Haryana News: कलानौर थाने में ई-सबइंस्पेक्टर कुलदीप ने खुद को गोली मारी, पीजीआई में मौत से पुलिस महकमे में हड़कंप

Vinod Yadav
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Vinod Yadav
नमस्कार! मेरा नाम विनोद यादव है और मैंने कृषि और टेक्सटाइल विषय के साथ में बी-टेक किया है। मौजूदा समय में एक जर्मनी बेस्ड टेक्सटिल कंपनी...
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Haryana News: कलानौर थाने में ई-सबइंस्पेक्टर कुलदीप ने खुद को गोली मारी, पीजीआई में मौत से पुलिस महकमे में हड़कंप

Haryana News: कलानौर पुलिस स्टेशन का वह कोना आज एक ऐसी खामोशी ओढ़े खड़ा है, जिसे शायद ही वहां तैनात कोई पुलिसकर्मी कभी भूल पाए। रोहतक के कलानौर थाने में सोमवार की दोपहर जब आम दिनों की तरह कामकाज चल रहा था तभी एक सरकारी रिवाल्वर से निकली गोली की आवाज़ ने सबको सुन्न कर दिया।

कोई कुछ समझ पाता उससे पहले ही ई-सबइंस्पेक्टर कुलदीप लहूलुहान हालत में जमीन पर गिर चुके थे। उन्होंने अपनी ही सर्विस रिवाल्वर से खुद के सिर में गोली मारकर अपनी जीवनलीला समाप्त कर ली।

मूल रूप से झज्जर जिले के डीघल गांव के रहने वाले कुलदीप फिलहाल रोहतक के कमला नगर (झज्जर चुंगी) में रह रहे थे। वे ईआरवी 594 पर तैनात थे और अपनी जिम्मेदारियों को बखूबी निभा रहे थे। सोमवार को वे दोपहर का खाना खाने के लिए थाने आए थे।

खाना खाने के बाद वे परिसर में ही एक तरफ गए और अचानक यह खौफनाक कदम उठा लिया। गोली की आवाज़ सुनते ही साथी पुलिसकर्मी मौके की तरफ दौड़े, मंजर देखकर हर कोई दंग रह गया।

आनन-फानन में खून से लथपथ कुलदीप को रोहतक पीजीआई ले जाया गया। डॉक्टरों की टीम ने उन्हें बचाने की हर मुमकिन कोशिश की लेकिन कुदरत को कुछ और ही मंजूर था। जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया गया।

एक वर्दीधारी का इस तरह चले जाना पुलिस महकमे के लिए किसी गहरे सदमे से कम नहीं है। घटना की सूचना मिलते ही वरिष्ठ पुलिस अधिकारी मौके पर पहुंचे और बारीकी से साक्ष्य जुटाए गए।

अभी तक यह साफ नहीं हो पाया है कि आखिर ऐसी क्या वजह थी जिसने एक अनुभवी अधिकारी को इस कदर तोड़ दिया कि उन्हें मौत को गले लगाना बेहतर लगा। क्या यह काम का बोझ था कोई पारिवारिक उलझन या फिर मन के किसी कोने में दबा कोई पुराना दर्द?

पुलिस अब इन्हीं सवालों के जवाब तलाश रही है। अधिकारियों का कहना है कि मामले की हर एंगल से जांच की जा रही है ताकि आत्महत्या के पीछे की असली वजह सामने आ सके।

कुलदीप के साथ काम करने वाले साथी बताते हैं कि वे एक बेहद मेहनती और मिलनसार इंसान थे। ड्यूटी के दौरान उनके चेहरे पर कभी तनाव की ऐसी लकीरें नहीं देखी गईं जो इतने बड़े हादसे का इशारा दें।

इधर झज्जर में उनके पैतृक गांव डीघल और रोहतक स्थित उनके घर पर मातम पसरा हुआ है। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है और पूरे इलाके में शोक की लहर है।

वर्दी की आन-बान और शान के बीच एक सिपाही का इस तरह खामोश हो जाना व्यवस्था और मानसिक स्वास्थ्य पर भी कई गंभीर सवाल खड़े कर गया है।

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नमस्कार! मेरा नाम विनोद यादव है और मैंने कृषि और टेक्सटाइल विषय के साथ में बी-टेक किया है। मौजूदा समय में एक जर्मनी बेस्ड टेक्सटिल कंपनी में प्रोडक्शन हेड के तौर पर कार्य कर रहा हूँ और साथ में कृषि के कार्यों को देखता हूँ। किसान परिवार में पैदा होने के चलते कृषि से शुरू से ही एक अलग प्रकार का जुड़ाव रहा है। रोजाना यहां हरियाणा से जुड़ी और हरियाणा प्रदेश के किसानों से जुड़ी ख़बरों को अपडेट करता हूँ।