Gujarat Gas Crisis: पश्चिम एशिया युद्ध से गुजरात के उद्योगों में हाहाकार, मोरबी में 100 फैक्ट्रियां बंद, जानें आपकी रसोई पर क्या होगा असर?

पश्चिम एशिया की जंग ने गुजरात की फैक्ट्रियों के पहिए थाम दिए हैं! हॉर्मुज संकट के कारण गैस सप्लाई में कटौती से मोरबी और सूरत के उद्योग संकट में हैं। केंद्र ने घरेलू गैस को बचाने के लिए नया नियम लागू किया है। क्या बंद हो जाएंगी हजारों फैक्ट्रियां? विस्तार से पढ़ें पूरी ग्राउंड रिपोर्ट।

  • पश्चिम एशिया युद्ध से आयातित गैस आपूर्ति बाधित
  • टेक्सटाइल सेक्टर में उत्पादन घटाने की नौबत।
  • घरेलू रसोई और सीएनजी को मिलेगी 100% गैस
  • प्रदूषण बोर्ड ने उद्योगों को 3 महीने के लिए अन्य ईंधन उपयोग की दी छूट।

अहमदाबाद/गांधीनगर: पश्चिम एशिया (Mid-East) में सुलगती जंग की आग अब गुजरात के औद्योगिक गलियारों तक पहुंच गई है। स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज (Strait of Hormuz) में उपजे कूटनीतिक और सैन्य गतिरोध के कारण भारत आने वाली नेचुरल गैस की सप्लाई चेन बुरी तरह छिन्न-भिन्न हो गई है।

इसका सबसे बड़ा खामियाजा देश के इंडस्ट्रियल पावरहाउस गुजरात को भुगतना पड़ रहा है। केंद्र सरकार ने अनिवार्य वस्तु अधिनियम के तहत घरेलू रसोई गैस (PNG) और परिवहन (CNG) को प्राथमिकता देने का आदेश जारी किया है जिसके बाद उद्योगों को मिलने वाली गैस में 20% से 30% तक की भारी कटौती कर दी गई है।

मोरबी में सन्नाटा, सूरत में बढ़ी चिंता

दुनिया के सबसे बड़े सिरेमिक क्लस्टर्स में शुमार मोरबी में हालात सबसे ज्यादा चिंताजनक हैं। यहां गैस की किल्लत और सप्लाई में फोर्स मेज्योर (Force Majeure) लागू होने के कारण करीब 100 से अधिक फैक्ट्रियों के भट्टे (Kilns) ठंडे पड़ चुके हैं। सिरेमिक उद्योग पूरी तरह नेचुरल गैस पर निर्भर है और सप्लाई में थोड़ी भी कटौती उत्पादन को ठप कर देती है।

वहीं सूरत के टेक्सटाइल हब में भी हलचल तेज है। करीब 12,000 कपड़ा इकाइयां जो गैस आधारित बॉयलरों का उपयोग करती हैं वे अनिश्चितता के साये में हैं। फेडरेशन ऑफ गुजरात वीवर्स वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष अशोक जीरावाला ने आगाह किया है कि यदि यह युद्ध लंबा खिंचा तो कपड़ा उद्योग को भारी चोट पहुंचेगी। फिलहाल उद्योगों ने एलपीजी सिलेंडरों की कालाबाजारी रोकने की मांग उठाई है।

केंद्र की नई प्राथमिकता सूची: किसे मिलेगी कितनी गैस?

पेट्रोलियम मंत्रालय ने 9 मार्च को ‘नेचुरल गैस (सप्लाई रेगुलेशन) ऑर्डर 2026’ लागू किया है। इस आदेश ने स्पष्ट कर दिया है कि संकट की इस घड़ी में सरकार की प्राथमिकता आम नागरिक हैं।

  • 100% सप्लाई: घरेलू पीएनजी और वाहनों के लिए सीएनजी को उनकी औसत खपत का पूरा हिस्सा मिलेगा।
  • 80% सप्लाई: मैन्युफैक्चरिंग और अन्य सामान्य उद्योगों को पिछले 6 महीने की औसत खपत का केवल 80% हिस्सा ही दिया जाएगा।
  • 70% सप्लाई: फर्टिलाइजर (उर्वरक) प्लांट को सबसे कम प्राथमिकता पर रखते हुए केवल 70% गैस दी जाएगी।

पावर सेक्टर पर छाया अंधेरा

गैस आधारित बिजली संयंत्रों की स्थिति और भी विकट हो गई है। गुजरात में देश की कुल गैस-आधारित बिजली क्षमता का लगभग 25-30% हिस्सा है। विशेषज्ञों का कहना है कि नई प्राथमिकता सूची में पावर प्लांट्स को सबसे नीचे रखा गया है। वर्तमान में देश के गैस पावर प्लांट्स को 70 मिलियन MMBtu गैस की जरूरत है जबकि उपलब्धता महज 15 मिलियन MMBtu ही रह गई है। इससे आने वाले गर्मियों के सीजन में पीक आवर्स के दौरान बिजली संकट गहराने की आशंका बढ़ गई है।

राहत की कोशिश में वैकल्पिक ईंधन को हरी झंडी

संकट को देखते हुए गुजरात प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (GPCB) ने उद्योगों को बड़ी राहत दी है। बोर्ड ने एक विशेष सर्कुलर जारी कर गैस पर निर्भर उद्योगों को अगले 3 महीनों के लिए वैकल्पिक अनुमोदित ईंधन (जैसे प्रोपेन या अन्य क्लीन फ्यूल) इस्तेमाल करने की अस्थायी अनुमति दे दी है। साथ ही अडानी टोटल गैस (ATGL) ने इंडस्ट्रियल कस्टमर्स के लिए अतिरिक्त गैस की कीमतों में कटौती कर उन्हें थोड़ी राहत देने की कोशिश की है।

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Saloni Yadav

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