राघव चड्ढा को AAP ने राज्यसभा उपनेता पद से हटाया: अशोक मित्तल बने नए उपनेता, जानें वजह

नई दिल्ली: आम आदमी पार्टी (AAP) के भीतर एक बड़े संगठनात्मक फेरबदल ने सियासी गलियारों में हलचल पैदा कर दी है। पार्टी ने अपने सबसे चर्चित चेहरों में से एक राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा को राज्यसभा में उपनेता के पद से हटा दिया है। उनकी जगह अब सांसद अशोक मित्तल को यह महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई है।

पार्टी ने इस संबंध में राज्यसभा सचिवालय को आधिकारिक तौर पर सूचित कर दिया है लेकिन इस फैसले के पीछे की कड़वी सच्चाई कुछ और ही इशारा कर रही है।

सिर्फ पद नहीं, ‘आवाज’ पर भी लगाम!

सूत्रों के हवाले से जो खबर आ रही है वो बेहद चौंकाने वाली है। बताया जा रहा है कि पार्टी ने न केवल राघव को पद से हटाया है बल्कि राज्यसभा सचिवालय से यह भी कहा है कि उन्हें सदन में बोलने के लिए समय आवंटित न किया जाए।

यह उस सांसद के लिए बड़ा झटका है जो हाल के दिनों में एयरपोर्ट पर महंगी चाय, टैक्स का बोझ और मिलावटखोरी जैसे आम आदमी से जुड़े मुद्दों पर संसद में काफी मुखर रहे थे।

क्यों गिजी राघव पर गाज? ये हैं 3 बड़ी वजहें:

  1. पार्टी लाइन से आउट होना: सूत्रों का कहना है कि राघव चड्ढा संसद में क्या बोलेंगे, इसकी जानकारी अक्सर पार्टी नेतृत्व को नहीं होती थी। बिना आंतरिक चर्चा के मुद्दे उठाने को लेकर उन्हें पहले भी चेतावनी दी गई थी। इसे अनुशासनहीनता और संगठनात्मक तालमेल की कमी माना गया।

  2. खास मौकों पर रहस्यमयी चुप्पी: जब दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया को कोर्ट से बड़ी राहत मिली तब राघव चड्ढा की ओर से कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया या जश्न सामने नहीं आया। नेतृत्व की नजर में उनकी यह चुप्पी सवालों के घेरे में रही।

  3. सांसदों का आपसी असंतोष: आरोप है कि राघव राज्यसभा में पार्टी को मिलने वाले समय का बड़ा हिस्सा खुद इस्तेमाल कर लेते थे। इससे पार्टी के अन्य सांसदों में यह संदेश गया कि उन्हें अपनी बात रखने का पर्याप्त मौका नहीं मिल रहा है।

आपसी खींचतान आई सामने

संजय सिंह की अनुपस्थिति में राघव चड्ढा को उपनेता की जिम्मेदारी दी गई थी और उन्होंने कई अहम बहसों में सरकार को घेरा भी था।

लेकिन अब पार्टी का सामूहिक निर्णय और अनुशासन का हवाला देना यह साफ करता है कि आप के भीतर सब कुछ ठीक नहीं है।

फिलहाल राघव चड्ढा की ओर से इस पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है लेकिन अशोक मित्तल की नियुक्ति ने यह स्पष्ट कर दिया है कि पार्टी अब नए संतुलन की तलाश में है।

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