह हमला शुरू कर दिया।
रक्षा मंत्री ने कहा, “यह एक ऐसा युद्ध है जो दुनिया में किसी को बताए बिना शुरू कर दिया गया। अब हम और पूरी दुनिया इसके गंभीर परिणामों (Consequences) को भुगतने और मैनेज करने के लिए मजबूर हैं।” इटली का यह रुख साफ करता है कि वह वॉशिंगटन की एकतरफा कार्रवाई की रणनीति से अब सहज नहीं है।
कूटनीतिक और सैन्य संतुलन की चुनौती
हालांकि इटली ने हमलों की निंदा की है, लेकिन वह क्षेत्र में अस्थिरता को रोकने के लिए अपनी सैन्य जिम्मेदारी से पीछे नहीं हट रहा है। ईरान की संभावित जवाबी कार्रवाई (Retaliatory strikes) को देखते हुए इटली ने खाड़ी देशों को एयर डिफेंस सिस्टम और साइप्रस में नौसैनिक संपत्तियां भेजने का फैसला किया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इटली का यह बयान यूरोप के भीतर पनप रहे उस डर को दर्शाता है, जिसमें माना जा रहा है कि अमेरिका की आक्रामक नीतियां पूरे क्षेत्र को एक ऐसी आग में झोंक सकती हैं, जिसे बुझाना नामुमकिन होगा। यह केवल एक सैन्य हमला नहीं, बल्कि वैश्विक कूटनीति (Global diplomacy) की मर्यादाओं का उल्लंघन है।



