Haryana Weather Update: हरियाणा की आबोहवा में इन दिनों एक अजीब सी बेचैनी है। मार्च के जाते-जाते जिस तरह से बादलों ने डेरा डाला और जमकर बरसे, उसने तपिश से राहत तो दी लेकिन खेतों में खड़ी सोने जैसी फसल पर आफत बनकर टूटे हैं। प्रदेश के कई इलाकों में हुई बारिश और कुछ जगहों पर गिरी ओलों की मार ने किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें गहरी कर दी हैं। फिलहाल मौसम थोड़ा शांत जरूर है लेकिन यह शांति शायद लंबे समय तक नहीं रहने वाली।
मौसम के इस बदलते गणित को लेकर चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के मौसम विज्ञान विभाग के अध्यक्ष डॉ. मदन लाल खीचड़ ने एक अहम चेतावनी साझा की है। उनके मुताबिक अभी संकट पूरी तरह टला नहीं है। एक नया पश्चिमी विक्षोभ फिर से दस्तक दे रहा है जिसका असर 2 अप्रैल की रात से ही दिखाई देने लगेगा। यह खबर उन किसानों के लिए किसी झटके से कम नहीं है जो बारिश थमने के बाद फिर से अपने औजार संभालने की तैयारी में थे।
तीन और चार अप्रैल को फिर बिगड़ेगा मिजाज
वैज्ञानिकों का आकलन है कि 3 और 4 अप्रैल को हिसार समेत आसपास के क्षेत्रों में मौसम फिर से करवट लेगा। इस दौरान आसमान में बिजली की कड़क के साथ हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है।
सबसे ज्यादा डर ओलावृष्टि को लेकर है क्योंकि पिछले दिनों हुई ओलावृष्टि ने पहले ही फसलों को आंशिक रूप से काफी चोट पहुंचाई है। अगर दोबारा ऐसी स्थिति बनती है, तो दाना गिरने और फसल के बिछने का खतरा बढ़ जाएगा।
हालांकि आज और कल के बीच तापमान में मामूली बढ़त देखी जा सकती है, जिससे थोड़ी गर्मी महसूस होगी। पर यह महज आने वाले तूफान से पहले की शांति लग रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि होली के बाद अमूमन मौसम साफ हो जाता था लेकिन इस बार कुदरत का मिजाज कुछ अलग ही कहानी लिख रहा है।
खेत खलिहानों के लिए जरूरी सलाह
अन्नदाताओं के लिए यह समय बहुत ही नाजुक है। कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को दो-टूक सलाह दी है कि वे फिलहाल जल्दबाजी न दिखाएं। फसल की कटाई को कुछ दिनों के लिए टालना ही समझदारी होगी।
इसके साथ ही खेतों में सिंचाई का काम भी अभी रोक देना चाहिए क्योंकि मिट्टी में नमी पहले से ज्यादा है और आने वाली बारिश फसलों की जड़ें कमजोर कर सकती है।
जब तक आसमान पूरी तरह से साफ न हो जाए और मौसम विभाग की तरफ से हरी झंडी न मिल जाए तब तक कटाई का काम शुरू करना जोखिम भरा हो सकता है। फिलहाल हरियाणा के किसान आसमान की ओर उम्मीद और डर दोनों निगाहों से देख रहे हैं कि शायद आने वाले ये दो-तीन दिन शांति से गुजर जाएं।

