दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे पर दर्दनाक हादसा: टायर बदलते समय दंपति की मौत, चार मासूमों के सिर से उठा साया

Vinod Yadav
3 Min Read
दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे पर दर्दनाक हादसा: टायर बदलते समय दंपति की मौत, चार मासूमों के सिर से उठा साया

Haryana News: दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे की चमचमाती सड़क पर एक बार फिर रफ्तार का कहर मौत बनकर टूटा है। फिरोजपुर झिरका थाना क्षेत्र में हुए एक हृदयविदारक हादसे ने न सिर्फ एक हंसते-खेलते परिवार को उजाड़ दिया बल्कि चार मासूम बच्चों की दुनिया ही अंधेरे में धकेल दी।

कमालपुरा महुवा के रहने वाले दीपेंद्र अपनी पत्नी आशा और परिवार के दो अन्य सदस्यों के साथ खुशियों की उम्मीद लेकर दिल्ली की तरफ जा रहे थे लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था।

हादसे की शुरुआत एक मामूली टायर पंक्चर से हुई। एक्सप्रेसवे पर सफर के दौरान जब चैनल नंबर 68 के पास दीपेंद्र की कार का टायर जवाब दे गया तो उन्होंने सड़क के किनारे गाड़ी रोक दी।

वह और उनका परिवार शायद यह सोच भी नहीं सकते थे कि टायर बदलना उनके जीवन का आखिरी फैसला साबित होगा।

जिस वक्त गाड़ी का पहिया बदलने की कोशिश चल रही थी तभी पीछे से मौत बनकर आ रही एक दूसरी कार ने उनकी खड़ी गाड़ी को ऐसी जोरदार टक्कर मारी कि मौके पर मौजूद लोगों की रूह कांप गई।

टक्कर इतनी भीषण थी कि कार का पिछला हिस्सा पूरी तरह पिचक गया। इस भयानक भिड़ंत में दीपेंद्र और उनकी पत्नी आशा को संभलने तक का मौका नहीं मिला और दोनों ने मौके पर ही दम तोड़ दिया।

लोहे के मलबे में तब्दील हो चुकी कार की हालत देख इस बात का अंदाजा लगाया जा सकता है कि पीछे वाली गाड़ी की रफ्तार कितनी खतरनाक रही होगी।

हादसे में घायल हुए दो अन्य लोगों को खून से लथपथ हालत में तुरंत नजदीकी अस्पताल पहुँचाया गया जहाँ उनकी स्थिति गंभीर बनी हुई है।

सूचना मिलते ही पुलिस दल-बल के साथ मौके पर पहुँची। पुलिस ने शवों को कब्जे में लेकर मोर्चरी भेज दिया है और कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है। लेकिन इस कानूनी कार्रवाई और पोस्टमार्टम की कागजी कार्यवाही के बीच सबसे बड़ा सवाल उन चार बच्चों का है जिन्होंने एक पल में अपने मां और बाप दोनों को खो दिया। दीपेंद्र अपने पीछे तीन बेटियां और एक बेटा छोड़ गए हैं।

इस खबर ने कमालपुरा महुवा गांव में सन्नाटा पसर दिया है। एक्सप्रेसवे पर सुरक्षा और रफ्तार के मानकों को लेकर एक बार फिर बहस छिड़ गई है। लोग पूछ रहे हैं कि क्या एक्सप्रेसवे की रफ़्तार इतनी अंधी हो गई है कि किनारे खड़ी गाड़ियाँ भी अब सुरक्षित नहीं हैं?

फिलहाल पुलिस उस दूसरी कार के चालक और हादसे के तकनीकी पहलुओं की जांच कर रही है, लेकिन उन चार मासूमों की आंखों के आंसू शायद कभी नहीं सूख पाएंगे।

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नमस्कार! मेरा नाम विनोद यादव है और मैंने कृषि और टेक्सटाइल विषय के साथ में बी-टेक किया है। मौजूदा समय में एक जर्मनी बेस्ड टेक्सटिल कंपनी में प्रोडक्शन हेड के तौर पर कार्य कर रहा हूँ और साथ में कृषि के कार्यों को देखता हूँ। किसान परिवार में पैदा होने के चलते कृषि से शुरू से ही एक अलग प्रकार का जुड़ाव रहा है। रोजाना यहां हरियाणा से जुड़ी और हरियाणा प्रदेश के किसानों से जुड़ी ख़बरों को अपडेट करता हूँ।
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