8वें वेतन आयोग पर बढ़ी हलचल: 2026 में बदल सकता है केंद्रीय कर्मचारियों का सैलरी ढांचा, जानिए नए फिटमेंट फैक्टर का असर
सरकारी कर्मचारियों और पेंशनर्स में 8वें वेतन आयोग को लेकर उत्सुकता बढ़ी। 2026 से नए वेतन ढांचे की उम्मीद, फिटमेंट फैक्टर बनेगा वेतन वृद्धि की मुख्य कुंजी।
- केंद्र सरकार ने 8वें वेतन आयोग पर काम शुरू किया, जल्द आ सकती है सिफारिशें।
- नया ‘फिटमेंट फैक्टर’ तय करेगा वेतन और पेंशन में बढ़ोतरी का अनुपात।
- 1 जनवरी 2026 से लागू होने की संभावना, कर्मचारियों में बढ़ा उत्साह।
- निचले लेवल के कर्मचारियों को सबसे अधिक फायदा मिलने की उम्मीद।
नई दिल्ली। केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनर्स के बीच 8वें केंद्रीय वेतन आयोग (8th Central Pay Commission) को लेकर चर्चाएं अब तेज हो चली हैं। लंबे इंतजार के बाद आयोग का गठन हो चुका है और संकेत साफ हैं कि साल 2026 की शुरुआत नए वेतन ढांचे (Pay Structure) के साथ हो सकती है।
सरकार द्वारा विशेषज्ञ सदस्यों की नियुक्ति के बाद यह माना जा रहा है कि आने वाले महीनों में आयोग अपनी पहली रिपोर्ट पेश करेगा। कर्मचारी वर्ग की सबसे बड़ी उम्मीद इस बात से जुड़ी है कि उनकी बेसिक सैलरी (Basic Salary) और पेंशन में कितनी बढ़ोतरी की जाएगी।
10 साल बाद फिर बदलेगा सैलरी सिस्टम
केंद्र हर दशक में नया वेतन आयोग लाकर कर्मचारियों की आमदनी को महंगाई और आर्थिक स्थिति के अनुरूप करने का प्रयास करती है। इसी परिपाटी में 8वां वेतन आयोग भी आर्थिक परिदृश्य को देखकर नए सुझावों पर काम करेगा। पिछले वेतन आयोगों की तरह इस बार भी मकान किराया भत्ता (HRA), यात्रा भत्ता (TA) और महंगाई भत्ता (DA) में बदलाव तय माने जा रहे हैं।
वित्त मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक, सरकार का लक्ष्य इस बार वेतन संरचना को “long-term sustainable” बनाना है ताकि जीवन-यापन की लागत (Cost of Living) में आने वाले वर्षों तक संतुलन बना रहे।
फिटमेंट फैक्टर बनेगा मुख्य आधार
इस आयोग की सबसे अहम गणना “फिटमेंट फैक्टर” (Fitment Factor) को लेकर होगी। यही तय करेगा कि मौजूदा बेसिक सैलरी में कितनी वृद्धि होगी। सातवें वेतन आयोग में यह फैक्टर 2.57 रखा गया था, जिससे न्यूनतम वेतन 7,000 रुपये से बढ़कर 18,000 रुपये हुआ था। अब कर्मचारियों की नजर इस बात पर है कि यह नया फैक्टर 3.0 से पार जाता है या नहीं।
आर्थिक विशेषज्ञों का कहना है कि अगर फिटमेंट फैक्टर 3 से अधिक रखा गया, तो कर्मचारियों की इन-हैंड सैलरी (In-Hand Salary) में औसतन 25 से 35 फीसदी तक का उछाल देखने को मिल सकता है। इससे एक बड़ा वर्ग राहत महसूस करेगा खासकर वे जो लेवल 1 से 5 के बीच आते हैं।
हर लेवल पर अलग असर
केंद्रीय कर्मचारियों की वर्तमान पे मैट्रिक्स (Pay Matrix) में 18 लेवल हैं। निचले ग्रुप D और C के कर्मचारियों का प्रभाव ऊपरी ग्रुप A अधिकारियों से अलग रहेगा। वरिष्ठ अधिकारियों (Senior Officers) की सैलरी बढ़ोतरी प्रतिशत के हिसाब से अलग दिखेगी जबकि निचले स्तर पर यह असर ज्यादा महसूस होगा।
पेंशनभोगियों (Pensioners) के लिए भी आयोग नए हिसाब से पेंशन स्ट्रक्चर तय करेगा। इससे रिटायर्ड कर्मचारियों को भी महंगाई राहत (Dearness Relief) के साथ नई गणना से लाभ पहुंचाया जाएगा।
लागू होने की संभावित तारीख
सरकारी सूत्रों के अनुसार आयोग की सिफारिशें पूरी होने के बाद यह व्यवस्था 1 जनवरी 2026 से लागू की जा सकती है। हालांकि दरें और अंतिम प्रस्ताव वित्त मंत्रालय की स्वीकृति के बाद ही तय होंगे।
फिलहाल कर्मचारियों और पेंशनर्स दोनों की निगाहें इस रिपोर्ट पर टिकी हैं, जो आने वाले सालों में उनकी आर्थिक स्थिति को नई दिशा दे सकती है।



