Reliance Anil Ambani Group ED Action: 13 राज्यों में 581 करोड़ की संपत्ति कुर्क, ₹16310 करोड़ पहुंची कुल जब्ती
प्रवर्तन निदेशालय ने अनिल अंबानी ग्रुप की 581.65 करोड़ रुपये की संपत्तियां कुर्क की हैं। 13 राज्यों में फैली इन संपत्तियों के साथ ही ग्रुप पर अब तक की कुल कुर्की 16,310 करोड़ रुपये हो गई है। जांच में शेल कंपनियों के जरिए फंड डायवर्जन का खुलासा हुआ है।
नई दिल्ली/मुंबई: प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने उद्योगपति अनिल अंबानी के नेतृत्व वाले रिलायंस ग्रुप के खिलाफ अपनी घेराबंदी और सख्त कर दी है। जांच एजेंसी ने एक बड़े ऑपरेशन के तहत रिलायंस होम फाइनेंस लिमिटेड (RHFL) और रिलायंस कमर्शियल फाइनेंस लिमिटेड (RCFL) से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में देशभर के 13 राज्यों में फैली 581.65 करोड़ रुपये की अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क (Attach) कर लिया है।
इस ताजा कार्रवाई के साथ ही अनिल अंबानी ग्रुप की अब तक कुर्क की गई कुल संपत्ति का आंकड़ा चौंकाने वाले 16,310 करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच गया है। ईडी की यह कार्रवाई हाल ही में रिलायंस पावर लिमिटेड के ठिकानों पर की गई छापेमारी के बाद सामने आई है।
शेल कंपनियों का जाल और 11,000 करोड़ का एनपीए
जांच में खुलासा हुआ है कि ग्रुप ने रिलायंस होम फाइनेंस और रिलायंस कमर्शियल फाइनेंस के जरिए विभिन्न बैंकों और वित्तीय संस्थानों से भारी मात्रा में पब्लिक फंड जुटाया था। नियम ताक पर रखकर लिए गए इस फंड का एक बड़ा हिस्सा, यानी करीब 11,000 करोड़ रुपये से अधिक की राशि ‘नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स’ (NPA) में तब्दील हो गई।
जांच एजेंसी के अनुसार इस पैसे को सीधे तौर पर व्यवसाय में लगाने के बजाय रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर, रिलायंस पावर और रिलायंस कम्युनिकेशंस जैसी ग्रुप की अन्य कंपनियों में डायवर्ट कर दिया गया। इस हेराफेरी के लिए बड़ी संख्या में ऐसी शेल (फर्जी) कंपनियों का इस्तेमाल किया गया जिनका न तो कोई वास्तविक बिजनेस था और न ही कोई वित्तीय आधार।
13 राज्यों में जमीनों पर चला सरकारी डंडा
ताजा कुर्की में गोवा, केरल, कर्नाटक, पंजाब, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, झारखंड, महाराष्ट्र, दिल्ली, पश्चिम बंगाल, आंध्र प्रदेश और राजस्थान जैसे राज्यों में स्थित कीमती जमीन के टुकड़े शामिल हैं। इसके अलावा, ईडी ने रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर के 13 बैंक खातों में जमा 77.86 करोड़ रुपये की राशि भी सीज कर दी है।
यह पूरा मामला यस बैंक, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया और बैंक ऑफ महाराष्ट्र की शिकायतों के बाद सीबीआई द्वारा दर्ज की गई एफआईआर पर आधारित है। ईडी का कहना है कि वे वित्तीय अपराध करने वालों का सक्रियता से पीछा कर रहे हैं और जनता के पैसे की पाई-पाई वसूलने के लिए प्रतिबद्ध हैं।



