- नए साल से महंगी हो सकती है LPG
- अमेरिका से LPG आयात का पहला लॉन्ग-टर्म करार
- सब्सिडी पर संकट, कीमतें बढ़ने के संकेत
- जनवरी 2026 में गैस सिलेंडर झटका संभव
LPG Price Hike: नया साल शुरू होते ही आम घरों के बजट पर सबसे पहले असर डालने वाली चीज़ होती है – गैस सिलेंडर की कीमत। इस बार मामला और गंभीर है, क्योंकि सरकारी तेल कंपनियों ने अमेरिका से LPG सप्लाई का पहला लॉन्ग-टर्म कॉन्ट्रैक्ट साइन किया है। इससे देश की गैस लागत का पूरा समीकरण बदल सकता है।
अमेरिका से पहला बड़ा अनुबंध
हाल ही में इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम ने 2026 कांट्रैक्ट ईयर के लिए अमेरिका से करीब 2.2 मिलियन मीट्रिक टन प्रतिवर्ष LPG आयात पर एक साल का करार किया है।
यह अकेले देश की कुल LPG खपत का लगभग 10 प्रतिशत हिस्सा है। अब तक ये कंपनियां अमेरिकी LPG को केवल ‘स्पॉट मार्केट’ से खरीदती रही हैं, लेकिन यह पहली बार है जब उन्होंने दीर्घकालिक सप्लाई के लिए साइन किया है।
क्यों बदल जाएगा सब्सिडी का समीकरण
अमेरिकी LPG की लॉजिस्टिक कॉस्ट सऊदी अरब की तुलना में करीब चार गुना अधिक है। फिलहाल भारत सरकार सब्सिडी की गणना सऊदी प्राइस फॉर्मूले के आधार पर करती है।
ऐसे में जब आपूर्ति का बड़ा हिस्सा अब अमेरिकी स्रोत से आएगा, तो सब्सिडी की मौजूदा दरों को कायम रखना सरकार के लिए मुश्किल हो सकता है।
यदि विदेशी शिपमेंट पर कोई मूल्य छूट नहीं मिलती, तो सब्सिडी में सीधी कटौती की संभावना बढ़ जाएगी।
संभावित असर आम जनता पर
सरकार फिलहाल उज्ज्वला योजना के तहत लाभार्थियों को 300 रुपए तक की सब्सिडी देती है।
मगर अगर अमेरिकी LPG महंगी पड़ी, तो सरकार को या तो सब्सिडी घटानी होगी या कीमतों में संशोधन करना पड़ेगा।
इसका सीधा मतलब है कि नए साल के साथ घरेलू गैस सिलेंडर का बोझ आम लोगों की जेब पर और भारी महसूस हो सकता है।
मौजूदा कीमतें और पिछला बदलाव
आईओसीएल के आंकड़ों के मुताबिक, फिलहाल दिल्ली में घरेलू गैस सिलेंडर की कीमत 853 रुपए है, जबकि कमर्शियल सिलेंडर 1,580.50 रुपए में मिल रहा है।
आखिरी बार 8 अप्रैल 2025 को कीमतों में संशोधन हुआ था, जब 50 रुपए की बढ़ोतरी की गई थी।
अगर इस बार आपूर्ति की शर्तें और महंगी हो जाती हैं, तो सरकार के पास विकल्प सीमित रह जाएंगे।
आगे क्या हो सकता है?
फिलहाल वित्त मंत्रालय और तेल मंत्रालय के बीच इस पर बातचीत जारी है कि अमेरिकी LPG की लागत को कैसे समायोजित किया जाए।
अगर किसी रियायत पर सहमति नहीं बनती, तो जनवरी 2026 में एलपीजी कीमतों में बढ़ोतरी तय मानी जा रही है।
आम रसोई पर इसका असर सिर्फ एक सिलेंडर तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरे घरेलू खर्च के ढांचे को प्रभावित कर सकता है।
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