PM Modi-Iran President Call: पश्चिम एशिया में छिड़ेगा महायुद्ध? पीएम मोदी ने ईरानी राष्ट्रपति से की बात, सप्लाई चेन और सुरक्षा पर दी बड़ी चेतावनी

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच पीएम मोदी और ईरान के राष्ट्रपति पेजेश्कियान के बीच हाई-लेवल बातचीत हुई है। मोदी ने समुद्री व्यापारिक रास्तों की सुरक्षा और ग्लोबल सप्लाई चेन को लेकर बड़ी चिंता जताई है। जानिए क्या भारत बनेगा ईरान और अमेरिका के बीच शांति का दूत? पूरी रिपोर्ट यहाँ पढ़ें।

  • ईरान-भारत के बीच 10 दिन में दूसरी वार्ता
  • समुद्री व्यापार मार्ग (Shipping Lanes) पर जोर
  • क्षेत्रीय बुनियादी ढांचों पर हमलों की निंदा
  • ग्लोबल सप्लाई चेन बचाने की अपील

नई दिल्ली/तेहरान: पश्चिम एशिया (West Asia) में गहराते तनाव और युद्ध की आहट के बीच भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक बार फिर कूटनीतिक कमान संभाली है। शनिवार को पीएम मोदी ने ईरान के राष्ट्रपति डॉ. मसूद पेजेश्कियान के साथ टेलीफोन पर लंबी बातचीत की। 10 दिनों के भीतर दोनों शीर्ष नेताओं के बीच यह दूसरी बड़ी वार्ता है, जो साफ संकेत दे रही है कि वैश्विक सुरक्षा और समुद्री व्यापार को लेकर भारत कितना गंभीर है।

ईद और नौरोज़ की बधाई के साथ ‘शांति’ का संदेश

बातचीत की शुरुआत सौहार्दपूर्ण रही, जहाँ पीएम मोदी ने राष्ट्रपति पेजेश्कियान को ईद और नौरोज़ की शुभकामनाएं दीं। पीएम ने इस उम्मीद के साथ अपनी बात रखी कि यह त्योहारों का मौसम पश्चिम एशिया में सुख, समृद्धि और सबसे महत्वपूर्ण—स्थिरता लेकर आए।

हालांकि शुभकामनाओं के साथ ही पीएम मोदी ने क्षेत्र में बुनियादी ढांचों (Critical Infrastructure) पर हो रहे हमलों की कड़े शब्दों में निंदा की। उन्होंने साफ किया कि इस तरह के हमले न केवल क्षेत्रीय शांति के लिए खतरा हैं, बल्कि वैश्विक सप्लाई चेन की कमर तोड़ने वाले भी हैं।

‘समुद्री रास्तों’ की सुरक्षा: भारत की सबसे बड़ी चिंता

मौजूदा संघर्ष के बीच भारत की सबसे बड़ी चिंता समुद्री व्यापार मार्गों (Shipping Lanes) को लेकर है। पीएम मोदी ने ‘फ्रीडम ऑफ नेविगेशन’ यानी नौवहन की स्वतंत्रता को सुरक्षित रखने की आवश्यकता पर जोर दिया। लाल सागर और आसपास के क्षेत्रों में जहाजों पर हो रहे हमले सीधे तौर पर भारत की अर्थव्यवस्था और ऊर्जा सुरक्षा को प्रभावित कर रहे हैं।

पीएम ने दोहराया कि व्यापारिक जहाजों के लिए रास्ते खुले और सुरक्षित रहना अनिवार्य है। इसके साथ ही, उन्होंने ईरान में रह रहे भारतीय नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ईरानी सरकार के सहयोग की सराहना भी की।

कूटनीति की बिसात: क्या भारत बनेगा ‘पीस मेकर’?

हाल ही में फिनलैंड के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर स्टब ने सुझाव दिया था कि भारत, अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम करने में बड़ी भूमिका निभा सकता है। पीएम मोदी और राष्ट्रपति पेजेश्कियान के बीच 12 मार्च की बातचीत का हवाला देते हुए विशेषज्ञों का मानना है कि भारत ‘संवाद और कूटनीति’ (Dialogue and Diplomacy) के जरिए समाधान निकालने के अपने रुख पर अडिग है। 28 फरवरी से शुरू हुए इस ताजा संघर्ष के बाद से विदेश मंत्री एस. जयशंकर भी लगातार ईरानी विदेश मंत्री के संपर्क में हैं।

चूंकि भारत इस समय ‘ब्रिक्स’ (BRICS) की अध्यक्षता कर रहा है और ईरान इसका एक महत्वपूर्ण सदस्य है, ऐसे में दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय सहयोग और समुद्री सुरक्षा पर यह चर्चा वैश्विक राजनीति में एक बड़ा मोड़ साबित हो सकती है।

News End

Click here to read more news in this category: International

Saloni Yadav

Saloni Yadav (Journalist): There is an experienced journalist who has covered many different topics in his 10-year career. He has worked with many large publications and is now offering his services on NFL Spice. Saloni Yadav always shares information based on authentic sources and his experience and gives right and reliable advice to readers. Contact Email: saloniyadav@nflspice.com Website: nflspice.com
फीडबैक या शिकायत के लिए: newsdesk@nflspice.com

Related Stories