हरियाणा में कुदरत की दोहरी मार: झमाझम बारिश और तेज हवाओं ने बढ़ाई धड़कनें, किसानों के लिए अगले 72 घंटे भारी
हरियाणा में बेमौसम बारिश और तेज हवाओं से तापमान में गिरावट आई है। मौसम विभाग ने 31 मार्च को बारिश और 3 अप्रैल को दोबारा मौसम खराब होने की चेतावनी दी है। किसानों को फसल सुरक्षा और कीट प्रबंधन के लिए विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।
- हरियाणा में बारिश का दौर जारी, गिरा पारा
- 31 मार्च को तेज हवाओं और गरज-चमक का अलर्ट
- 1-2 अप्रैल को राहत, 3 अप्रैल से फिर बदलेगा मौसम
- किसानों को सिंचाई और छिड़काव रोकने की सलाह
चंडीगढ़/रोहतक: हरियाणा में चैत्र के महीने में सावन जैसा नजारा है, लेकिन यह सुहावना मौसम प्रदेश के अन्नदाताओं के लिए आफत बनकर बरसा है। पिछले 24 घंटों से राज्य के अलग-अलग हिस्सों में रुक-रुक कर हो रही बूंदाबांदी और 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चल रही ठंडी हवाओं ने न केवल पारे को नीचे गिराया है, बल्कि पकने की कगार पर खड़ी फसलों पर भी संकट के बादल मंडरा दिए हैं।
तापमान में गोता, गर्मी से राहत पर चिंता बरकरार
मौसम विभाग (IMD) के ताजा बुलेटिन के अनुसार, आज यानी 31 मार्च को भी आसमान से राहत मिलने के आसार कम हैं। गरज-चमक के साथ बौछारें पड़ने का सिलसिला जारी रहेगा। बीते कल हुई बारिश की वजह से दिन और रात के तापमान में सामान्य से 2 से 3 डिग्री की गिरावट दर्ज की गई है। हालांकि, शहरों में रहने वाले लोगों को भीषण गर्मी से राहत मिली है, लेकिन ग्रामीण अंचलों में सन्नाटा और चिंता पसरी हुई है।
अगले कुछ दिन: राहत और फिर आफत की आहट
राहत की खबर यह है कि 1 और 2 अप्रैल को मौसम के मिजाज में सुधार देखने को मिलेगा। खिली धूप निकलने से भीग चुकी फसलों को सहारा मिल सकता है। लेकिन यह राहत क्षणिक है। मौसम वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि 3 अप्रैल को एक नया पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय हो सकता है, जिससे एक बार फिर धूल भरी आंधी और गरज के साथ बारिश की संभावना है। पूरे हफ्ते के दौरान तापमान में 3 से 4 डिग्री की बढ़ोतरी भी दर्ज की जा सकती है।
अन्नदाताओं के लिए ‘रेड अलर्ट’: क्या करें और क्या न करें?
कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को सख्त हिदायत दी है कि इस अनिश्चित मौसम में सिंचाई और कीटनाशकों के छिड़काव से पूरी तरह परहेज करें।
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गेहूं की फसल: पीला रतुआ (Yellow Rust) की निगरानी बढ़ा दें, क्योंकि बढ़ती नमी इस बीमारी को दावत दे सकती है।
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सरसों व अन्य फसलें: कटाई के बाद फसल को खुले में न छोड़ें, तिरपाल या सुरक्षित स्थान का प्रबंध रखें।
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पशुपालन: पशुपालकों को सलाह दी गई है कि जानवरों को खुले आसमान के नीचे न बांधें और उनके चारे को भीगने से बचाएं।
