- आईएनएस चिल्का में जोश का समंदर
- पासिंग आउट परेड में दिखा नारी शक्ति और अनुशासन का अद्भुत संगम
- अग्निपथ की अग्निपरीक्षा पार कर देश सेवा की राह पर निकले 2172 जांबाज
- सूर्यास्त की लालिमा के बीच आईएनएस चिल्का पर गूंजी जांबाजों की कदमताल
- बेटियों ने भी गाड़े झंडे: 113 महिला अग्निवीरों ने पेश की अटूट साहस की मिसाल
ओडिशा के चिल्का झील के किनारे जब गुरुवार की शाम ढल रही थी और आसमान में सिंदूरी रंगत छाई थी, ठीक उसी वक्त भारतीय नौसेना के इतिहास में एक नया अध्याय लिखा जा रहा था। आईएनएस चिल्का के परेड ग्राउंड पर जब 2,172 प्रशिक्षुओं के जूतों की धमक सुनाई दी, तो वहां मौजूद हर शख्स का सीना गर्व से चौड़ा हो गया। यह सिर्फ एक परेड नहीं थी, बल्कि 16 हफ्तों की कड़ी तपस्या, पसीने और अनुशासन के बाद आम युवाओं का देश के रक्षकों में बदलने का गौरवशाली क्षण था।
इस बैच की सबसे खास बात रही इसकी विविधता और इसमें शामिल नारी शक्ति की झलक। कुल 2,172 पास आउट होने वाले प्रशिक्षुओं में 2,103 अग्निवीर शामिल थे। इनमें 113 महिला अग्निवीरों ने जब कंधे से कंधा मिलाकर मार्च किया, तो यह बदलते भारत और भारतीय नौसेना की समावेशी सोच की जीती-जागती तस्वीर बन गई। इनके साथ 270 सीनियर सेकेंडरी रिक्रूट्स (मेडिकल असिस्टेंट), 44 स्पोर्ट्स कोटे से आए खिलाड़ी और भारतीय तटरक्षक बल के 295 नाविकों ने भी अपनी ट्रेनिंग पूरी की।
समंदर के इन प्रहरियों में दिखा गजब का जज्बा
दक्षिण नौसेना कमान के फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ, वाइस एडमिरल समीर सक्सेना ने मुख्य अतिथि के रूप में परेड की सलामी ली। रात के ढलते साये और फ्लड लाइट की रोशनी में जब इन जवानों ने परेड की, तो उनकी आंखों में देश सेवा की चमक साफ दिखाई दे रही थी। वाइस एडमिरल सक्सेना ने प्रशिक्षुओं को संबोधित करते हुए कहा कि ट्रेनिंग खत्म होना सिर्फ एक शुरुआत है। उन्होंने जवानों को नौसेना के मूल मंत्र 'कर्तव्य, सम्मान और साहस' को जीवन में उतारने की सीख दी।
उन्होंने विशेष रूप से उन माता-पिता का आभार व्यक्त किया जिन्होंने अपने कलेजे के टुकड़ों को राष्ट्र रक्षा के लिए समर्पित कर दिया। वाकई, जब परेड के बाद इन जवानों ने अपने परिजनों से मुलाकात की, तो माहौल बेहद भावुक हो गया। किसी मां की आंखों में खुशी के आंसू थे, तो कोई पिता अपने बेटे की वर्दी पर लगे पदक को निहार कर खुद को धन्य महसूस कर रहा था।
मेहनत को मिला सम्मान: अनीता और शशि ने मारी बाजी
ट्रेनिंग के दौरान असाधारण प्रदर्शन करने वाले जांबाजों को मेडल और ट्रॉफियों से नवाजा गया। शशि बी. केंचावागोल को सर्वश्रेष्ठ अग्निवीर (SSR) और जतिन मिश्रा को सर्वश्रेष्ठ अग्निवीर (MR) के लिए चीफ ऑफ द नेवल स्टाफ रोलिंग ट्रॉफी और गोल्ड मेडल दिया गया। वहीं, जनरल बिपिन रावत रोलिंग ट्रॉफी की हकदार अनीता यादव बनीं, जिन्हें ओवरऑल मेरिट में सर्वश्रेष्ठ महिला अग्निवीर चुना गया। नाविक श्रेणी में केशव सूर्यवंशी और सोमेंद्र ने बाजी मारी।
आईएनएस चिल्का के कमांडिंग ऑफिसर कमोडोर बी. दीपक अनिल की देखरेख में आयोजित इस समारोह ने यह साबित कर दिया कि भारतीय युवा तकनीकी रूप से सक्षम और शारीरिक रूप से किसी भी चुनौती से टकराने के लिए तैयार हैं।
यादों का पिटारा और जीत का जश्न
परेड से पहले हुए विदाई समारोह में खारावेला डिवीजन ने ओवरऑल चैंपियनशिप ट्रॉफी अपने नाम की, जबकि अशोक डिवीजन उपविजेता रहा। इस मौके पर 'अंकुर 2025' पत्रिका के दूसरे संस्करण का विमोचन भी किया गया। यह पत्रिका केवल पन्नों का पुलिंदा नहीं है, बल्कि उन यादों और अनुभवों का दस्तावेज है, जो इन अग्निवीरों ने अपनी 16 हफ्तों की ट्रेनिंग के दौरान जीए हैं। अब ये जवान आईएनएस चिल्का की दहलीज पार कर देश की समुद्री सीमाओं की रक्षा के लिए तैयार हैं।
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