नई दिल्ली। NFLSpice News: संसद के मानसून सत्र के पहले दिन दिल्ली की सड़कों पर मचे भारी बवाल के बाद कांग्रेस सांसद और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर अब तक का सबसे तीखा हमला बोला है। नीट (NEET-UG) परीक्षा में हुई धांधली और पेपर लीक के खिलाफ जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण मार्च निकाल रहे छात्रों पर पुलिस द्वारा किए गए बल प्रयोग की निंदा करते हुए राहुल गांधी ने पीएम मोदी को देश के इतिहास का सबसे 'युवा विरोधी प्रधानमंत्री' करार दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा सरकार देश के करोड़ों नौजवानों के भविष्य और उनकी मेहनत को चंद उद्योगपतियों और भ्रष्ट माफियाओं के हाथों बेच रही है।
छात्र अपराधी नहीं, देश का भविष्य हैं: राहुल गांधी
एक विशेष वीडियो संदेश और प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए अपनी बात रखते हुए राहुल गांधी ने कहा कि आज देश का युवा बेहद पीड़ा और असुरक्षा के दौर से गुजर रहा है। वर्षों तक कड़े परिश्रम और आर्थिक तंगियों से जूझते हुए छात्र परीक्षाओं की तैयारी करते हैं, लेकिन परीक्षा के दिन ही पेपर लीक हो जाता है। उन्होंने कहा, "जब ये पीड़ित छात्र देश की राजधानी में आकर शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखना चाहते हैं, तो यह सरकार उन पर लाठियां बरसवाती है और आंसू गैस के गोले छोड़ती है। हमारे देश के छात्र कोई अपराधी नहीं हैं, वे भारत का भविष्य हैं और उनके साथ अपराधियों जैसा सुलूक कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।"
प्रधानमंत्री मोदी भारत के इतिहास के सबसे युवा-विरोधी प्रधानमंत्री हैं - इतने युवा विरोधी कि एक नाकाम शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा भी नहीं ले सकते।
— Rahul Gandhi (@RahulGandhi) July 20, 2026
152 पेपर लीक। 7.5 करोड़ छात्र पीड़ित। और सज़ा एक दोषी को भी नहीं। सजा किसे मिली? मेहनती युवाओं को।
और जब इन बच्चों ने… pic.twitter.com/DbX5L4Iq5C
संसद से लेकर सड़क तक जारी रहेगा युवाओं के लिए संघर्ष
राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री मोदी की उस टिप्पणी का भी जवाब दिया, जिसमें उन्होंने परोक्ष रूप से उन पर तंज कसा था। राहुल ने कहा कि देश को इस समय जुमलेबाजी और दूसरों का मजाक उड़ाने वाले नेतृत्व की नहीं, बल्कि युवाओं को रोजगार और सुरक्षित भविष्य देने वाली नीतियों की जरूरत है। उन्होंने देश भर के छात्रों को भरोसा दिलाते हुए कहा कि इंडिया (INDIA) गठबंधन पूरी मुस्तैदी के साथ संसद के भीतर इस मुद्दे को उठाएगा और सरकार को तब तक चैन से नहीं बैठने देगा, जब तक कि नीट घोटाले के पीड़ितों को पूर्ण न्याय नहीं मिल जाता और एक पारदर्शी परीक्षा प्रणाली लागू नहीं हो जाती।