नई दिल्ली। NFLSpice News: संसद के मानसून सत्र के पहले ही दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के बीच परोक्ष रूप से तीखी जुबानी जंग शुरू हो गई है। सत्र की कार्यवाही शुरू होने से पहले मीडिया को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने देश के युवा इनोवेटर्स और स्टार्ट-अप्स की तारीफ करते हुए राहुल गांधी पर एक बड़ा सियासी तंज कसा। पीएम के इस बयान के तुरंत बाद कांग्रेस आलाकमान और राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने प्रधानमंत्री के पुराने बयानों को याद दिलाते हुए उन पर तीखा पलटवार किया है, जिससे संसद का तापमान बेहद बढ़ गया है।

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पीएम मोदी ने कहा- मैं किसी '56 साल के युवा' की बात नहीं कर रहा

दरअसल, संसद परिसर में मीडिया से बात करते हुए पीएम मोदी ने भारतीय स्पेस स्टार्ट-अप 'स्काईरूट एयरोस्पेस' के वैज्ञानिकों की सफलता की जमकर सराहना की। युवाओं की तारीफ करते हुए पीएम ने मुस्कुराते हुए कहा कि वह देश के उन 28-28 साल के असली नौजवानों की बात कर रहे हैं जिन्होंने अंतरिक्ष के क्षेत्र में भारत का नाम रोशन किया है, वह किसी '56 साल के युवा' (Youngster) की बात नहीं कर रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, प्रधानमंत्री का यह परोक्ष इशारा सीधे तौर पर राहुल गांधी की तरफ था।

मल्लिकार्जुन खड़गे का पलटवार- कहां गया आपका 56 इंच का सीना?

प्रधानमंत्री के इस कटाक्ष पर कांग्रेस ने बेहद आक्रामक रुख अख्तियार कर लिया है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने तुरंत मोर्चा संभालते हुए कहा कि प्रधानमंत्री का काम सिर्फ दूसरों पर ताने कसना और फब्तियां कसना रह गया है। खड़गे ने दिल्ली में नीट परीक्षा को लेकर प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर हुए लाठीचार्ज का मुद्दा उठाते हुए पूछा, "दूसरों पर तंज कसने से पहले प्रधानमंत्री अपनी साख साबित करें। देश के युवा आज सड़कों पर लाठियां खा रहे हैं और पेपर लीक से परेशान हैं, ऐसे में आपका वो '56 इंच का सीना' अब कहां चला गया?"

राहुल गांधी ने मोदी को बताया 'युवा विरोधी प्रधानमंत्री'

उधर, जंतर-मंतर पर हुए हंगामे के बाद राहुल गांधी ने भी सोशल मीडिया पर एक वीडियो संदेश जारी कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को आड़े हाथों लिया। राहुल गांधी ने पीएम मोदी को देश के इतिहास का सबसे 'युवा विरोधी प्रधानमंत्री' करार देते हुए कहा कि जो छात्र दिल्ली की सड़कों पर इंसाफ और साफ-सुथरी शिक्षा प्रणाली की मांग कर रहे हैं, वे अपराधी नहीं हैं। सरकार उन पर आंसू गैस के गोले और लाठियां बरसाकर लोकतंत्र का गला घोंट रही है। संसद के भीतर और बाहर दोनों तरफ इस बयानबाजी के बाद मानसून सत्र के बेहद हंगामेदार रहने के आसार हैं।